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नाडियाड जेल में जन्मे शिशु को लेकर गुजरात पुलिस ने प्रवासी महिला को मध्य प्रदेश पहुँचाया

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नाडियाड जेल में जन्मे शिशु को लेकर गुजरात पुलिस ने प्रवासी महिला को मध्य प्रदेश पहुँचाया

सारांश

जमानत मिलने के बाद भी कोई लेने न आया — तब गुजरात पुलिस ने खुद परिवार की भूमिका निभाई। नवजात और दो साल के बच्चे के साथ अकेली पड़ी प्रवासी महिला को नाडियाड जेल से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर तक सुरक्षित पहुँचाना, वर्दी के भीतर छिपी करुणा की एक असाधारण मिसाल बन गया।

मुख्य बातें

नाडियाड जिला जेल में बंद एक प्रवासी महिला ने 21 मई को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में बेटे को जन्म दिया।
महिला आनंद जिले के खंभात में दर्ज POCSO मामले में सह-आरोपी थी; पति और देवर अभी भी हिरासत में हैं।
जमानत के बाद कोई परिजन न आने पर DLSA, आनंद ने कानूनी सहायता दी और जेल अधिकारियों से समन्वय किया।
गुजरात पुलिस महानिदेशक डॉ.
राव के मार्गदर्शन में विशेष वाहन और दो कांस्टेबल की व्यवस्था की गई।
महिला अपने दो वर्षीय और नवजात शिशु के साथ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में अपने परिवार से सुरक्षित मिली।

नाडियाड जिला जेल में बंद एक प्रवासी महिला ने 21 मई को बेटे को जन्म दिया, लेकिन जमानत मिलने के बाद भी परिवार का कोई सदस्य उसे लेने नहीं आया। इस नाजुक स्थिति में गुजरात पुलिस और जिला विधि सेवा प्राधिकरण (DLSA), आनंद ने मिलकर महिला और उसके दोनों बच्चों को सुरक्षित रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले स्थित उसके पैतृक गाँव पहुँचाया।

मामले की पृष्ठभूमि

आनंद जिले के खंभात कस्बे में बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज एक मामले में इस महिला को उसके पति और देवर के साथ सह-आरोपी बनाया गया था। महिला के देवर पर एक नाबालिग लड़की के कथित अपहरण का आरोप है। यह परिवार मूलतः मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का निवासी है, जो रोज़गार की तलाश में गुजरात आकर बसा था।

जब महिला को नाडियाड जिला जेल लाया गया, तब वह गर्भवती थी और उसके साथ उसका दो वर्षीय बच्चा भी था। 21 मई को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उसे पहले नाडियाड सिविल अस्पताल और फिर बेहतर उपचार के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने एक बेटे को जन्म दिया।

जमानत के बाद भी अकेली

उपचार पूरा होने के बाद महिला को नवजात शिशु सहित वापस नाडियाड जिला जेल लाया गया। स्थानीय अदालत ने उसे जमानत दे दी थी, किंतु उसके पति और देवर हिरासत में थे और परिवार की अत्यंत कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण कोई भी उसे लेने नहीं पहुँचा। वह दो वर्षीय और चार दिन के शिशु के साथ अकेली और असहाय थी।

प्रशासन का हस्तक्षेप

DLSA, आनंद ने महिला को कानूनी सहायता प्रदान की और जेल अधिकारियों से अनुरोध किया कि उसकी नाजुक स्वास्थ्य स्थिति तथा नवजात की उपस्थिति को देखते हुए उसे सुरक्षित रूप से उसके पैतृक गाँव पहुँचाया जाए। गुजरात पुलिस महानिदेशक डॉ. के.एल.एन. राव के मार्गदर्शन में नाडियाड जिला जेल पुलिस ने एक स्थानीय धर्मार्थ संगठन के सहयोग से विशेष वाहन की व्यवस्था की।

अलीराजपुर तक की लंबी यात्रा में दो पुलिस कांस्टेबल महिला और उसके दोनों बच्चों के साथ रहे। मध्य प्रदेश पहुँचने पर स्थानीय पुलिस को सूचित कर उन्हें प्रक्रिया में शामिल किया गया और महिला अपने परिवार से सुरक्षित मिल सकी।

परिवार की प्रतिक्रिया

अधिकारियों के अनुसार, प्रवासी परिवार ने DLSA, नाडियाड जिला जेल और गुजरात पुलिस के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। नवजात शिशु और छोटे बच्चे के साथ अपने गाँव पहुँचना महिला के लिए एक भावुक क्षण था — जिसने न केवल परिजनों से उसका पुनर्मिलन कराया, बल्कि एक कठिन दौर में मानवीय व्यवस्था में उसका भरोसा भी बहाल किया।

यह घटना यह भी रेखांकित करती है कि विधि सेवा प्राधिकरण और जेल प्रशासन मिलकर कैसे हाशिये पर खड़े लोगों के लिए संस्थागत सुरक्षा कवच बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करती है — कि जेल में बंद गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए व्यवस्थागत प्रोटोकॉल क्यों नहीं हैं, जो हर मामले में लागू हों। यह करुणा किसी एक अधिकारी की सद्भावना पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। प्रवासी परिवारों की कानूनी और सामाजिक कमज़ोरी — भाषा की बाधा, दूरी, गरीबी — एक संरचनात्मक समस्या है जिसके लिए DLSA जैसी संस्थाओं को नियमित और स्वतः-संज्ञान आधारित तंत्र विकसित करना होगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाडियाड जेल की प्रवासी महिला का मामला क्या है?
आनंद जिले के खंभात में POCSO अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज एक मामले में यह महिला सह-आरोपी थी। जेल में रहते हुए उसने 21 मई को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया और जमानत के बाद भी कोई परिजन उसे लेने नहीं आया।
गुजरात पुलिस ने महिला की मदद कैसे की?
DLSA, आनंद की सिफारिश पर नाडियाड जिला जेल पुलिस ने एक स्थानीय धर्मार्थ संगठन के सहयोग से विशेष वाहन की व्यवस्था की। दो पुलिस कांस्टेबल महिला और उसके दोनों बच्चों के साथ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर तक गए और स्थानीय पुलिस को सूचित कर उन्हें परिवार से मिलवाया।
यह परिवार मूलतः कहाँ का है और गुजरात क्यों आया था?
यह परिवार मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का निवासी है। दिहाड़ी मजदूरी और आजीविका के अवसरों की तलाश में वे गुजरात में आकर बसे थे।
DLSA की इस मामले में क्या भूमिका रही?
जिला विधि सेवा प्राधिकरण (DLSA), आनंद ने महिला को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की और जेल अधिकारियों से अनुरोध किया कि उसकी नाजुक स्वास्थ्य स्थिति और नवजात शिशु को देखते हुए उसे सुरक्षित घर पहुँचाया जाए।
महिला के पति और देवर की क्या स्थिति है?
महिला के पति और देवर अभी भी हिरासत में हैं। देवर पर नाबालिग लड़की के कथित अपहरण का आरोप है, जबकि महिला को अदालत ने जमानत दे दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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