25 अगस्त 2026
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जेपीएनआईसी निजीकरण पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला — 'भाजपा सरकार है या दुकानदार?'

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जेपीएनआईसी निजीकरण पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला — 'भाजपा सरकार है या दुकानदार?'

सारांश

अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट जेपीएनआईसी को योगी सरकार ने 30 साल की लीज पर दो निजी कंपनियों को सौंप दिया। अखिलेश ने एक्स पर पूछा — 'भाजपा सरकार है या दुकानदार?' यह विवाद 2027 के यूपी चुनावों से पहले निजीकरण को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।

मुख्य बातें

योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 25 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव पास हुआ।
रॉकवुड होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्षों की लीज दी जाएगी।
जेपीएनआईसी सपा शासनकाल में बना अखिलेश यादव का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसमें संग्रहालय, सभागार, खेल परिसर और पार्किंग शामिल हैं।
अखिलेश ने एक्स पर लिखा — 'भाजपा सरकार है या दुकानदार?' और इसे सरकार को ठेके पर देने की दिशा में बढ़ता कदम बताया।
यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले निजीकरण को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 25 अगस्त 2026 को लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को निजी कंपनियों को 30 साल की लीज पर सौंपने के योगी सरकार के फैसले पर कड़ा प्रहार किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पास होते ही सियासी विवाद तेज हो गया।

कैबिनेट का फैसला: क्या हुआ

मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में गोमतीनगर स्थित जेपीएनआईसी को रॉकवुड होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्षों की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना में संग्रहालय, सभागार, खेल परिसर और बहुस्तरीय पार्किंग जैसी सुविधाएँ प्रस्तावित हैं।

गौरतलब है कि जेपीएनआईसी सपा शासनकाल में तैयार किया गया एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था, जो लंबे समय से अधूरा पड़ा था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसके निजी संचालन का रास्ता साफ हो गया है।

अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए योगी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब उप्र की भाजपा सरकार ने लखनऊ के जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।'

उन्होंने आगे लिखा, 'कमीशन' भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और 'निजीकरण' उसका जुगाड़।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और सपा व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राज्य की सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर वाकयुद्ध जारी है। अखिलेश इस फैसले को भाजपा की 'निजीकरण की राजनीति' के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि निजी भागीदारी से परियोजना को गति मिलेगी।

आगे क्या होगा

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब लीज समझौते की शर्तें तय की जाएँगी और निजी कंपनियाँ जेपीएनआईसी के संचालन एवं अधूरे निर्माण कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी संभालेंगी। विपक्षी दलों की ओर से इस फैसले के खिलाफ और विरोध प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील संपत्ति को प्रतिद्वंद्वी दल की विरासत से मुक्त करने की कोशिश है। 2027 के चुनावों से पहले भाजपा और सपा दोनों के लिए यह मुद्दा प्रतीकात्मक रूप से अहम है — एक के लिए विकास का प्रमाण, दूसरे के लिए भ्रष्टाचार का आरोप। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नजरअंदाज कर रही है कि लीज की शर्तें और राजस्व-साझेदारी का ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ — जो जवाबदेही का सबसे बड़ा प्रश्न है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएनआईसी क्या है और इसे क्यों निजी हाथों में दिया जा रहा है?
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) लखनऊ के गोमतीनगर में स्थित एक बहुउद्देशीय परिसर है, जिसमें संग्रहालय, सभागार, खेल परिसर और पार्किंग की सुविधाएँ प्रस्तावित हैं। यह सपा शासनकाल में शुरू हुई परियोजना लंबे समय से अधूरी थी, इसलिए योगी सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसे पूरा करने का फैसला किया।
जेपीएनआईसी को किन कंपनियों को और कितने समय के लिए लीज दी गई है?
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने रॉकवुड होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्षों की लीज पर जेपीएनआईसी सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह फैसला 25 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
अखिलेश यादव ने इस फैसले पर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।' उन्होंने यह भी लिखा कि 'कमीशन' भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और 'निजीकरण' उसका जुगाड़।
क्या जेपीएनआईसी अखिलेश यादव का प्रोजेक्ट था?
हाँ, जेपीएनआईसी को सपा सरकार के कार्यकाल में अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था। यही कारण है कि इसे निजी हाथों में सौंपने का फैसला सपा के लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा सपा के लिए भाजपा के खिलाफ 'निजीकरण विरोधी' अभियान का आधार बन सकता है। अखिलेश यादव इसे सार्वजनिक संपत्तियों की 'बिक्री' के रूप में पेश कर रहे हैं, जो ग्रामीण और शहरी मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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