25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी में दो घोषित अपराधी दबोचे, एक 17 साल से था फरार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी में दो घोषित अपराधी दबोचे, एक 17 साल से था फरार

सारांश

17 साल और 6 साल से फरार दो घोषित अपराधियों को सीबीआई ने दबोचा — एक नई दिल्ली के द्वारका मोड़ से, दूसरा लुधियाना से। दोनों पर बैंकों को कुल ₹10 करोड़ से अधिक का चूना लगाने का आरोप है। यह गिरफ्तारी सीबीआई के आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध जारी अभियान की ताज़ा कड़ी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी के दो अलग मामलों में जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा को गिरफ्तार किया।
जितेंद्र कुमार 17 वर्षों से फरार था; उसे 25 अगस्त को द्वारका मोड़, नई दिल्ली से पकड़ा गया।
जितेंद्र कुमार पर जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस को ₹65.90 लाख का नुकसान पहुँचाने का आरोप है।
पूजा पाहवा 6 वर्षों से फरार थी; उसे 4 अगस्त को लुधियाना, पंजाब से गिरफ्तार किया गया।
पूजा पाहवा पर इंडियन ओवरसीज बैंक को ₹10.16 करोड़ का नुकसान पहुँचाने का आरोप है।
दोनों को क्रमशः जनवरी 2013 और 2023 में घोषित अपराधी (PO) करार दिया गया था।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा के रूप में हुई है, जो क्रमशः 17 वर्ष और 6 वर्ष से न्यायिक प्रक्रिया से बचते आ रहे थे। इन गिरफ्तारियों को सीबीआई की आर्थिक अपराध के विरुद्ध चल रही मुहिम में अहम कामयाबी माना जा रहा है।

जितेंद्र कुमार का मामला

जितेंद्र कुमार पर आरोप है कि उसने 2002-03 में नकली और जाली सैलरी सर्टिफिकेट के आधार पर होम लोन हासिल किया, जिसके चूक (डिफॉल्ट) से जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को ₹65.90 लाख का नुकसान हुआ। ऋण जारी होते ही खाते को एनपीए (NPA) घोषित कर दिया गया था।

2006 में जितेंद्र कुमार सहित 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। वह जानबूझकर मुकदमे की कार्यवाही से दूर रहा और 2009 से अदालत में पेश नहीं हुआ। जनवरी 2013 में उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) करार दिया गया। सीबीआई की निरंतर कोशिशों के बाद उसे 25 अगस्त को द्वारका मोड़, नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। उसे सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

पूजा पाहवा का मामला

पूजा पाहवा पर आरोप है कि उसने गलत और जाली दस्तावेजों के आधार पर कैश क्रेडिट सुविधा प्राप्त कर उसका दुरुपयोग और गबन किया, जिससे इंडियन ओवरसीज बैंक को ₹10.16 करोड़ की चपत लगी। संबंधित खाते को 2012 में एनपीए घोषित किया गया था।

2017 में 5 अन्य आरोपियों के साथ उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। लाभार्थी कंपनी और व्यक्तियों के साथ कथित मिलीभगत के लिए चार बैंक अधिकारियों के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई थी। पूजा पाहवा 2022 से अदालत में पेश नहीं हुई और 2023 में उसे घोषित अपराधी करार दिया गया। सीबीआई की लक्षित खुफिया कार्रवाई के बाद उसे 4 अगस्त को लुधियाना, पंजाब से पकड़ा गया। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

सीबीआई की प्रतिबद्धता

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी आर्थिक धोखाधड़ी के हर दोषी को कानून के कटघरे में लाने के अपने संकल्प पर अडिग है। यह ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में एनपीए और ऋण धोखाधड़ी के मामलों को लेकर नियामकीय दबाव बढ़ा हुआ है।

आगे क्या होगा

जितेंद्र कुमार को सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा जहाँ उस पर लंबित मुकदमे की कार्यवाही फिर शुरू होगी। पूजा पाहवा न्यायिक हिरासत में है और उसके मामले में आगे की सुनवाई अपेक्षित है। गौरतलब है कि ये दोनों गिरफ्तारियाँ सीबीआई के उस व्यापक अभियान का हिस्सा हैं जिसके तहत घोषित अपराधियों को देश के किसी भी कोने से पकड़ा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती यह है कि दोष-सिद्धि की दर और वसूली का प्रतिशत अभी भी बेहद कम है। बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तारी अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि शुरुआत है — बैंकों के नुकसान की वास्तविक भरपाई तभी होगी जब संपत्ति की कुर्की और वसूली की प्रक्रिया भी उतनी ही तेज हो।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने किन दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा को गिरफ्तार किया है। जितेंद्र कुमार को 25 अगस्त को नई दिल्ली के द्वारका मोड़ से और पूजा पाहवा को 4 अगस्त को लुधियाना, पंजाब से पकड़ा गया।
जितेंद्र कुमार पर क्या आरोप है और वह कितने समय से फरार था?
जितेंद्र कुमार पर 2002-03 में नकली सैलरी सर्टिफिकेट के आधार पर होम लोन लेकर जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को ₹65.90 लाख का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। वह जनवरी 2013 में घोषित अपराधी करार दिए जाने के बाद से लगभग 17 वर्षों तक फरार रहा।
पूजा पाहवा किस मामले में आरोपी है?
पूजा पाहवा पर जाली दस्तावेजों के आधार पर कैश क्रेडिट सुविधा प्राप्त कर उसका गबन करने का आरोप है, जिससे इंडियन ओवरसीज बैंक को ₹10.16 करोड़ का नुकसान हुआ। उसके खिलाफ 2017 में चार्जशीट दाखिल की गई थी और 2023 में उसे घोषित अपराधी करार दिया गया था।
इन मामलों में बैंकों को कुल कितना नुकसान हुआ?
दोनों मामलों में बैंकों को मिलाकर ₹10.81 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ — जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस को ₹65.90 लाख और इंडियन ओवरसीज बैंक को ₹10.16 करोड़।
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी?
जितेंद्र कुमार को सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा जहाँ लंबित मुकदमे की कार्यवाही फिर से शुरू होगी। पूजा पाहवा फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और उसके मामले में अदालती सुनवाई जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले