जेपीएनआईसी निजीकरण पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला — 'भाजपा सरकार है या दुकानदार?'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 25 अगस्त 2026 को लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को निजी कंपनियों को 30 साल की लीज पर सौंपने के योगी सरकार के फैसले पर कड़ा प्रहार किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पास होते ही सियासी विवाद तेज हो गया।
कैबिनेट का फैसला: क्या हुआ
मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में गोमतीनगर स्थित जेपीएनआईसी को रॉकवुड होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्षों की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना में संग्रहालय, सभागार, खेल परिसर और बहुस्तरीय पार्किंग जैसी सुविधाएँ प्रस्तावित हैं।
गौरतलब है कि जेपीएनआईसी सपा शासनकाल में तैयार किया गया एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था, जो लंबे समय से अधूरा पड़ा था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसके निजी संचालन का रास्ता साफ हो गया है।
अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए योगी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब उप्र की भाजपा सरकार ने लखनऊ के जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'कमीशन' भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और 'निजीकरण' उसका जुगाड़।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और सपा व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राज्य की सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर वाकयुद्ध जारी है। अखिलेश इस फैसले को भाजपा की 'निजीकरण की राजनीति' के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि निजी भागीदारी से परियोजना को गति मिलेगी।
आगे क्या होगा
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब लीज समझौते की शर्तें तय की जाएँगी और निजी कंपनियाँ जेपीएनआईसी के संचालन एवं अधूरे निर्माण कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी संभालेंगी। विपक्षी दलों की ओर से इस फैसले के खिलाफ और विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।