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ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर बड़ा आरोप: मध्य प्रदेश में जमीन निवेश और एक्सप्रेसवे रूट बदलने की साजिश

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ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर बड़ा आरोप: मध्य प्रदेश में जमीन निवेश और एक्सप्रेसवे रूट बदलने की साजिश

सारांश

ओपी राजभर ने एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर मध्य प्रदेश में जमीन निवेश और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का रूट सैफई की ओर मोड़ने का आरोप लगाया — जिससे दूरी करीब 30 किलोमीटर बढ़ी। SP ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 24 जून को एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर मध्य प्रदेश में कथित जमीन निवेश का आरोप लगाया।
राजभर का दावा है कि आईएएस अधिकारी भरत यादव , SP के पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के दामाद हैं और उन्हें एक्सप्रेसवे रूट की अग्रिम जानकारी रहती है।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का रूट कथित तौर पर सैफई की ओर मोड़ा गया, जिससे दूरी करीब 30 किलोमीटर बढ़ी और पहले खरीदी जमीनों पर भारी मुआवजा मिला।
राजभर ने गोमती रिवर फ्रंट जैसी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने की आशंका को अखिलेश की बेचैनी का कारण बताया।
समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने 24 जून को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव की बेचैनी के पीछे मध्य प्रदेश में किया गया कथित जमीन निवेश और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से जुड़े हित हैं।

आरोपों का केंद्र: भरत यादव और पारिवारिक संबंध

ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी भरत यादव, जो राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। राजभर का दावा है कि अखिलेश यादव इस पारिवारिक रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

राजभर के अनुसार, भरत यादव को मध्य प्रदेश में हाईवे और सड़क परियोजनाओं के रूट की अग्रिम जानकारी रहती है, और इसी सूचना का कथित तौर पर उपयोग करके वहाँ जमीनों में निवेश कराया गया।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर पुराने आरोप

राजभर ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान फिरोजाबाद से इटावा तक बड़े पैमाने पर जमीनें कम कीमत पर खरीदी गई थीं। इसके बाद, कथित तौर पर एक्सप्रेसवे का रूट मनमाने तरीके से सैफई की ओर मोड़ा गया, जिससे मार्ग की दूरी करीब 30 किलोमीटर बढ़ गई। राजभर का आरोप है कि इस बदलाव से पहले खरीदी गई जमीनों के बदले बाद में भारी मुआवजा प्राप्त किया गया।

गौरतलब है कि सैफई, इटावा जिले में स्थित है और समाजवादी पार्टी के संस्थापक परिवार का गृहनगर माना जाता है। ये आरोप नए नहीं हैं — लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रूट परिवर्तन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।

गोमती रिवर फ्रंट और जाँच की माँग

राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की रिपोर्ट सामने आने के बाद अखिलेश यादव को आशंका है कि मध्य प्रदेश से जुड़ी किसी एक्सप्रेसवे परियोजना की रिपोर्ट भी सार्वजनिक हो सकती है, जिससे कथित निवेश प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने जाँच एजेंसियों से माँग की कि वे यह पता लगाएँ कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के किन-किन प्रभावशाली और सफेदपोश लोगों का निवेश शामिल है।

समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह उल्लेखनीय है कि राजभर ने ये आरोप ऐसे समय में लगाए हैं जब अखिलेश यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े एक मामले पर सरकार को घेर रहे थे।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समाजवादी पार्टी इन आरोपों का जवाब देती है या नहीं, और क्या कोई जाँच एजेंसी इस मामले में संज्ञान लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ आरोपों की गंभीरता से अधिक उनका समय मायने रखता है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रूट परिवर्तन के आरोप पुराने हैं और उन पर स्वतंत्र जाँच की माँग पहले भी उठती रही है — लेकिन आज तक कोई ठोस जाँच परिणाम सार्वजनिक नहीं हुआ। जब तक जाँच एजेंसियाँ संज्ञान नहीं लेतीं और समाजवादी पार्टी अपना पक्ष नहीं रखती, ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी की सीमा से बाहर नहीं निकल सकते।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए हैं?
ओपी राजभर ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव का मध्य प्रदेश में कथित जमीन निवेश है और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का रूट निजी लाभ के लिए सैफई की ओर मोड़ा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि SP के पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के दामाद भरत यादव, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं और उन्हें रूट की अग्रिम जानकारी रहती है।
भरत यादव कौन हैं और उनका मामले से क्या संबंध है?
भरत यादव मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं। राजभर के अनुसार, वे SP के पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के दामाद हैं — यह रिश्ता अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे रूट विवाद क्या है?
राजभर का आरोप है कि एक्सप्रेसवे निर्माण से पहले फिरोजाबाद से इटावा तक जमीनें कम कीमत पर खरीदी गईं और फिर रूट को सैफई की ओर मोड़ा गया, जिससे दूरी करीब 30 किलोमीटर बढ़ गई। इससे उन जमीनों पर भारी सरकारी मुआवजा मिला।
समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों पर क्या कहा?
24 जून तक अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजभर ने जाँच की माँग किससे की है?
ओपी राजभर ने जाँच एजेंसियों से माँग की है कि वे यह पता लगाएँ कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के किन प्रभावशाली और सफेदपोश लोगों का निवेश शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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