2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रायसेन के जंगल में नवजात बच्ची मिली लावारिस, ४ घंटे कंटीली झाड़ियों में रही; SNCU में भर्ती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रायसेन के जंगल में नवजात बच्ची मिली लावारिस, ४ घंटे कंटीली झाड़ियों में रही; SNCU में भर्ती

सारांश

रायसेन के घने जंगल में एक नवजात बच्ची कंटीली झाड़ियों और बारिश के पानी के बीच लावारिस मिली — कथित तौर पर जन्म के बाद ४ घंटे अकेली। एक चरवाहे की सतर्कता ने उसकी जान बचाई। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है और माता-पिता की तलाश जारी है।

मुख्य बातें

मंगलवार, 2 सितंबर को रायसेन जिले के डुंगरिया खुर्द गाँव के जंगल में नवजात बच्ची लावारिस मिली।
पुलिस के अनुमान के अनुसार बच्ची जन्म के बाद लगभग तीन से चार घंटे तक कंटीली झाड़ियों और बारिश के पानी में रही।
एक चरवाहे ने रोने की आवाज़ सुनकर बच्ची को खोजा और आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सूचित किया।
बच्ची को रायसेन जिला अस्पताल की SNCU में भर्ती कराया गया; शरीर पर चोट के निशान और कमज़ोरी दर्ज की गई।
बम्हौरी पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया; बाल कल्याण समिति ने पुनर्वास प्रक्रिया शुरू की।
बच्ची अगले तीन से चार दिनों तक चिकित्सीय निगरानी में रहेगी।

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बम्हौरी तहसील के डुंगरिया खुर्द गाँव से सटे एक घने जंगल में मंगलवार, 2 सितंबर को एक नवजात बच्ची कंटीली झाड़ियों और बारिश के पानी के बीच लावारिस हालत में मिली। पुलिस के अनुमान के अनुसार, बच्ची को जन्म के तुरंत बाद — कथित तौर पर सुबह करीब 5 बजे — वहाँ छोड़ दिया गया था और वह बचाए जाने से पहले लगभग तीन से चार घंटे तक बारिश के पानी, कीड़े-मकोड़ों और जंगली जानवरों के खतरे के बीच पड़ी रही। फिलहाल बच्ची को रायसेन जिला अस्पताल की सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टर उसकी कड़ी निगरानी कर रहे हैं।

घटनाक्रम: कैसे मिली बच्ची

मंगलवार की सुबह डुंगरिया खुर्द गाँव का एक चरवाहा मवेशी चरा रहा था, तभी उसे जंगल में किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज़ का पीछा करने पर उसे कंटीली झाड़ियों के बीच पानी में एक नवजात बच्ची पड़ी मिली — उस स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। चरवाहे ने तत्काल आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुँचे और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला।

बच्ची को पहले बम्हौरी सब-हेल्थ सेंटर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे सिलवानी और फिर रायसेन जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ उसे SNCU में दाखिल किया गया।

बच्ची की चिकित्सीय स्थिति

SNCU इंचार्ज डॉ. आलोक राय ने बताया कि कंटीली झाड़ियों के कारण बच्ची के शरीर पर चोट के निशान थे और लंबे समय तक बारिश के पानी के संपर्क में रहने से उसका शरीर अकड़ गया था। अस्पताल पहुँचने पर वह शारीरिक रूप से कमज़ोर थी और उसे भूख भी लगी थी।

डॉक्टरों के अनुमान के अनुसार बच्ची का जन्म सुबह करीब 5 बजे हुआ था और उसे जन्म के तुरंत बाद जंगल में छोड़ दिया गया। वह कथित तौर पर तीन से चार घंटे तक बारिश के पानी और कीड़े-मकोड़ों के संपर्क में रही।

पुलिस की कार्रवाई

बम्हौरी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज प्रीतम सिंह राजपूत ने कहा, 'ऐसे जंगल में नवजात को छोड़ना जानलेवा साबित हो सकता था। हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और माता-पिता की पहचान के लिए आसपास के गाँवों में पूछताछ कर रहे हैं।' राजपूत ने स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर बच्ची मिली, वह घना जंगल है जहाँ जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।

पुलिस टीमें जंगल और आसपास के गाँवों में पूछताछ जारी रखे हुए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्ची को वहाँ कौन लाया और इस कृत्य के लिए कौन जिम्मेदार है।

बाल कल्याण समिति की भूमिका

घटना की सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता पटेल ने रायसेन जिला अस्पताल का दौरा किया और डॉक्टरों से बच्ची की स्थिति व उपचार की जानकारी ली। पटेल ने बताया कि समिति ने इस लावारिस बच्ची के मामले में आगे की कानूनी और पुनर्वास प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची अगले तीन से चार दिनों तक चिकित्सीय देखरेख में रहेगी।

आगे की राह

यह घटना मध्य प्रदेश में नवजात बच्चियों को लावारिस छोड़े जाने की चिंताजनक प्रवृत्ति को फिर से उजागर करती है। गौरतलब है कि राज्य में 'लाडली लक्ष्मी' जैसी योजनाएँ बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही हैं, फिर भी इस तरह की घटनाएँ सामाजिक जागरूकता की कमी को दर्शाती हैं। पुलिस के अनुसार जाँच जारी है और दोषियों की पहचान होते ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी नवजात बच्चियों को जंगलों और कूड़ेदानों में छोड़ने की घटनाएँ थमती नहीं। असली सवाल यह है कि क्या राज्य के स्वास्थ्य और सामाजिक तंत्र में कोई ऐसा सुरक्षा-जाल है जो परिवारों को इस अंतिम कदम से पहले रोक सके — जैसे कि 'बेबी क्रैडल' या गुमनाम शिशु समर्पण केंद्र। जब तक जवाबदेही केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहेगी और रोकथाम की व्यवस्था नहीं बनेगी, ऐसी खबरें आती रहेंगी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रायसेन के जंगल में नवजात बच्ची कैसे मिली?
मंगलवार, 2 सितंबर को बम्हौरी तहसील के डुंगरिया खुर्द गाँव के पास एक चरवाहे ने जंगल में रोने की आवाज़ सुनी और कंटीली झाड़ियों के बीच बारिश के पानी में नवजात बच्ची को पाया। उसने आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुँचे।
नवजात बच्ची की अभी क्या स्थिति है?
बच्ची को रायसेन जिला अस्पताल की सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती कराया गया है। SNCU इंचार्ज डॉ. आलोक राय के अनुसार बच्ची के शरीर पर चोट के निशान थे, शरीर अकड़ा हुआ था और वह कमज़ोर थी; अगले तीन से चार दिनों तक वह चिकित्सीय निगरानी में रहेगी।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
बम्हौरी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज प्रीतम सिंह राजपूत ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस टीमें जंगल और आसपास के गाँवों में पूछताछ कर बच्ची के माता-पिता की पहचान करने में जुटी हैं।
बाल कल्याण समिति की इस मामले में क्या भूमिका है?
बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता पटेल ने जिला अस्पताल का दौरा कर बच्ची की स्थिति की जानकारी ली। समिति ने लावारिस बच्ची के पुनर्वास और आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या नवजात को जंगल में छोड़ना कानूनी अपराध है?
हाँ, भारतीय दंड संहिता के तहत नवजात शिशु को लावारिस छोड़ना एक संज्ञेय अपराध है। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और दोषियों की पहचान होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले