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तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर हमला: छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया तानाशाही, पटना में बड़ा प्रदर्शन

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तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर हमला: छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया तानाशाही, पटना में बड़ा प्रदर्शन

सारांश

पटना में छात्रों पर पुलिस की लाठियाँ और तेजस्वी यादव का एक्स पर तीखा पलटवार — बिहार में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता की माँग अब सड़क और सोशल मीडिया दोनों पर उबाल पर है। सरकार की चुप्पी और विपक्ष की आक्रामकता के बीच युवा आंदोलन नई करवट ले रहा है।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव ने 25 अगस्त को पटना में छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला।
छात्रों की प्रमुख माँगें: भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता , समय पर परीक्षाएं व परिणाम, और सरकारी नौकरी प्रक्रियाओं में तेजी।
पुलिस ने प्रदर्शन स्थलों पर बैरिकेडिंग , वाटर कैनन और हल्के बल प्रयोग का सहारा लिया।
तेजस्वी ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर 'तानाशाही रवैये' का आरोप लगाया और कहा — 'छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं।' सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार, 25 अगस्त को पटना में छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलनरत छात्रों से संवाद करने के बजाय उन पर लाठीचार्ज करा रही है — जो उनके अनुसार एक 'तानाशाही रवैया' है।

मुख्य घटनाक्रम

पटना में मंगलवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, समय पर परीक्षाएं एवं परिणाम जारी करने तथा सरकारी नौकरियों की प्रक्रियाओं में तेजी लाने की माँग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर छात्रों को आगे बढ़ने से रोका, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग किया।

तेजस्वी की प्रतिक्रिया

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि छात्रों पर एके-47 से गोली चलाने वाली निरंकुश एनडीए सरकार विपक्ष के दबाव में गोलीबारी तो छोड़ सकती है, लेकिन लाठीचार्ज नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'चोर चोरी से जाए, सीनाजोरी से न जाए।'

यादव ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और रोज़गार की माँग कर रहे छात्र-युवाओं से संवाद नहीं करना चाहती। उनके अनुसार, अधिकारियों के माध्यम से छात्रों का अपमान कराया जाता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया जाता है।

सरकार पर आरोप

तेजस्वी ने कहा कि 'मनी और मशीन' के लूट तंत्र से बनी सरकार से बिहार के युवा डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे लाठी चले या गोली, बिहार के छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

सियासी माहौल

छात्र आंदोलन को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों की माँगों को नज़रअंदाज़ करने और आंदोलन को दबाने का आरोप लगा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में युवा मतदाताओं की नाराज़गी एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।

आगे क्या

फिलहाल सरकार की ओर से छात्रों की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्ष के दबाव और छात्र संगठनों के बढ़ते आंदोलन को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल सरकार को कोस कर काम चला रहा है। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की समस्या बिहार में दशकों पुरानी है और हर सरकार के दौर में उठती रही है। असली जवाबदेही तब होगी जब विपक्ष और सत्ता दोनों यह बताएँ कि परीक्षा प्रणाली को वास्तव में कैसे सुधारा जाएगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में छात्र संगठनों ने 25 अगस्त को किस बात का विरोध किया?
छात्र संगठनों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, समय पर परीक्षाएं व परिणाम जारी करने और सरकारी नौकरी प्रक्रियाओं में तेजी लाने की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग, वाटर कैनन और हल्के बल प्रयोग से प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया।
तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार छात्रों से संवाद करने के बजाय उन पर लाठीचार्ज करा रही है और तानाशाही रवैया अपना रही है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार विपक्ष के दबाव में गोलीबारी छोड़ सकती है लेकिन लाठीचार्ज नहीं।
'चोर चोरी से जाए, सीनाजोरी से न जाए' — तेजस्वी ने यह किस संदर्भ में कहा?
यह टिप्पणी तेजस्वी यादव ने बिहार की एनडीए सरकार पर कटाक्ष करते हुए की, यह इशारा करते हुए कि सरकार जनदबाव में कुछ कदम पीछे हट सकती है लेकिन छात्रों के प्रति दमनकारी रवैया नहीं छोड़ती।
बिहार में छात्र आंदोलन का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
बिहार में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए यह आंदोलन राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ लामबंदी के अवसर के रूप में देख रहा है, जबकि सरकार की चुप्पी उसकी स्थिति को कमज़ोर कर सकती है।
सरकार ने छात्रों की माँगों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
रिपोर्टों के अनुसार, 25 अगस्त तक बिहार की एनडीए सरकार की ओर से छात्रों की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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