10 अगस्त 2026
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कासना जेल में नाबालिग को वयस्क कैदी की तरह रखा गया, NHRC ने UP के DGP-जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया

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कासना जेल में नाबालिग को वयस्क कैदी की तरह रखा गया, NHRC ने UP के DGP-जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया

सारांश

गौतमबुद्धनगर की कासना जेल में एक नाबालिग को दो महीने से अधिक वयस्क कैदियों के बीच रखे जाने का मामला सामने आया है। NHRC ने स्वतः संज्ञान लेकर UP के DGP और जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। अदालत से जमानत मिलने के बाद भी बालक आर्थिक तंगी के कारण रिहा नहीं हो सका।

मुख्य बातें

NHRC ने कासना जेल में नाबालिग को वयस्क कैदी की तरह रखने पर स्वतः संज्ञान लिया।
नाबालिग को दो महीने से अधिक समय तक वयस्क कैदियों के बीच अवैध रूप से रखा गया।
UP के DGP और जेल प्रशासन महानिदेशक को दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश।
NHRC महानिदेशक (जांच) को एक सप्ताह में स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
अदालत से जमानत मिलने के बाद भी बालक परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण रिहा नहीं हो सका।
आयोग ने इसे किशोर न्याय कानूनों और मौलिक मानवाधिकारों के संभावित गंभीर उल्लंघन का मामला बताया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गौतमबुद्धनगर की कासना जेल में एक नाबालिग बालक को वयस्क कैदियों के बीच दो महीने से अधिक समय तक अवैध रूप से रखे जाने की रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस एवं जेल अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इसे बच्चों के मौलिक अधिकारों और किशोर न्याय कानूनों के संभावित गंभीर उल्लंघन का मामला करार दिया है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित नाबालिग को ग्रेटर नोएडा में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उसकी नाबालिग उम्र की अनदेखी करते हुए उसे कासना जेल में वयस्क कैदियों के साथ रखा गया।

करीब दो महीने से अधिक समय बाद उसे किशोर न्याय प्रणाली के तहत एक बाल सुधार गृह (जुवेनाइल होम) में स्थानांतरित किया गया। गौरतलब है कि अदालत द्वारा जमानत मंजूर किए जाने के बावजूद बालक अभी भी बाल गृह में ही है, क्योंकि उसका परिवार जमानत की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में आर्थिक रूप से असमर्थ है।

NHRC की कार्रवाई और निर्देश

आयोग ने उत्तर प्रदेश के जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के महानिदेशक तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही NHRC के महानिदेशक (जांच) को निर्देश दिया गया है कि वे अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर घटनास्थल का निरीक्षण करें और एक सप्ताह के भीतर स्वतंत्र जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपें।

कानूनी और मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य

आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि मीडिया रिपोर्टों में वर्णित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मामला किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन के साथ-साथ संबंधित बालक के मौलिक एवं मानवाधिकारों के गंभीर हनन का उदाहरण होगा। यह ऐसे समय में आया है जब बाल अधिकार संरक्षण को लेकर देश में व्यापक बहस जारी है।

आर्थिक विवशता और जमानत का संकट

इस मामले की एक और परत यह है कि न्यायालय द्वारा जमानत मंजूर होने के बाद भी बालक रिहा नहीं हो सका है। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण जमानती और संबंधित कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाई हैं। आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति न्याय प्रणाली में आर्थिक असमानता की गहरी खाई को उजागर करती है।

आगे क्या होगा

NHRC की जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के जवाब के बाद आयोग अगली कार्रवाई तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित बालक को कानूनी सहायता सुनिश्चित करना दोनों ज़रूरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस प्रणालीगत विफलता का प्रतीक है जिसमें गिरफ्तारी के समय उम्र सत्यापन की प्रक्रिया ही नदारद रही। सवाल यह है कि दो महीने से अधिक समय तक किसी नाबालिग की उपस्थिति जेल प्रशासन, न्यायालय और किशोर न्याय बोर्ड — किसी की नज़र में क्यों नहीं आई। NHRC का स्वतः संज्ञान स्वागतयोग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और बालक को तत्काल कानूनी सहायता मिले — केवल रिपोर्ट मांगने से न्याय नहीं होता। आर्थिक तंगी के कारण जमानत न मिल पाना इस त्रासदी की दूसरी परत है, जो न्याय तक पहुंच की असमानता को रेखांकित करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कासना जेल में नाबालिग के साथ क्या हुआ?
ग्रेटर नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार एक नाबालिग बालक को नाबालिग होने के बावजूद कासना जेल में वयस्क कैदियों के बीच दो महीने से अधिक समय तक रखा गया। बाद में उसे बाल सुधार गृह में स्थानांतरित किया गया, लेकिन जमानत मिलने के बावजूद वह परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण अभी भी रिहा नहीं हो सका है।
NHRC ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है, और NHRC के महानिदेशक (जांच) को एक सप्ताह में स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
किशोर न्याय कानून के तहत नाबालिग को जेल में रखना क्यों गैरकानूनी है?
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी नाबालिग को वयस्क कैदियों के साथ जेल में नहीं रखा जा सकता। ऐसे मामलों में बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सुधार गृह में रखना अनिवार्य है। इस नियम का उल्लंघन बच्चे के मौलिक अधिकारों का हनन माना जाता है।
जमानत मिलने के बाद भी बालक रिहा क्यों नहीं हो सका?
अदालत ने बालक को जमानत दे दी है, लेकिन उसका परिवार जमानती और संबंधित कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में आर्थिक रूप से असमर्थ है। इस कारण वह अभी भी बाल सुधार गृह में रह रहा है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
NHRC अधिकारियों की जांच रिपोर्ट और UP सरकार के जवाब के आधार पर अगली कार्रवाई तय करेगा। यदि तथ्य सही पाए गए तो यह किशोर न्याय कानूनों के उल्लंघन का गंभीर मामला बनेगा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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