आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे अखिलेश राज के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना: ओम प्रकाश राजभर का बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 27 जून 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में व्यापक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई अपनी पोस्ट में राजभर ने दावा किया कि यह एक्सप्रेसवे अखिलेश सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार का 'सबसे बड़ा नमूना' है।
मुख्य आरोप: रूट बदलकर हुई लूट
राजभर ने आरोप लगाया कि निजी आर्थिक लाभ के लिए एक्सप्रेसवे का मार्ग जानबूझकर मोड़ा गया, जिसके कारण इसकी लंबाई 270 किलोमीटर से बढ़कर 300 किलोमीटर से अधिक हो गई। उनका दावा है कि यह घुमावदार और ऊबड़-खाबड़ रूट इसी साजिश का नतीजा है। इस अतिरिक्त दूरी का खामियाजा आम यात्रियों को अधिक समय, ईंधन और थकान के रूप में आज भी भुगतना पड़ रहा है।
सैफई परिवार पर जमीन घोटाले का आरोप
यूपी के पंचायती राज मंत्री ने कथित तौर पर दावा किया कि फिरोजाबाद से इटावा तक के क्षेत्र में पहले औने-पौने दामों पर जमीनें खरीदी गईं, फिर एक्सप्रेसवे का रूट उन जमीनों की ओर मोड़ा गया। आरोपों के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर कृषि भूमि को आवासीय दिखाया गया और एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद भी रजिस्ट्रियाँ कराई जाती रहीं। राजभर का दावा है कि इसके बाद मुआवजे के नाम पर भारी अनियमितता की गई और एक्सप्रेसवे बनने के बाद 'सैफई परिवार' तथा उनके करीबियों की जमीनों की कीमतें कई गुना बढ़ गईं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और 'मौत का एक्सप्रेसवे'
राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे को जल्दबाजी में और मानकों की अनदेखी करके बनाया गया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि यह मार्ग दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात हो चुका है और लोग इसे 'मौत का एक्सप्रेसवे' तक कहते हैं। उनके अनुसार, इस लापरवाही की कीमत अनेक परिवारों को अपनों की जान गँवाकर चुकानी पड़ी है।
राजभर का दावा: 'डोजियर' तैयार, सज़ा तय
राजभर ने यह भी कहा कि उनके पास 'सैफई परिवार के पापों का डोजियर' मौजूद है और इस भ्रष्टाचार की परतें लगातार खुल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जवाबदेही तय होगी। गौरतलब है कि ये आरोप उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के उस व्यापक परिप्रेक्ष्य में आए हैं जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।