कासना जेल में नाबालिग को वयस्क कैदी की तरह रखा गया, NHRC ने UP के DGP-जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गौतमबुद्धनगर की कासना जेल में एक नाबालिग बालक को वयस्क कैदियों के बीच दो महीने से अधिक समय तक अवैध रूप से रखे जाने की रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस एवं जेल अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इसे बच्चों के मौलिक अधिकारों और किशोर न्याय कानूनों के संभावित गंभीर उल्लंघन का मामला करार दिया है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित नाबालिग को ग्रेटर नोएडा में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उसकी नाबालिग उम्र की अनदेखी करते हुए उसे कासना जेल में वयस्क कैदियों के साथ रखा गया।
करीब दो महीने से अधिक समय बाद उसे किशोर न्याय प्रणाली के तहत एक बाल सुधार गृह (जुवेनाइल होम) में स्थानांतरित किया गया। गौरतलब है कि अदालत द्वारा जमानत मंजूर किए जाने के बावजूद बालक अभी भी बाल गृह में ही है, क्योंकि उसका परिवार जमानत की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में आर्थिक रूप से असमर्थ है।
NHRC की कार्रवाई और निर्देश
आयोग ने उत्तर प्रदेश के जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के महानिदेशक तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही NHRC के महानिदेशक (जांच) को निर्देश दिया गया है कि वे अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर घटनास्थल का निरीक्षण करें और एक सप्ताह के भीतर स्वतंत्र जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपें।
कानूनी और मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि मीडिया रिपोर्टों में वर्णित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मामला किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन के साथ-साथ संबंधित बालक के मौलिक एवं मानवाधिकारों के गंभीर हनन का उदाहरण होगा। यह ऐसे समय में आया है जब बाल अधिकार संरक्षण को लेकर देश में व्यापक बहस जारी है।
आर्थिक विवशता और जमानत का संकट
इस मामले की एक और परत यह है कि न्यायालय द्वारा जमानत मंजूर होने के बाद भी बालक रिहा नहीं हो सका है। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण जमानती और संबंधित कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाई हैं। आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति न्याय प्रणाली में आर्थिक असमानता की गहरी खाई को उजागर करती है।
आगे क्या होगा
NHRC की जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के जवाब के बाद आयोग अगली कार्रवाई तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित बालक को कानूनी सहायता सुनिश्चित करना दोनों ज़रूरी हैं।