ट्रंप का खुलासा: ईरान से परमाणु वार्ता उम्मीद से कहीं लंबी, विफलता पर कड़े विकल्पों का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 मई 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि ईरान के साथ जारी कूटनीतिक वार्ता अनुमान से कहीं अधिक लंबी खिंच रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि बातचीत का रास्ता बंद होता है, तो अमेरिका कठोर विकल्पों पर विचार करने से नहीं हिचकेगा।
बातचीत पर ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा कि वह क्षेत्र में व्यापक युद्ध की तुलना में सीमित तनाव को प्राथमिकता देते हैं। उनके शब्दों में, 'आदर्श रूप से मैं यह देखना चाहूंगा कि बहुत ज़्यादा लोगों की बजाय कम लोगों की जान जाए। हम इसे किसी दूसरे तरीके से भी कर सकते हैं, लेकिन मैं कम नुकसान देखना चाहूंगा।' यह बयान अमेरिकी विदेश नीति में सैन्य संयम और कूटनीतिक दबाव के बीच की खींचतान को उजागर करता है।
ईरान में आंतरिक असंतोष पर दावा
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में खराब आर्थिक और सामाजिक हालात के चलते आम लोगों में गहरा असंतोष पनप रहा है। उन्होंने कहा, 'ईरान में इस समय काफी नाराज़गी है क्योंकि लोग बेहद खराब परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। वहाँ असंतोष बढ़ रहा है, जैसा हमने पहले कम देखा था।' हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पिछली सैन्य तैनातियों से तुलना
जब पत्रकारों ने वार्ता की लंबाई पर सवाल उठाया, तो ट्रंप ने इसकी तुलना अमेरिका की पुरानी सैन्य मौजूदगी से की। उन्होंने कहा, 'आप अफगानिस्तान में 10 साल तक रहे। इराक में भी लंबे समय तक रहे। कोरिया में भी सात साल तक तैनाती रही।' यह तुलना संकेत देती है कि ट्रंप मौजूदा कूटनीतिक प्रक्रिया को दीर्घकालिक संघर्षों के विकल्प के रूप में देखते हैं।
हताहतों पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने कहा कि हाल के अमेरिकी सैन्य अभियानों में पिछले युद्धों की तुलना में बहुत कम अमेरिकी सैनिकों की जान गई। उनके अनुसार, 'दूसरे युद्धों में लाखों लोग मारे गए थे। यहाँ हमने 13 लोगों को खोया। हालाँकि 13 लोगों की मौत भी बहुत ज़्यादा है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने लंबे सैन्य कब्ज़े के बिना भी बड़ी रणनीतिक सफलताएँ हासिल की हैं।
विवादास्पद दावा और आगे की राह
ट्रंप ने एक विवादास्पद बयान में कहा, 'हमने मूल रूप से ईरान पर नियंत्रण हासिल कर लिया था' — हालाँकि उन्होंने इस दावे का कोई विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया। यह टिप्पणी कूटनीतिक हलकों में सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का यह दौर ऐसे समय में चल रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ऊँचा है। वार्ता का अगला चरण और उसके नतीजे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।