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ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0: हैदराबाद पुलिस ने 13 राज्यों में 66 गिरफ्तार, 1,194 'घोस्ट सिम' जब्त

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ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0: हैदराबाद पुलिस ने 13 राज्यों में 66 गिरफ्तार, 1,194 'घोस्ट सिम' जब्त

सारांश

हैदराबाद पुलिस का 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0' सिर्फ गिरफ्तारी नहीं — यह साइबर अपराध की रीढ़ पर सीधा प्रहार है। 13 राज्यों में 66 गिरफ्तारियाँ और 1,194 घोस्ट सिम की जब्ती यह दिखाती है कि ठगी का नेटवर्क टेलीकॉम एजेंटों और गाँवों तक फैला है।

मुख्य बातें

हैदराबाद पुलिस ने ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0 के तहत 13 राज्यों में 66 लोगों को गिरफ्तार किया।
1,194 'घोस्ट सिम' जब्त; अकेले हैदराबाद से 544 सिम बरामद, जिनमें 432 अभी सक्रिय नहीं किए गए थे।
गिरफ्तार लोगों में 44 घोस्ट सिम धारक , 20 पीओएस एजेंट/टेलीकॉम प्रमोटर और 2 सप्लायर शामिल।
गिरफ्तार 66 लोग देशभर के 76 साइबर अपराध मामलों से जुड़े; कुल ठगी कथित तौर पर ₹101.87 करोड़ ।
पुलिस अब एयरटेल, जियो, वोडाफोन आइडिया और TRAI के साथ केवाईसी प्रक्रिया सुदृढ़ करने पर काम करेगी।

हैदराबाद पुलिस ने 20 मई 2026 को 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0' के तहत देशव्यापी छापेमारी में 13 राज्यों से 66 संदिग्धों को गिरफ्तार किया और 1,194 'घोस्ट सिम' जब्त किए, जिनका उपयोग संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को अपनी पहचान छिपाने में होता था। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने बुधवार को इस बहु-राज्यीय अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के पूरे इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है।

ऑपरेशन का दायरा और बरामदगी

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (CCPS), हैदराबाद ने 18 विशेष टीमें गठित कर लगातार सात दिनों तक 13 राज्यों में एक साथ छापेमारी की। अकेले हैदराबाद शहर से 544 सिम कार्ड बरामद हुए, जिनमें 432 सील बंद सिम ऐसे थे जिन्हें अभी तक सक्रिय नहीं किया गया था — यानी ये भविष्य के साइबर अपराधों के लिए तैयार रखे गए थे।

गिरफ्तार 66 लोगों में 44 घोस्ट सिम धारक, 20 पीओएस (POS) एजेंट व टेलीकॉम प्रमोटर और 2 घोस्ट सिम सप्लायर शामिल हैं। गिरफ्तार पीओएस एजेंटों में 10 वोडाफोन आइडिया, 7 एयरटेल और 3 जियो से जुड़े बताए गए हैं।

'घोस्ट सिम' नेटवर्क कैसे काम करता था

पुलिस जाँच के अनुसार, 'घोस्ट सिम' ऐसे मोबाइल कनेक्शन होते हैं जिन्हें आम नागरिकों के नाम पर धोखाधड़ी से सक्रिय किया जाता है। कुछ पीओएस एजेंट मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके नाम पर अतिरिक्त सिम सक्रिय कर देते थे। इन सिम को बाद में ई-सिम में परिवर्तित कर विदेश भेजा जाता था, जहाँ इनका उपयोग साइबर फ्रॉड में होता था।

कम डिजिटल साक्षरता वाले लोगों को मुफ्त सिम एक्टिवेशन का लालच देकर उनके नाम पर सिम लिए जाते थे और फिर कमीशन के बदले साइबर फ्रॉड नेटवर्क को सप्लाई किए जाते थे। गाँवों में मुफ्त सिम वितरण कैंप लगाकर अशिक्षित लोगों के आधार कार्ड का दुरुपयोग भी किया गया। एजेंट लोगों से ओटीपी लेकर व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया, डेटिंग और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल भी तैयार करते थे।

ऑक्टोपस श्रृंखला की पृष्ठभूमि

पुलिस कमिश्नर सज्जनार के अनुसार, यह ऑपरेशन एक सुनियोजित श्रृंखला का तीसरा चरण है। 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 1.0' में म्यूल अकाउंट धारकों पर कार्रवाई की गई थी, 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0' में साइबर फ्रॉड में सहयोग करने वाले बैंक अधिकारियों को निशाना बनाया गया था, और अब 'ऑक्टोपस 3.0' ने उस घोस्ट सिम नेटवर्क पर प्रहार किया जो अपराधियों को पहचान छिपाने का आधार देता था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

वित्तीय नुकसान और आगे की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार 66 लोग देशभर में दर्ज 76 साइबर अपराध मामलों से जुड़े हैं, जिनमें कथित तौर पर ₹101.87 करोड़ की ठगी हुई है। अब हैदराबाद पुलिस एयरटेल, जियो और वोडाफोन आइडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठकें करेगी। इसके अतिरिक्त दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से भी संपर्क किया जाएगा ताकि केवाईसी प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

गौरतलब है कि पिछले छह महीनों से हैदराबाद पुलिस बैंकिंग और नियामक संस्थाओं के साथ लगातार बैठकें कर रही है। यह अभियान स्पष्ट संकेत देता है कि साइबर अपराध से लड़ाई अब केवल फ्रॉड की जाँच तक सीमित नहीं रही — बल्कि उसके बुनियादी ढाँचे को ध्वस्त करने की दिशा में बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

टेलीकॉम एजेंट और ग्रामीण बिचौलिए बराबर के भागीदार हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि केवाईसी प्रक्रिया में इतनी बड़ी खामियाँ इतने वर्षों तक क्यों बनी रहीं, जबकि TRAI और DoT के पास निगरानी का पूरा ढाँचा है। ₹101.87 करोड़ की ठगी और 76 मामले केवल उन्हीं मामलों की संख्या है जो पुलिस के रडार पर आए — वास्तविक आँकड़ा कहीं अधिक हो सकता है। जब तक टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय नहीं होती और एजेंट नेटवर्क की वास्तविक समय निगरानी नहीं होती, तब तक ऐसे ऑपरेशन लक्षण का उपचार करते रहेंगे, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'घोस्ट सिम' क्या होता है और यह साइबर अपराध में कैसे इस्तेमाल होता है?
'घोस्ट सिम' ऐसे मोबाइल कनेक्शन होते हैं जिन्हें आम नागरिकों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना धोखाधड़ी से सक्रिय किया जाता है। साइबर अपराधी इन सिम का उपयोग अपनी असली पहचान छिपाने, फर्जी प्रोफाइल बनाने और ठगी के लिए करते हैं।
ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0 में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कहाँ से?
हैदराबाद पुलिस ने 13 राज्यों में छापेमारी कर कुल 66 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें 44 घोस्ट सिम धारक, 20 पीओएस एजेंट व टेलीकॉम प्रमोटर और 2 सप्लायर शामिल हैं।
इस नेटवर्क से कितनी ठगी हुई और कितने मामले दर्ज हैं?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार 66 लोग देशभर में दर्ज 76 साइबर अपराध मामलों से जुड़े हैं, जिनमें कथित तौर पर ₹101.87 करोड़ की ठगी हुई है। ये वे मामले हैं जो अब तक जाँच में सामने आए हैं।
ऑपरेशन ऑक्टोपस के पिछले चरण क्या थे?
ऑपरेशन ऑक्टोपस 1.0 में म्यूल बैंक अकाउंट धारकों पर कार्रवाई हुई थी, जबकि ऑक्टोपस 2.0 में साइबर फ्रॉड में सहयोग करने वाले बैंक अधिकारियों को निशाना बनाया गया था। ऑक्टोपस 3.0 घोस्ट सिम नेटवर्क पर केंद्रित है जो पूरे अपराध तंत्र की पहचान-छिपाने की परत थी।
आगे टेलीकॉम कंपनियों पर क्या कार्रवाई होगी?
हैदराबाद पुलिस एयरटेल, जियो और वोडाफोन आइडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठकें करेगी। साथ ही दूरसंचार विभाग (DoT) और TRAI से भी संपर्क किया जाएगा ताकि केवाईसी प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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