10 जुलाई 2026
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राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'फोटो के ₹5,000, हाथ मिलाने के ₹10,000 — गेट पर रेट का काउंटर बंद करो'

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राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'फोटो के ₹5,000, हाथ मिलाने के ₹10,000 — गेट पर रेट का काउंटर बंद करो'

सारांश

योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक्स पर अखिलेश यादव को 'मित्र' कहते हुए तीखा वार किया — आरोप है कि सपा प्रमुख के 'घेरे के लोग' फोटो के ₹5,000 और हाथ मिलाने के ₹10,000 वसूलते हैं। राजभर की चेतावनी: यह 'काउंटर' बंद नहीं हुआ तो अगले चुनाव में सपा को नेता प्रतिपक्ष की सीटें भी नहीं मिलेंगी।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 10 जुलाई 2026 को एक्स पर अखिलेश यादव पर वसूली के आरोप लगाए।
कथित 'रेट कार्ड': अखिलेश यादव से फोटो के ₹5,000 , हाथ मिलाने के ₹8,000-₹10,000 ।
राजभर ने दावा किया कि यह शिकायत सपा के यादव समुदाय के कार्यकर्ताओं ने खुद उनसे की।
राजभर ने अखिलेश की संपत्ति में कथित 900 गुना बढ़ोतरी का हवाला देते हुए 'एक्स्ट्रा इनकम' पर सवाल उठाए।
चेतावनी दी कि यह सिस्टम जारी रहा तो अगले चुनाव में सपा को नेता प्रतिपक्ष बनाने भर की सीटें भी न मिलें।
समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 10 जुलाई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यादव के 'घेरे के लोग' उनसे मिलने और फोटो खिंचवाने के नाम पर पार्टी कार्यकर्ताओं से मोटी रकम वसूल रहे हैं। राजभर ने यह आरोप सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए लगाए, जिसमें उन्होंने कथित 'रेट कार्ड' का भी उल्लेख किया। यह बयान लखनऊ की सियासी फिज़ा में नई तल्खी घोल गया है।

क्या है कथित वसूली का मामला

राजभर ने अपनी एक्स पोस्ट में दावा किया कि सपा के यादव समुदाय के कार्यकर्ता खुद उनके पास शिकायत लेकर आए। उनके अनुसार, कार्यकर्ताओं ने बताया कि अखिलेश यादव से फोटो खिंचवाने के लिए ₹5,000, हाथ मिलाने के लिए ₹8,000 से ₹10,000 तक की वसूली की जाती है, जबकि सीधी मुलाकात का 'हिसाब-किताब ही नहीं है।' राजभर ने लिखा कि ये कार्यकर्ता अखिलेश यादव से खुद शिकायत करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए उन्होंने यह बात उन तक पहुँचाने का जिम्मा लिया।

राजभर ने पोस्ट में लिखा, 'आपके यादव कार्यकर्ता मुझसे कहने लगे कि भैया (अखिलेश यादव) से मिलने जाने पर उनके घेरे के लोग हमसे वसूली करते हैं। कहते हैं कि भैया से फोटो खिंचवाने का ₹5,000, हाथ मिलवाने का ₹8,000-10,000 रुपए तक और मिलवाने का तो हिसाब किताब ही नहीं है।'

राजभर की अखिलेश को सीधी चेतावनी

राजभर ने कहा कि यदि यह 'सिस्टम' बंद नहीं हुआ तो सपा को भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने अखिलेश को 'मित्र' संबोधित करते हुए लिखा, 'अपनी मीटिंग का सौदा बंद करवाइए मित्र, वरना बहुत महंगा पड़ सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'गेट पर रेट का काउंटर बंद कीजिए' और '20 रुपए चंदा मांग कर कार्यकर्ता को मूर्ख मत बनाइए।'

गौरतलब है कि राजभर ने यह भी कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अगले विधानसभा चुनाव में सपा को नेता प्रतिपक्ष बनाने भर की सीटें भी न मिलें — और यह काम जनता नहीं, बल्कि सपा के अपने प्रताड़ित कार्यकर्ता ही करेंगे।

संपत्ति वृद्धि पर भी उठाए सवाल

राजभर ने अपने एक्स पोस्ट में अखिलेश यादव की कथित संपत्ति वृद्धि का भी हवाला दिया। उन्होंने लिखा, 'सुना है कि आपकी संपत्ति में 900 गुना बढ़ोतरी हुई। फिर ये एक्स्ट्रा इनकम का जुगाड़ क्यों? आप कार्यकर्ताओं के खून-पसीने की कमाई को क्यों चूस रहे हैं?' यह आरोप उन्होंने 'कथित तौर पर' सामने आई जानकारी के आधार पर लगाया — इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

राजनीतिक संदर्भ और असर

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ परोक्ष रूप से शुरू हो चुकी हैं और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी राजभर का सपा पर इस तरह का सीधा प्रहार सियासी माहौल को गर्म करता है। राजभर ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अखिलेश को दुश्मन नहीं, मित्र मानते हैं — और इसीलिए यह बात सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान विपक्ष की आंतरिक कमज़ोरियों को उजागर करने की रणनीतिक कोशिश भी हो सकते हैं।

समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में सपा का जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक संदेश बिल्कुल स्पष्ट है — BJP के सहयोगी दल का सपा के आंतरिक संगठनात्मक ढाँचे पर निशाना साधना, वह भी चुनाव-पूर्व माहौल में। ध्यान देने वाली बात यह है कि राजभर ने यह आरोप किसी पत्रकार से नहीं, बल्कि सीधे एक्स पर सार्वजनिक रूप से लगाए — जो इसे महज़ 'दोस्ताना सलाह' से ऊपर उठाता है। सपा की चुप्पी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है — अगर ये आरोप निराधार होते, तो खंडन तत्काल आना चाहिए था। यूपी की राजनीति में इस तरह के 'इनसाइडर' आरोप — चाहे सच हों या न हों — जनमानस में विपक्ष की विश्वसनीयता को कमज़ोर करने में असरदार साबित होते हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए हैं?
राजभर ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव के करीबी लोग सपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात और फोटो के नाम पर पैसे वसूलते हैं — फोटो के लिए कथित तौर पर ₹5,000 और हाथ मिलाने के लिए ₹8,000 से ₹10,000 तक। यह दावा उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए किया।
राजभर ने यह बात सार्वजनिक रूप से क्यों कही?
राजभर के अनुसार, सपा के यादव कार्यकर्ता यह शिकायत अखिलेश यादव से सीधे नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने राजभर से गुज़ारिश की कि वे यह बात अखिलेश तक पहुँचाएँ। राजभर ने खुद को 'मित्र' की भूमिका में पेश करते हुए यह पोस्ट की।
क्या समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों का जवाब दिया है?
10 जुलाई 2026 तक समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सपा का जवाब इस विवाद की आगे की दिशा तय करेगा।
राजभर की अखिलेश यादव को क्या चेतावनी है?
राजभर ने चेतावनी दी है कि अगर यह 'वसूली का सिस्टम' बंद नहीं हुआ तो अगले विधानसभा चुनाव में सपा को नेता प्रतिपक्ष बनाने भर की सीटें भी नहीं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि प्रताड़ित कार्यकर्ता ही पार्टी को हरा देंगे।
ओम प्रकाश राजभर कौन हैं और उनका सपा से क्या संबंध है?
ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वे BJP के सहयोगी हैं और समाजवादी पार्टी के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में से एक।
राष्ट्र प्रेस
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