28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कल्याण के कचरे के डिब्बे में मिली 7 दिन की नवजात, कोलसेवाड़ी पुलिस जांच में जुटी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कल्याण के कचरे के डिब्बे में मिली 7 दिन की नवजात, कोलसेवाड़ी पुलिस जांच में जुटी

सारांश

ठाणे के कल्याण में श्री विट्ठल मंदिर के बाहर कचरे के डिब्बे में 6-7 दिन की नवजात बच्ची मिली। स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने उसे रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया। कोलसेवाड़ी पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इलाके में आक्रोश, शिशु गृह भेजने की तैयारी।

मुख्य बातें

12 जून की तड़के कल्याण के चिकनिपाड़ा स्थित श्री विट्ठल मंदिर के बाहर कचरे के डिब्बे में 6-7 दिन की नवजात बच्ची मिली।
स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने बच्ची को रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया; डॉ.
सुलोचना त्रिभुवन ने प्राथमिक उपचार दिया।
बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य और स्थिर बताई गई है।
अस्पताल प्रशासन ने बच्ची को शिशु गृह भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
कोलसेवाड़ी पुलिस सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय गवाहों के बयानों के आधार पर जाँच कर रही है।
इलाके में भारी आक्रोश , लोगों ने जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण स्थित चिकनिपाड़ा इलाके में शुक्रवार, 12 जून की तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब श्री विट्ठल मंदिर के बाहर एक पेड़ के नीचे रखे कचरे के डिब्बे में लगभग 6 से 7 दिन की एक नवजात बच्ची मिली। स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने तत्काल बच्ची को रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसकी स्थिति फिलहाल सामान्य और स्थिर बताई जा रही है।

घटना का मुख्य घटनाक्रम

सुबह मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की नजर एक बोरी पर पड़ी, जो कचरे के डिब्बे के पास रखी थी। जब लोगों ने उसे खोला तो उसमें एक जीवित नवजात बच्ची मिली। इलाके में तुरंत खबर फैल गई और लोगों में भारी आक्रोश उमड़ पड़ा।

स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने बिना समय गँवाए बच्ची को नजदीकी रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल की डॉ. सुलोचना त्रिभुवन ने प्राथमिक जाँच के बाद बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की आयु लगभग 6 से 7 दिन है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है।

अस्पताल और प्रशासन की प्रतिक्रिया

अस्पताल प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए बच्ची को शिशु गृह भेजने की तैयारी कर ली है, ताकि उसकी उचित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शिशु परित्याग की घटनाएँ पहले भी चिंता का विषय रही हैं।

पुलिस जांच का दायरा

मामले की सूचना मिलते ही कोलसेवाड़ी पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। पुलिस श्री विट्ठल मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि बच्ची को वहाँ छोड़ने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान हो सके। इसके अलावा आसपास के नागरिकों, दुकानदारों और मंदिर से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जाँच की जा रही है और जल्द ही जिम्मेदार लोगों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

इलाके में आक्रोश और सामाजिक सवाल

इस घटना के बाद चिकनिपाड़ा और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा साफ देखा गया। स्थानीय निवासियों ने नवजात को इस तरह लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। गौरतलब है कि यह घटना एक बार फिर समाज में शिशु परित्याग जैसी गंभीर समस्या को उजागर करती है, जिसके खिलाफ देश में पालना योजना जैसी सरकारी पहलें मौजूद हैं।

आगे क्या होगा

पुलिस सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और स्थानीय गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। बच्ची को शिशु गृह में उचित देखभाल मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके भविष्य का निर्धारण किया जाएगा। यह मामला महाराष्ट्र में शिशु संरक्षण तंत्र की पुनः समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह सवाल उठाती हैं कि सरकार की 'पालना योजना' जैसी पहलें जमीन पर कितनी प्रभावी हैं। सीसीटीवी और पुलिस जाँच आरोपी तक पहुँच सकती है, लेकिन असली समस्या सामाजिक और आर्थिक दबाव में है जो ऐसे कदम उठवाती है। जब तक परित्याग के विकल्प — जैसे गुमनाम शिशु-समर्पण केंद्र — आसानी से सुलभ और जन-जागरूक नहीं होते, तब तक ऐसी घटनाएँ रुकने की संभावना कम है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्याण के कचरे के डिब्बे में नवजात कैसे मिली?
12 जून की सुबह चिकनिपाड़ा स्थित श्री विट्ठल मंदिर परिसर में आने वाले लोगों की नजर एक बोरी पर पड़ी, जिसे खोलने पर उसमें 6-7 दिन की जीवित नवजात बच्ची मिली। स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने तुरंत उसे रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया।
नवजात बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?
रुक्मणीबाई अस्पताल की डॉ. सुलोचना त्रिभुवन के अनुसार बच्ची की उम्र लगभग 6 से 7 दिन है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल सामान्य एवं स्थिर है। उसे आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं।
कोलसेवाड़ी पुलिस इस मामले में क्या कर रही है?
कोलसेवाड़ी पुलिस मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और मंदिर से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि बच्ची को वहाँ छोड़ने वाले की पहचान हो सके।
नवजात बच्ची को आगे कहाँ भेजा जाएगा?
अस्पताल प्रशासन ने बच्ची को शिशु गृह भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि उसकी उचित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। आगे का निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है?
भारत सरकार की 'पालना योजना' के तहत गुमनाम रूप से नवजात को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की व्यवस्था है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाओं के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले