खेड़ा जेल से मध्य प्रदेश तक: गुजरात पुलिस ने नवजात सहित विचाराधीन महिला को सुरक्षित पहुंचाया घर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के खेड़ा जिले में प्रशासन और पुलिस ने 30 मई 2026 को एक असाधारण मानवीय पहल के तहत एक विचाराधीन प्रवासी महिला और उसके नवजात शिशु को सुरक्षित उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश पहुंचाया। नडियाद जिला जेल प्रशासन और आनंद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस संयुक्त कोशिश ने यह साबित किया कि संवेदनशील प्रशासन केवल कागज़ों तक सीमित नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला खंभात क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में इस महिला को उसके पति और देवर के साथ सह-आरोपी बनाया गया था। परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का निवासी है और रोज़गार की तलाश में गुजरात आया था। महिला नडियाद जिला जेल में विचाराधीन थी और उस दौरान वह गर्भवती भी थी — उसके साथ उसका दो वर्षीय बच्चा भी जेल में था।
जेल में हुआ प्रसव, अहमदाबाद में हुआ उपचार
21 मई को महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उसे पहले नडियाद सिविल अस्पताल और फिर बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल भेजा गया। वहाँ उसने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। उपचार पूर्ण होने के बाद उसे वापस नडियाद जिला जेल लाया गया, जहाँ वह अपने दोनों छोटे बच्चों के साथ रह रही थी।
जमानत के बाद भी बनी रही असहाय स्थिति
जमानत मिलने के बावजूद महिला की मुश्किलें कम नहीं हुईं। उसका पति और देवर अभी भी हिरासत में थे और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमज़ोर थी कि कोई भी परिजन उसे लेने नहीं आ सका। नवजात और दो वर्षीय बच्चे के साथ वह पूरी तरह बेसहारा थी। यह ऐसे समय में आया जब प्रवासी मज़दूर परिवारों की कानूनी और सामाजिक सुरक्षा पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की मानवीय पहल
इस स्थिति में नडियाद जिला जेल प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महिला की मदद का निर्णय लिया। गुजरात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. के.एल.एन. राय के मार्गदर्शन में एक विशेष वाहन की व्यवस्था की गई। एक स्थानीय धर्मार्थ संस्था ने भी इस प्रयास में सहयोग दिया। यात्रा के दौरान दो पुलिसकर्मी महिला और उसके दोनों बच्चों के साथ लगातार उपस्थित रहे, ताकि उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित हो सके।
मध्य प्रदेश में परिवार से मिलन
मध्य प्रदेश पहुँचने पर स्थानीय पुलिस को भी पूर्व सूचना दी गई और आपसी समन्वय के साथ महिला को उसके परिजनों से मिलाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा प्रयास केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि मानवता और संवेदनशील प्रशासन की एक मिसाल भी है। परिवार ने गुजरात पुलिस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल प्रशासन का आभार व्यक्त किया। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तरह की प्रवासी-संवेदनशील प्रक्रियाएँ राज्य स्तर पर नीतिगत रूप अपनाती हैं।