10 जुलाई 2026
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गर्भावस्था के आधार पर TCS की पूर्व कर्मचारी निदा खान को नासिक कोर्ट ने दी जमानत, भगवान कृष्ण के जन्म का दिया हवाला

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गर्भावस्था के आधार पर TCS की पूर्व कर्मचारी निदा खान को नासिक कोर्ट ने दी जमानत, भगवान कृष्ण के जन्म का दिया हवाला

सारांश

नासिक की विशेष अदालत ने TCS की पूर्व कर्मचारी निदा खान को पाँच महीने की गर्भावस्था के आधार पर जमानत दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने भगवान कृष्ण के कारागार में जन्म का हवाला देते हुए कहा कि जेल में प्रसव असहनीय कलंक है। मामले में यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण के नौ मुकदमे दर्ज हैं।

मुख्य बातें

नासिक की विशेष अदालत ने 10 जुलाई 2026 को TCS की पूर्व कर्मचारी निदा खान को गर्भावस्था के आधार पर जमानत दी।
जमानत की शर्त: ₹75,000 का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का एक सक्षम जमानतदार।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने भगवान कृष्ण के कारागार में जन्म का संदर्भ देते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग उचित बताया।
निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया था; वह लगभग 25 दिन फरार रही थीं।
पुलिस TCS की नासिक इकाई में यौन उत्पीड़न, कथित जबरन धर्मांतरण और मानसिक उत्पीड़न के कुल नौ मामलों की जाँच कर रही है।
शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से होने के कारण SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लागू की गई हैं।

नासिक की एक विशेष अदालत ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की पूर्व कर्मचारी निदा खान को 10 जुलाई 2026 को गर्भावस्था के आधार पर जमानत प्रदान की। यौन उत्पीड़न, कथित धार्मिक दबाव और धर्मांतरण से जुड़े मामलों में आरोपी निदा खान को अदालत ने ₹75,000 के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया।

न्यायिक टिप्पणी और भगवान कृष्ण का संदर्भ

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी महिला के लिए जेल में बच्चे को जन्म देने का दर्द और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक असहनीय होता है। न्यायाधीश ने भगवान कृष्ण के कारागार में जन्म लेने की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति से बचाने और नवजात शिशु के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग करना उचित होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चूँकि मामले की जाँच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए निदा खान को आगे न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।

गिरफ्तारी और मामले की पृष्ठभूमि

पाँच महीने की गर्भवती निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर के एक किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले वह कथित तौर पर लगभग 25 दिनों तक फरार रही थी। उनकी ओर से दायर जमानत याचिका में गर्भावस्था को प्रमुख आधार बनाया गया था। बचाव पक्ष के वकील राहुल कसलीवाल ने अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल निर्दोष है, उसे झूठा फंसाया गया है, और वह अप्रैल में बर्खास्त किए जाने से पहले TCS में एसोसिएट के पद पर कार्यरत थी।

सरकारी पक्ष की आपत्ति

सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि जाँच के दौरान यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं। यह मामला देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, इसलिए आरोपियों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएँ भी लगाई गई हैं।

आरोपों का विवरण

जाँच एजेंसियों के अनुसार, निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को बुर्का और धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराया, मोबाइल फोन में इस्लाम से संबंधित एप्लिकेशन इंस्टॉल किए, घर जाकर नमाज़ पढ़ने का तरीका बताया तथा हिजाब पहनने के लिए प्रेरित किया। पुलिस TCS की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाएँ आहत करने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ मामलों की जाँच कर रही है। हालाँकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

आगे क्या होगा

जमानत मिलने के बाद अब मामले की सुनवाई अदालत में जारी रहेगी। यह मामला कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न और SC/ST एक्ट के अंतर्गत न्याय की माँग जैसे संवेदनशील मुद्दों को एक साथ उठाता है, जिससे इसकी न्यायिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से निगरानी होती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह न्यायाधीश की उस चिंता को रेखांकित करता है जो विधिशास्त्र में भी मान्य है — कि जेल में प्रसव एक अनावश्यक और अनुपातहीन दंड है। हालाँकि, नौ मामलों की जाँच और SC/ST एक्ट की धाराओं के साथ यह मामला जटिल है; जमानत का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है, और मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस अंतर को धुँधला कर देती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निदा खान को जमानत क्यों मिली?
नासिक की विशेष अदालत ने निदा खान को पाँच महीने की गर्भावस्था के आधार पर जमानत दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने कहा कि जेल में प्रसव से जुड़ा दर्द और सामाजिक कलंक असहनीय होता है, और नवजात शिशु के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग उचित है।
निदा खान पर क्या आरोप हैं?
निदा खान पर यौन उत्पीड़न, कथित धार्मिक दबाव और जबरन धर्मांतरण के प्रयास से जुड़े आरोप हैं। जाँच एजेंसियों के अनुसार उन पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को बुर्का, धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराया और मोबाइल में इस्लाम से संबंधित ऐप इंस्टॉल किए। कुल नौ मामले दर्ज हैं।
अदालत ने भगवान कृष्ण का संदर्भ क्यों दिया?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने भगवान कृष्ण के कारागार में जन्म लेने की पौराणिक कथा का उल्लेख यह समझाने के लिए किया कि जेल में बच्चे का जन्म एक महिला के लिए असहनीय स्थिति होती है। इस संदर्भ के माध्यम से उन्होंने नवजात शिशु के हितों और माँ की मानवीय गरिमा को जमानत का आधार बनाया।
निदा खान को कब और कहाँ गिरफ्तार किया गया था?
निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर के एक किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले वह लगभग 25 दिनों तक फरार रही थीं।
इस मामले में SC/ST अधिनियम क्यों लागू किया गया है?
चूँकि इस मामले की शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, इसलिए आरोपियों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएँ भी लगाई गई हैं। मामला देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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