मध्यपूर्व संघर्ष के बीच सोना ₹1,44,603 और चांदी ₹2,26,133 पर फिसली, MCX पर आधा फीसदी की गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 10 जुलाई 2026 को शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में करीब आधा प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व में तेज़ होता सैन्य तनाव बताया जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना सुबह 10 बजे तक ₹1,44,603 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी ₹2,26,133 प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी।
MCX पर सोने-चांदी का हाल
सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग ₹1,45,300 प्रति 10 ग्राम के मुकाबले ₹410 यानी 0.28 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,44,890 प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में गिरावट और बढ़ी और सुबह 10 बजे तक यह ₹696 प्रति 10 ग्राम यानी 0.48 प्रतिशत टूटकर ₹1,44,603 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया।
चांदी का 4 सितंबर 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग ₹2,26,377 प्रति किलो के मुकाबले करीब सपाट ₹2,26,368 प्रति किलो पर खुला। खबर लिखे जाने तक यह ₹244 प्रति किलो यानी 0.11 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹2,26,133 प्रति किलो पर था। सोने की तुलना में चांदी की गिरावट काफी सीमित रही।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मिला-जुला रुख
वैश्विक बाज़ारों में दोनों धातुओं का रुख मिला-जुला रहा। कॉमेक्स (COMEX) पर सोना 0.30 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 4,128 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60.86 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह विचलन बताता है कि बाज़ार में अनिश्चितता के बावजूद चांदी की औद्योगिक माँग कुछ हद तक कीमत को थाम रही है।
मध्य पूर्व में क्या हो रहा है
विदेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। रिपोर्टों में बताया गया कि गुरुवार को ईरान के दक्षिणी तटीय और पूर्वी प्रांतों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना ने यह कार्रवाई की। इसके बाद ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान के कई शहरों — बुशहर (जहाँ देश का एक परमाणु संयंत्र स्थित है), कोनारक, चोघादक और बंदर अब्बास — में धमाकों की खबर दी।
कमोडिटी बाज़ार पर असर और आगे की दिशा
गौरतलब है कि भू-राजनीतिक संकट के दौरान सोना आमतौर पर 'सुरक्षित निवेश' के रूप में मज़बूत होता है, लेकिन इस बार शुरुआती दबाव देखा गया। विश्लेषकों के अनुसार, यह अल्पकालिक मुनाफावसूली और डॉलर की मज़बूती का संकेत हो सकता है। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो सोने में फिर से तेज़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों की नज़र अब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के अगले संकेतों और क्षेत्र में युद्धविराम की किसी भी संभावना पर टिकी है।