जेपीएनआईसी घोटाले पर राजभर का अखिलेश पर प्रहार: '₹200 करोड़ की इमारत ₹860 करोड़ में, यही श्राप है सत्ता से दूरी का'
सारांश
मुख्य बातें
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 8 जुलाई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) परियोजना को लेकर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि ₹200 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस इमारत का निर्माण सपा सरकार के कार्यकाल में ₹860 करोड़ में कराया गया और वह भी अधूरी रही। उन्होंने दावा किया कि यही भ्रष्टाचार समाजवादी पार्टी को नौ साल से सत्ता से दूर रखे हुए है।
एक्स पर राजभर का भावनात्मक प्रहार
मंत्री राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि सुबह घर से निकलते समय गोमती नदी के किनारे स्थित जेपीएनआईसी को देखकर उनके मन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण का चेहरा उभर आया। उन्होंने लिखा कि जयप्रकाश नारायण जी स्वर्ग में बैठकर सोच रहे होंगे कि उनके नाम पर राजनीति करने वालों ने उनके नाम पर इमारत बनाकर 'करोड़ों, बल्कि अरबों' डकार लिए।
₹860 करोड़ के आरोप का केंद्र
राजभर ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि ₹200 करोड़ की मूल लागत वाली जेपीएनआईसी इमारत का काम ₹860 करोड़ में कराया गया, जो कि चार गुना से अधिक है। उन्होंने कहा, 'कम से कम जयप्रकाश नारायण जी के नाम पर बन रही बिल्डिंग में तो घोटाला नहीं करना चाहिए था। एक बिल्डिंग उनके नाम पर बना रहे थे, कम से कम उसे तो बख्श देते।' यह आरोप सपा सरकार के कार्यकाल की परियोजनाओं पर भाजपा सहयोगियों द्वारा उठाए जाने वाले सवालों की श्रृंखला में नवीनतम है।
राजनीतिक संदर्भ और 'श्राप' का दावा
राजभर ने दावा किया कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 'पुण्यात्मा का श्राप' है कि समाजवादी पार्टी नौ साल से सत्ता से बाहर है और 'आगे भी दोबारा कभी सत्ता में नहीं आएगी।' गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और यह हमला उसी राजनीतिक तैयारी के बीच आया है। सुभासपा भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है।
राजभर की अपील और आगे का रुख
मंत्री राजभर ने अपनी पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव से कहा कि जब भी वे गोमती नदी के किनारे से गुज़रते हुए जेपीएनआईसी को देखें, तो उन्हें अपने 'पाप' का एहसास होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 'पूर्वजों का सम्मान कीजिए, उनके नाम पर भ्रष्टाचार अच्छी बात नहीं है।' समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।