59 साल बाद कांग्रेस तमिलनाडु कैबिनेट में वापसी, राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन लेंगे मंत्री पद की शपथ
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने 20 मई 2025 को घोषणा की कि 59 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस एक बार फिर तमिलनाडु कैबिनेट में जगह पाने जा रही है। कांग्रेस के दो विधायक — एडवोकेट राजेश कुमार और थिरु पी. विश्वनाथन — गुरुवार को मंत्री पद की शपथ लेंगे।
ऐतिहासिक वापसी का ऐलान
वेणुगोपाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दोनों विधायकों को तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक अवसर' बताते हुए कहा कि यह गठबंधन की मजबूती और जन-हितैषी शासन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि दोनों नवनियुक्त मंत्री तमिलनाडु की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करेंगे तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कल्याणकारी एवं जन-हितैषी शासन की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में कार्य करेंगे।
कैबिनेट की संवैधानिक सीमा और मौजूदा स्थिति
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सदस्य हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1ए) के अनुसार किसी राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या — मुख्यमंत्री सहित — विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इस प्रावधान के तहत तमिलनाडु मंत्रिपरिषद में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री विजय और नौ मंत्री शपथ ले चुके हैं, जिससे कैबिनेट में अभी भी 25 और सदस्यों के लिए जगह बाकी है। गठबंधन के साथियों और सहयोगी समूहों को अधिक प्रतिनिधित्व देने को लेकर राजनीतिक चर्चाएँ पहले से ही जारी हैं।
विजय सरकार का फ्लोर टेस्ट
तमिलनाडु विधानसभा में हाल ही में हुए फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार ने बहुमत साबित कर दिया है। मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जबकि विरोध में केवल 22 वोट पड़े।
TVK सरकार और गठबंधन का समीकरण
तमिलनाडु की TVK सरकार को कांग्रेस सहित कई दलों का समर्थन प्राप्त है। विधानसभा चुनाव में TVK सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, हालाँकि स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों पर निर्भरता बनी रही। कांग्रेस का कैबिनेट में शामिल होना इस गठबंधन को और अधिक संस्थागत स्वरूप देता है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष-शासित राज्यों में कांग्रेस की भूमिका और गठबंधन-राजनीति में उसकी स्थिति पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। तमिलनाडु में यह वापसी पार्टी के लिए दक्षिण भारत में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति मजबूत करने का एक अवसर भी है।