पटियाला बस स्टैंड पर लावारिस मिली नवजात बच्ची, माता कौशल्या अस्पताल में उपचार जारी
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के पटियाला में 30 जून 2026 को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब शहर के पुराने बस स्टैंड के प्रतीक्षालय में एक नवजात बच्ची कुर्सियों पर अकेली और लावारिस हालत में मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और बच्ची को तत्काल माता कौशल्या अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, राहगीरों की नज़र जब प्रतीक्षालय की कुर्सियों पर अकेली पड़ी इस नवजात पर पड़ी, तो उन्होंने बिना देर किए बच्ची को अपनी गोद में उठाया और तुरंत नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया। बताया जा रहा है कि बच्ची का जन्म घटना से कुछ ही समय पहले हुआ था। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार एवं देखभाल जारी है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही थाना लाहौरी गेट के एसएचओ सौरव सबरवाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे और जाँच शुरू कर दी। एसएचओ के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि पुराने बस स्टैंड के पास एक अज्ञात व्यक्ति नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाई और बच्ची को अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था की।
प्रत्यक्षदर्शी की आपबीती
घटना की प्रत्यक्षदर्शी नीतू ने बताया कि जब वह मौके पर पहुँचीं, तब नवजात बच्ची प्रतीक्षालय की कुर्सियों पर अकेली पड़ी थी। उस समय पुलिसकर्मी, ट्रैफिक पुलिस और अन्य नागरिक भी वहाँ मौजूद थे। नीतू ने कहा कि 'इतनी छोटी बच्ची को इस तरह बेसहारा छोड़ना बेहद अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।' उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में लड़का और लड़की में कोई भेद नहीं होना चाहिए और समाज को इस संकीर्ण सोच से ऊपर उठने की ज़रूरत है।
सीसीटीवी फुटेज की जाँच
पुलिस ने मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत जाँच शुरू कर दी है। पुराने बस स्टैंड के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और बच्ची को छोड़कर जाने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, मामले में दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की राह
फिलहाल नवजात बच्ची माता कौशल्या अस्पताल में सुरक्षित है और चिकित्सकों की देखरेख में उसका उपचार जारी है। पुलिस बच्ची के परिजनों की तलाश में जुटी हुई है। यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा करती है कि कोई अभिभावक किन परिस्थितियों में एक मासूम नवजात को इस तरह लावारिस छोड़ने का फैसला करता है — और यह सुनिश्चित करना राज्य व समाज दोनों की ज़िम्मेदारी है कि ऐसी बच्चियों को सुरक्षा और न्याय मिले।