मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने PM फसल बीमा योजना को 5 साल के लिए ₹11,608 करोड़ से दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने बुधवार, 20 मई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को अगले पाँच वर्षों के लिए ₹11,608.47 करोड़ के वित्तीय आवंटन के साथ जारी रखने का फैसला किया। 'किसान कल्याण वर्ष' के बीच लिया गया यह निर्णय राज्य के लाखों किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के विरुद्ध सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
योजना की मुख्य शर्तें और प्रीमियम ढाँचा
PMFBY के तहत किसानों को न्यूनतम प्रीमियम देना होता है — खरीफ फसलों पर मात्र 2%, रबी फसलों पर 1.5% और वाणिज्यिक व बागवानी फसलों पर 5%। शेष प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार के बीच साझा की जाती है। राज्य ने सभी फसलों के लिए क्षतिपूर्ति स्तर 80% निर्धारित किया है, जो आने वाले वर्षों में भी लागू रहेगा।
कैबिनेट ने दो वैकल्पिक कार्यान्वयन मॉडलों में से किसी एक को अपनाने का विकल्प खुला रखा है: कप और अधिशेष साझाकरण 80-110 मॉडल अथवा कप और कैप अधिशेष साझाकरण 60-130 मॉडल। दोनों मॉडलों के विस्तृत मूल्यांकन के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दोनों ही स्थितियों में बीमा कंपनियाँ दावों का बड़ा हिस्सा वहन करती हैं, जबकि कम दावों से उत्पन्न कोई भी अधिशेष सरकारों को लौटाया जाता है।
पिछले वर्षों का प्रदर्शन
मध्य प्रदेश 2016 से इस योजना को लागू करने में अग्रणी रहा है। आँकड़ों के अनुसार, 2023-24 में 35.18 लाख किसानों को ₹961.68 करोड़ के दावों का भुगतान किया गया। 2024-25 में 35.56 लाख लाभार्थियों को ₹275.86 करोड़ वितरित किए गए। ये आँकड़े योजना की व्यापक पहुँच और कृषि जोखिम न्यूनीकरण में इसकी भूमिका को रेखांकित करते हैं।
तकनीकी नवाचार और क्रियान्वयन
योजना वर्तमान में राज्य भर में 11 क्लस्टरों के माध्यम से संचालित है, जिनमें बीमा कंपनियों का चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से होता है। मध्य प्रदेश पारदर्शी और सटीक उपज मूल्यांकन के लिए उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग तकनीक, मौसम डेटा सिस्टम और आधुनिक डेटा प्रबंधन फ्रेमवर्क का व्यापक उपयोग कर रहा है। यह तकनीकी दृष्टिकोण फसल मूल्यांकन में मानवीय त्रुटि को कम करने और दावा निपटान को तेज़ करने में सहायक रहा है।
आम किसानों पर असर
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश एक प्रमुख कृषि राज्य है और यहाँ की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण अनिश्चित मानसून और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएँ किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ₹11,608.47 करोड़ का यह आवंटन राज्य सरकार की कृषि क्षेत्र के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आने वाले वर्षों में योजना के विस्तार और तकनीकी सुधारों के साथ, किसानों को अधिक त्वरित और पारदर्शी दावा निपटान मिलने की उम्मीद है।