सीबीआई ने गिरिडीह के CGST अधीक्षक और निरीक्षक को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

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सीबीआई ने गिरिडीह के CGST अधीक्षक और निरीक्षक को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

सारांश

सीबीआई ने एक ही सप्ताह में दो अलग-अलग जाल कार्रवाइयों में CGST और DDA के अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। गिरिडीह में ITC विसंगति के नाम पर ₹90,000 की माँग और दिल्ली में सतर्कता मामले में ₹5 लाख की माँग — दोनों मामले सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करते हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 20 मई 2026 को गिरिडीह के CGST अधीक्षक और निरीक्षक को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने शिकायतकर्ता से ITC विसंगति सुलझाने के बदले ₹90,000 की माँग की थी और जीएसटी नंबर ब्लॉक करने की धमकी दी थी।
आरोपियों को धनबाद की सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा; तलाशी अभियान चलाया गया।
19 मई 2026 को सीबीआई ने DDA के सहायक सतर्कता अधिकारी और MTS को भी ₹50,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
DDA मामले में मूल माँग ₹5 लाख थी, जो बातचीत के बाद ₹3 लाख तय हुई।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 मई 2026 को गिरिडीह के केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधीक्षक और निरीक्षक को रिश्वतखोरी के मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन दोनों लोक सेवकों ने एक शिकायतकर्ता से उसकी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विसंगति सुलझाने के एवज में ₹90,000 की अनुचित रिश्वत की माँग की थी।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई ने शिकायत के आधार पर 20 मई 2026 को मामला दर्ज करते हुए जाल बिछाया। आरोपी अधीक्षक और निरीक्षक को शिकायतकर्ता से ₹90,000 की माँगी गई रिश्वत के आंशिक भुगतान के रूप में ₹50,000 स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के कार्यालय और आवासीय परिसरों में तलाशी ली गई।

आरोपियों को धनबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा। सीबीआई के अनुसार जाँच अभी जारी है।

रिश्वत की माँग कैसे हुई

शिकायतकर्ता की ITC विसंगति को हल करने के लिए दोनों अधिकारियों ने कथित तौर पर ₹90,000 की माँग की और भुगतान न करने पर उसका जीएसटी नंबर ब्लॉक करने की धमकी दी। यह धमकी व्यापारी के लिए गंभीर व्यावसायिक संकट का कारण बन सकती थी, जिसके चलते उसने सीबीआई से संपर्क किया।

डीडीए मामले में भी सीबीआई की कार्रवाई

इससे एक दिन पहले, 19 मई 2026 को सीबीआई ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के एक सहायक सतर्कता अधिकारी और एक मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) कर्मचारी को भी रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया। DDA के पूर्व उप निदेशक की शिकायत पर 18 मई 2026 को मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि आरोपी सहायक सतर्कता अधिकारी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ चल रहे सतर्कता मामले में अनुकूल जवाब भेजने के लिए ₹5 लाख की रिश्वत माँगी थी। बातचीत के बाद यह राशि ₹3 लाख तय हुई। सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी MTS के माध्यम से ₹50,000 की आंशिक रिश्वत स्वीकार करते समय दोनों को रंगे हाथों पकड़ा।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब जीएसटी अनुपालन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के सरकारी दावे किए जा रहे हैं। CGST अधिकारियों द्वारा ITC विसंगति के नाम पर रिश्वत की माँग छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनती है, जो पहले से ही जटिल कर-प्रक्रियाओं से जूझ रहे हैं।

क्या होगा आगे

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि गिरिडीह CGST मामले में जाँच जारी है और आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी ट्रैप कार्रवाइयाँ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में कुछ हद तक प्रभावी होती हैं, लेकिन संस्थागत सुधार के बिना दीर्घकालिक बदलाव सीमित रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रणालीगत है। ITC विसंगति जैसी तकनीकी खामियों को हथियार बनाकर छोटे व्यापारियों को निशाना बनाना विशेष रूप से चिंताजनक है — यह वर्ग न तो कानूनी लड़ाई झेल सकता है, न ही जीएसटी नंबर ब्लॉक होने का जोखिम उठा सकता है। सीबीआई की जाल कार्रवाइयाँ प्रतिक्रियात्मक हैं; असली सवाल यह है कि क्या जीएसटी और DDA की आंतरिक सतर्कता प्रणालियाँ इतनी मज़बूत हैं कि शिकायतकर्ता को सीबीआई तक पहुँचने की नौबत ही न आए।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने गिरिडीह के CGST अधिकारियों को क्यों गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने CGST अधीक्षक और निरीक्षक को एक शिकायतकर्ता से ITC विसंगति सुलझाने के बदले ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। आरोपियों ने मूल रूप से ₹90,000 की माँग की थी और भुगतान न करने पर जीएसटी नंबर ब्लॉक करने की धमकी दी थी।
इस मामले में कितनी रिश्वत की माँग हुई थी और कितनी ली गई?
आरोपी CGST अधिकारियों ने ₹90,000 की माँग की थी, लेकिन सीबीआई ने उन्हें आंशिक भुगतान के रूप में ₹50,000 स्वीकार करते समय पकड़ा।
DDA रिश्वत मामले में क्या हुआ?
19 मई 2026 को सीबीआई ने DDA के सहायक सतर्कता अधिकारी और एक MTS कर्मचारी को गिरफ्तार किया। आरोप है कि अधिकारी ने सतर्कता मामले में अनुकूल जवाब देने के लिए ₹5 लाख माँगे, जो बातचीत के बाद ₹3 लाख तय हुए और ₹50,000 की पहली किस्त लेते समय पकड़े गए।
गिरफ्तार CGST अधिकारियों को आगे क्या होगा?
आरोपी अधीक्षक और निरीक्षक को धनबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा। सीबीआई ने बताया है कि जाँच जारी है और दोनों के कार्यालय व आवासीय परिसरों में तलाशी ली जा चुकी है।
ITC विसंगति क्या होती है और इसे लेकर रिश्वत कैसे माँगी जाती है?
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वह सुविधा है जिसमें व्यापारी खरीद पर चुकाए गए जीएसटी को अपनी कर देनदारी से घटा सकते हैं। जब GSTR रिटर्न में विसंगति आती है तो अधिकारी जीएसटी नंबर ब्लॉक करने की धमकी देकर व्यापारियों से अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करते हैं, जैसा इस मामले में कथित तौर पर हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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