कल्याण के कचरे के डिब्बे में मिली 7 दिन की नवजात, कोलसेवाड़ी पुलिस जांच में जुटी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण स्थित चिकनिपाड़ा इलाके में शुक्रवार, 12 जून की तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब श्री विट्ठल मंदिर के बाहर एक पेड़ के नीचे रखे कचरे के डिब्बे में लगभग 6 से 7 दिन की एक नवजात बच्ची मिली। स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने तत्काल बच्ची को रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसकी स्थिति फिलहाल सामान्य और स्थिर बताई जा रही है।
घटना का मुख्य घटनाक्रम
सुबह मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की नजर एक बोरी पर पड़ी, जो कचरे के डिब्बे के पास रखी थी। जब लोगों ने उसे खोला तो उसमें एक जीवित नवजात बच्ची मिली। इलाके में तुरंत खबर फैल गई और लोगों में भारी आक्रोश उमड़ पड़ा।
स्थानीय महिला पूजा दावेकर ने बिना समय गँवाए बच्ची को नजदीकी रुक्मणीबाई अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल की डॉ. सुलोचना त्रिभुवन ने प्राथमिक जाँच के बाद बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की आयु लगभग 6 से 7 दिन है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है।
अस्पताल और प्रशासन की प्रतिक्रिया
अस्पताल प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए बच्ची को शिशु गृह भेजने की तैयारी कर ली है, ताकि उसकी उचित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शिशु परित्याग की घटनाएँ पहले भी चिंता का विषय रही हैं।
पुलिस जांच का दायरा
मामले की सूचना मिलते ही कोलसेवाड़ी पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। पुलिस श्री विट्ठल मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि बच्ची को वहाँ छोड़ने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान हो सके। इसके अलावा आसपास के नागरिकों, दुकानदारों और मंदिर से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जाँच की जा रही है और जल्द ही जिम्मेदार लोगों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
इलाके में आक्रोश और सामाजिक सवाल
इस घटना के बाद चिकनिपाड़ा और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा साफ देखा गया। स्थानीय निवासियों ने नवजात को इस तरह लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। गौरतलब है कि यह घटना एक बार फिर समाज में शिशु परित्याग जैसी गंभीर समस्या को उजागर करती है, जिसके खिलाफ देश में पालना योजना जैसी सरकारी पहलें मौजूद हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और स्थानीय गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। बच्ची को शिशु गृह में उचित देखभाल मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके भविष्य का निर्धारण किया जाएगा। यह मामला महाराष्ट्र में शिशु संरक्षण तंत्र की पुनः समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करता है।