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शिव कुमार बेरिया का ओम प्रकाश राजभर पर हमला: ‘टिकट लेकर 30-35 लाख में बेच देते हैं’

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शिव कुमार बेरिया का ओम प्रकाश राजभर पर हमला: ‘टिकट लेकर 30-35 लाख में बेच देते हैं’

सारांश

पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया ने कानपुर देहात में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर पर सीधा हमला बोला — आरोप लगाया कि उन्होंने अखिलेश यादव से टिकट लेकर 30 से 35 लाख रुपए में बेचे। बेरिया ने राजभर को ‘हल्के कद का नेता’ और ‘हर चुनाव से पहले दल बदलने वाला’ बताया, और दावा किया कि सपा नेतृत्व ने यह गलती बैठक में मानी थी।

मुख्य बातें

पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया ने 3 जून को कानपुर देहात में ओम प्रकाश राजभर पर ‘टिकट बेचने’ का आरोप लगाया।
बेरिया का दावा — राजभर ने अखिलेश यादव से लिए टिकट 30-35 लाख रुपए में बेचे।
आरोप के अनुसार अखिलेश यादव ने पार्टी बैठक में राजभर को टिकट देना ‘गलती’ बताया था।
बेरिया ने राजभर पर बार-बार दल बदलने का आरोप भी लगाया।
ओम प्रकाश राजभर या SBSP की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं।

समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया ने 3 जून को कानपुर देहात में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर पर कथित तौर पर ‘टिकट बेचने’ का गंभीर आरोप लगाया। बेरिया ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से टिकट लेकर उन्हें 30 लाख से 35 लाख रुपए तक में बेचा था।

मुख्य आरोप

बेरिया ने कहा, ‘ये वही ओम प्रकाश राजभर हैं, जो पहले कभी हमारे नेता अखिलेश यादव के पास आए थे और उनके हाथ-पैर जोड़ने लगे। इसके बाद उनसे टिकट लिए और उस टिकट को लाखों रुपए में बेच दिया।’ पूर्व मंत्री के अनुसार यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा और कुछ लोगों से 30 लाख, तो कुछ से 35 लाख रुपए तक लिए गए।

अखिलेश यादव की कथित स्वीकारोक्ति

बेरिया ने यह भी दावा किया कि अखिलेश यादव ने पार्टी की एक आंतरिक बैठक में स्वयं स्वीकार किया था कि ओम प्रकाश राजभर को टिकट देना ‘गलती’ थी। उन्होंने जोड़ा कि उस बैठक में वे लोग भी मौजूद थे, जिन्होंने कथित तौर पर राजभर से टिकट खरीदा था।

‘दल बदलने का इतिहास’

पूर्व मंत्री ने राजभर को ‘हल्के कद का नेता’ बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आने से पहले दल बदलना उनकी पुरानी आदत रही है। बेरिया के शब्दों में, ‘मूल रूप से इन लोगों का काम ही दल बदल करके टिकट प्राप्त करना और इसके बाद उन टिकटों को बेच देना है।’ गौरतलब है कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख राजभर 2017 में भाजपा के साथ थे, 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के साथ गठबंधन किया और बाद में फिर एनडीए में लौटकर योगी मंत्रिमंडल में शामिल हुए।

राजनीतिक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और पूर्वांचल की राजभर-बहुल सीटों पर सपा व एनडीए के बीच दावेदारी की रस्साकशी जारी है। राजभर की ओर से अब तक इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आरोप तब तक अधूरे हैं जब तक आरोप लगाने वाला पक्ष ठोस दस्तावेज़ी सबूत सार्वजनिक न करे।

आगे क्या

राजनीतिक हलकों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा नेतृत्व बेरिया के इन दावों पर आधिकारिक रुख अपनाता है या नहीं, और क्या SBSP की ओर से कानूनी या राजनीतिक जवाबी कार्रवाई आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हीं के साथ सपा ने 2022 में गठबंधन किया और सीटें बाँटीं। बिना दस्तावेज़ी सबूत के 30-35 लाख रुपए जैसे विशिष्ट आँकड़े आरोप को सनसनीखेज ज़रूर बनाते हैं, पर कानूनी रूप से कमज़ोर भी रखते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सपा नेतृत्व इन दावों को आधिकारिक रूप से अपनाता है, या इन्हें एक स्थानीय नेता का व्यक्तिगत बयान बताकर दूरी बना लेता है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिव कुमार बेरिया ने ओम प्रकाश राजभर पर क्या आरोप लगाया है?
पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया ने आरोप लगाया कि ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से टिकट लेकर उन्हें 30 से 35 लाख रुपए में बेच दिया। उन्होंने यह दावा 3 जून को कानपुर देहात में पत्रकारों से बातचीत में किया।
बेरिया के अनुसार अखिलेश यादव ने इस पर क्या कहा था?
बेरिया का दावा है कि अखिलेश यादव ने पार्टी की एक आंतरिक बैठक में स्वयं स्वीकार किया था कि ओम प्रकाश राजभर को टिकट देना गलती थी। उनके अनुसार उस बैठक में वे लोग भी मौजूद थे जिन्होंने कथित तौर पर राजभर से टिकट खरीदा था।
ओम प्रकाश राजभर की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वे 2017 में भाजपा, 2022 चुनाव से पहले सपा और बाद में फिर एनडीए के साथ गठबंधन कर चुके हैं।
क्या ओम प्रकाश राजभर ने इन आरोपों पर जवाब दिया है?
ओम प्रकाश राजभर या उनकी पार्टी SBSP की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस दस्तावेज़ी सबूत के ऐसे आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रह जाते हैं।
यह विवाद राजनीतिक रूप से क्यों मायने रखता है?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच पूर्वांचल की राजभर-बहुल सीटों पर सपा और एनडीए के बीच दावेदारी तेज़ है। बेरिया का बयान सपा की रणनीति को राजभर-विरोधी रुख देने का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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