RSS के नरेंद्र ठाकुर बोले — जाति-भाषा भेदभाव खत्म हो, सामाजिक समरसता ही राष्ट्र की असली ताकत
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2025 को लखनऊ में आयोजित एक मीडिया संवाद कार्यक्रम में कहा कि हिंदू समाज में जाति, भाषा और प्रांत के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सामाजिक समरसता के बिना एक सशक्त राष्ट्र की कल्पना संभव नहीं है।
नारद जयंती पर मीडिया संवाद का आयोजन
नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में ठाकुर ने संघ की व्यापक कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य में जुटा हुआ है और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में 32 से अधिक संगठन सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। संघ की 100 वर्षों की यात्रा को असाधारण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संघर्षों और उतार-चढ़ाव से भरी रही है, फिर भी संघ का उद्देश्य भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना है।
भगवा ध्वज को गुरु मानने की परंपरा
संघ के प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि संघ व्यक्ति नहीं, बल्कि तत्व के प्रति निष्ठा रखने में विश्वास करता है। इसी भावना के अनुरूप किसी व्यक्ति के बजाय भगवा ध्वज को गुरु के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में संघ की 85,000 से अधिक दैनिक शाखाएँ और 32,000 से अधिक साप्ताहिक मिलन संचालित हो रहे हैं। वनवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक स्वयंसेवक सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।
पंच परिवर्तन — संघ की भविष्य की कार्ययोजना
ठाकुर ने बताया कि संघ 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से समाज में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके पाँच स्तंभ हैं — सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-आधारित जीवनशैली और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता। उन्होंने कहा कि कुटुंब व्यवस्था मज़बूत होगी तो समाज भी सुदृढ़ बनेगा। साथ ही उन्होंने स्वदेशी भावना के अनुरूप भाषा और वेशभूषा अपनाने पर बल दिया।
यूजीसी विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया
यूजीसी (UGC) दिशा-निर्देशों से जुड़े एक प्रश्न पर ठाकुर ने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए संघ इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हालाँकि, उन्होंने यह अवश्य जोड़ा कि किसी भी परिस्थिति में समाज में सद्भाव और एकता बनी रहनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक और शैक्षणिक नीतियों को लेकर बहस तेज़ है।
आगे की राह
गौरतलब है कि संघ की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब सामाजिक विभाजन और पहचान-आधारित राजनीति पर राष्ट्रीय विमर्श चल रहा है। नरेंद्र ठाकुर के इस संबोधन को संघ की उस दीर्घकालिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है जो समाज के हर वर्ग को एकजुट करने पर केंद्रित है।