पॉक्सो मामले में बेटे की गिरफ्तारी पर बंदी संजय का दावा: 'मैंने खुद सौंपा', पुलिस का बयान अलग

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पॉक्सो मामले में बेटे की गिरफ्तारी पर बंदी संजय का दावा: 'मैंने खुद सौंपा', पुलिस का बयान अलग

सारांश

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार ने दावा किया कि उन्होंने खुद अपने बेटे भगीरथ को पुलिस को सौंपा — लेकिन साइबराबाद पुलिस कह रही है कि गिरफ्तारी 16 मई की रात नारसिंगी में हुई। पॉक्सो मामले में भगीरथ 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार ने 20 मई 2026 को दावा किया कि उन्होंने पॉक्सो मामले में बेटे बंदी भगीरथ को स्वयं पुलिस के हवाले किया।
साइबराबाद पुलिस के अनुसार भगीरथ को 16 मई की रात नारसिंगी में गिरफ्तार किया गया; मजिस्ट्रेट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने 15 मई को भगीरथ को गिरफ्तारी-पूर्व अंतरिम राहत देने से इनकार किया था।
मामला 8 मई को पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में पॉक्सो एक्ट और BNS की धारा 74 व 75 के तहत दर्ज हुआ; जाँच के बाद और सख्त धाराएँ जोड़ी गईं।
पुलिस के अनुसार भगीरथ ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न की बात स्वीकार कर ली।
बंदी संजय ने नई पार्टी बनाने की अटकलों और पद छोड़ने की माँगों को बेबुनियाद बताया।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने 20 मई 2026 को हैदराबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि उन्होंने पॉक्सो मामले में जाँच में सहयोग के लिए अपने बेटे बंदी भगीरथ को स्वयं पुलिस के हवाले किया। उन्होंने कहा, 'क्या आपने कभी किसी पिता को अपने ही बेटे को पुलिस के हवाले करते देखा है?' हालाँकि, यह दावा साइबराबाद पुलिस के आधिकारिक बयान से मेल नहीं खाता।

पुलिस और मंत्री के बयानों में विरोधाभास

साइबराबाद पुलिस के अनुसार, भगीरथ को 16 मई की रात नारसिंगी में गिरफ्तार किया गया था — न कि स्वेच्छा से सौंपा गया। गिरफ्तारी के बाद उसे एक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जिसने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गौरतलब है कि तेलंगाना हाई कोर्ट ने 15 मई को भगीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

मामले का पूरा घटनाक्रम

8 मई को पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में भगीरथ के खिलाफ एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। पीड़िता से जाँच अधिकारी की बातचीत के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धारा 11 (धारा 12 के साथ पठित) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75 के तहत और अधिक सख्त धाराएँ जोड़ दीं।

पुलिस ने भगीरथ को नोटिस जारी कर 13 मई को जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। वह उपस्थित नहीं हुआ, बल्कि उसने पत्र भेजकर दो दिन का अतिरिक्त समय माँगा। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद भगीरथ ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न की बात स्वीकार कर ली।

बंदी संजय की राजनीतिक प्रतिक्रिया

बेटे की गिरफ्तारी के बाद पहली बार बंदी संजय तेलंगाना भाजपा कार्यालय पहुँचे, जहाँ पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। जब उनसे विपक्षी दलों की ओर से पद छोड़ने की माँगों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का लोकसभा में एक भी सांसद नहीं है। उन्होंने के. चंद्रशेखर राव (KCR) पर 'भ्रष्ट साम्राज्य' चलाने का आरोप लगाया और के. टी. रामा राव (KTR) पर 'फेक सोशल मीडिया फैक्ट्री' संचालित करने का।

नई पार्टी की अटकलों पर सफाई

बंदी संजय ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी सिरे से खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि वह एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हर कार्यकर्ता अनुशासित है और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा अटूट है।

आगे क्या

भगीरथ फिलहाल 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जाँच जारी है। पॉक्सो मामलों में न्यायालय की प्रक्रिया को देखते हुए अगली सुनवाई की तारीख निर्णायक होगी। मंत्री बंदी संजय के दावे और पुलिस के आधिकारिक बयान के बीच का विरोधाभास राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर बहस का केंद्र बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी दर्ज है — यह विरोधाभास महज़ शब्दों का फेर नहीं, बल्कि जवाबदेही की राजनीति का आईना है। पद पर बने रहते हुए मामले को 'नैतिक साहस' के रूप में पेश करना उस जनता के साथ न्याय नहीं करता जो पॉक्सो जैसे गंभीर कानून की निष्पक्ष जाँच की अपेक्षा रखती है। यह ऐसे समय में आया है जब सत्तारूढ़ दलों के नेताओं पर लगे आरोपों में संस्थागत जवाबदेही को लेकर पूरे देश में बहस तेज़ है। असली कसौटी यह नहीं कि मंत्री ने क्या कहा — बल्कि यह है कि जाँच स्वतंत्र, पारदर्शी और राजनीतिक दबाव से मुक्त रहती है या नहीं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंदी भगीरथ पर पॉक्सो मामला क्या है?
8 मई 2026 को हैदराबाद के पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में बंदी भगीरथ के खिलाफ एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में पॉक्सो एक्ट और BNS की धारा 74 व 75 के तहत मामला दर्ज किया गया। जाँच के दौरान पीड़िता के बयान के बाद पुलिस ने और सख्त धाराएँ भी जोड़ीं।
बंदी भगीरथ को कब और कैसे गिरफ्तार किया गया?
साइबराबाद पुलिस के अनुसार, भगीरथ को 16 मई 2026 की रात नारसिंगी में गिरफ्तार किया गया। तेलंगाना हाई कोर्ट ने 15 मई को उसे अंतरिम राहत देने से इनकार किया था; इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की और उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जिसने 14 दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
बंदी संजय कुमार के दावे और पुलिस के बयान में क्या अंतर है?
बंदी संजय कुमार का दावा है कि उन्होंने स्वयं अपने बेटे को पुलिस के हवाले किया, जबकि साइबराबाद पुलिस का आधिकारिक बयान है कि भगीरथ को 16 मई की रात नारसिंगी में गिरफ्तार किया गया था। दोनों बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है।
क्या बंदी संजय कुमार अपने पद से इस्तीफा देंगे?
बंदी संजय ने पद छोड़ने की माँगों को खारिज करते हुए कहा कि ये माँगें BRS जैसी उन पार्टियों से आ रही हैं जिनका लोकसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने BJP में अपनी निष्ठा दोहराई और नई पार्टी बनाने की अटकलों को भी बेबुनियाद बताया।
पॉक्सो एक्ट के तहत इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 11 (धारा 12 के साथ पठित) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 व 75 के तहत आरोप दर्ज हैं। पीड़िता के बयान के बाद जाँच के दौरान और अधिक सख्त धाराएँ भी जोड़ी गईं।
राष्ट्र प्रेस
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