क्या मध्य प्रदेश के हर खेत तक पानी पहुंचेगा? सिंचाई परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की कोशिश: सीएम मोहन यादव
सारांश
Key Takeaways
- हर खेत तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य।
- किसान कल्याण वर्ष की घोषणा।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव का व्यक्तिगत अनुभव।
- तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ पर तेजी से कार्य।
- सिंचित रकबा बढ़ाने का लक्ष्य।
भोपाल, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में कई सिंचाई परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर खेत तक पानी पहुंचे।
राजधानी में मुख्यमंत्री आवास पर किसानों को संबोधित करते हुए मोहन यादव ने कहा कि किसान हमारी पहचान हैं। किसानों का मान बढ़ाने में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्यासे खेतों तक पानी पहुंचाना हमारा प्राथमिक लक्ष्य है, और हम इसे जल्द ही पूरा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है। हमने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है ताकि प्रदेश के किसान समृद्ध और सशक्त बन सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना पर कार्य तेजी से जारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग सम्पूर्ण कृषि रकबा सिंचित हो जाएगा।
वर्तमान में मध्य प्रदेश में कृषि का सिंचित रकबा 56 लाख हेक्टेयर है, और हमारी सरकार ने इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री यादव ने यह भी कहा कि हर गांव और हर खेत तक बिजली और पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारा संकल्प है।
इस अवसर पर राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र और रायसेन जिले की भोजपुर एवं उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं किसानों ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि वे स्वयं एक किसान परिवार से हैं और खेती के लिए सिंचाई का महत्व उन्हें भलीभांति ज्ञात है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, क्षिप्रा जैसी कई नदियों का घर है और इन्हीं के कारण हमारा प्रदेश जल संपदा से समृद्ध है। ये नदियां किसानों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराती हैं, और हमारे लिए जीवन रेखा के समान हैं। हम कृषि के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के विकास में कोई कमी नहीं रख रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस