सुभद्रा योजना की 5वीं किस्त: ओडिशा उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने PM मोदी से मिलकर दी ₹5,160 करोड़ हस्तांतरण की जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक सुभद्रा योजना की पांचवीं किस्त जारी होने से ठीक पहले हुई, जिसके तहत 1 करोड़ 3 लाख से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में ₹5,160 करोड़ से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए भेजी जाएगी। यह किस्त 28 अगस्त को रक्षाबंधन (राखी पूर्णिमा) के अवसर पर नयागढ़, ओडिशा से जारी की जाएगी।
बैठक में क्या हुआ
उपमुख्यमंत्री परिदा ने प्रधानमंत्री को पांचवीं किस्त की तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पात्र महिला के खाते में ₹5,000 की राशि DBT के माध्यम से सीधे भेजी जाएगी। राज्य सरकार के अनुसार, इस चरण में कुल 1,03,26,162 महिलाएं लाभान्वित होंगी।
परिदा ने यह भी रेखांकित किया कि सुभद्रा योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन की दिशा में राज्य सरकार की प्रमुख पहल है, और पांचवीं किस्त इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
तकनीकी तैयारियाँ
राशि के निर्बाध हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार ने कई स्तरों पर तैयारी की है। इसमें लाभार्थी सत्यापन, ई-केवाईसी, आधार-लिंक्ड बैंक खाते, NPCI मैपिंग और अन्य बैंकिंग व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि समय पर और पारदर्शी तरीके से राशि पात्र महिलाओं तक पहुँचे।
सुभद्रा योजना की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2024 को भुवनेश्वर में इस योजना की शुरुआत की थी। ओडिशा सरकार की इस महिला-केंद्रित योजना के तहत पात्र महिलाओं को पाँच वर्षों में कुल ₹50,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि हर वर्ष ₹10,000 की दो समान किस्तों — यानी ₹5,000-₹5,000 — के रूप में DBT के ज़रिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होती है।
आम महिलाओं पर असर
यह योजना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ओडिशा में महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने की दिशा में सरकारी प्रयास तेज़ हुए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि पांचवीं किस्त योजना के क्रियान्वयन का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पात्र महिलाओं तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रक्षाबंधन के प्रतीकात्मक अवसर पर इस किस्त को जारी करना राज्य सरकार की ओर से एक सोची-समझी सामाजिक संदेश रणनीति भी मानी जा रही है।