भारत-इटली व्यापार 2029 तक 20 अरब यूरो: मोदी-मेलोनी ने रोम में जताई सहमति

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भारत-इटली व्यापार 2029 तक 20 अरब यूरो: मोदी-मेलोनी ने रोम में जताई सहमति

सारांश

रोम में मोदी-मेलोनी की वार्ता केवल व्यापार का आँकड़ा तय करने तक सीमित नहीं रही — रक्षा सह-उत्पादन रोडमैप, IMEC प्रतिबद्धता और 2027 संस्कृति वर्ष के साथ यह भारत-इटली संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की कोशिश है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 20 मई 2026 को रोम में वार्ता की।
दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब यूरो तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया।
रक्षा उत्पादों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए औद्योगिक रोडमैप पर हस्ताक्षर हुए।
इटालियन स्पेस एजेंसी और ISRO के बीच वाणिज्यिक अंतरिक्ष साझेदारी को मज़बूत करने पर सहमति।
IMEC के क्रियान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई; 2027 को 'भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष' घोषित किया गया।
AI, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और गुजरात के लोथल में समुद्री विरासत परिसर में सहयोग पर भी सहमति।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 20 मई 2026 को रोम में द्विपक्षीय वार्ता के बाद 2029 तक भारत-इटली व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के शीघ्र क्रियान्वयन को इस लक्ष्य की कुंजी बताया।

व्यापार और निवेश का नया रोडमैप

दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में आई नई गति, बढ़ते निवेश और दीर्घकालिक सहयोग को मज़बूत करने के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। संयुक्त बयान में उल्लेख किया गया कि दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष आयोजित तीन बिजनेस फोरम के आदान-प्रदान का स्वागत किया। उन्होंने रक्षा, डिजिटल, ऊर्जा परिवर्तन, बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय और इतालवी उद्योगपतियों तथा सीईओ से भी मुलाकात की।

संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया: 'दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने और इसके शीघ्र क्रियान्वयन का आह्वान किया।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत-EU एफटीए वार्ता कई वर्षों से जारी है और दोनों पक्ष अंतिम स्वरूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

रक्षा और प्रौद्योगिकी में साझेदारी

दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा उत्पादों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए औद्योगिक रोडमैप पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

संयुक्त बयान के अनुसार, भारत की प्रतिभाशाली कार्यशक्ति और इटली की तकनीकी क्षमता के तालमेल से इन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। गौरतलब है कि यह भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह यूरोपीय देशों के साथ प्रौद्योगिकी-केंद्रित साझेदारियाँ विकसित कर रहा है।

अंतरिक्ष, विज्ञान और कनेक्टिविटी

दोनों नेताओं ने इटालियन स्पेस एजेंसी और इसरो (ISRO) के बीच जारी सहयोग तथा वाणिज्यिक अंतरिक्ष साझेदारी को मज़बूत करने के प्रयासों का स्वागत किया। दोनों देशों के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बढ़ते सहयोग पर भी संतोष जताया गया।

कनेक्टिविटी के मोर्चे पर दोनों नेताओं ने IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) के क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए ठोस परियोजनाओं पर काम करने की इच्छा जताई।

सांस्कृतिक और मानवीय संबंध

दोनों देशों ने गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में सहयोग और भारत से नर्सों की भर्ती को लेकर हुए समझौतों का स्वागत किया। संयुक्त बयान में इटली में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की गई और छात्रों, शोधकर्ताओं तथा शिक्षाविदों की आवाजाही को आसान बनाने पर सहमति जताई गई।

एक महत्वपूर्ण निर्णय में दोनों देशों ने वर्ष 2027 को 'भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष' के रूप में मनाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इतालवी सरकार और जनता की ओर से मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी का आभार जताया और उन्हें सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

आगे की राह

रोम में हुई यह वार्ता भारत-इटली संबंधों को एक नई रणनीतिक दिशा देती है। 20 अरब यूरो के व्यापार लक्ष्य की प्राप्ति काफी हद तक भारत-EU एफटीए के अंतिम स्वरूप और क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगी। रक्षा, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी में हुई प्रतिबद्धताएँ इस साझेदारी को आर्थिक संबंधों से आगे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की शक्ल देती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा भारत-EU एफटीए की वार्ता की गति पर टिकी है — जो वर्षों से अधूरी है। रक्षा सह-उत्पादन रोडमैप और IMEC प्रतिबद्धता इस साझेदारी को केवल व्यापारिक नहीं, रणनीतिक बनाती है, जो भारत की यूरोप-नीति में इटली को एक विशेष स्थान देने का संकेत है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह के द्विपक्षीय लक्ष्य तब तक कागज़ पर ही रहते हैं जब तक EU स्तर पर एफटीए को अंतिम रूप नहीं मिलता। 2027 के संस्कृति वर्ष और नर्स भर्ती समझौते जैसे मानवीय कदम संबंधों में गहराई लाते हैं, लेकिन आर्थिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ठोस क्रियान्वयन तंत्र की अभी भी कमी दिखती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और इटली का 2029 तक 20 अरब यूरो व्यापार लक्ष्य क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने 20 मई 2026 को रोम में हुई वार्ता के बाद 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के शीघ्र क्रियान्वयन को आधार बनाया गया है।
मोदी-मेलोनी वार्ता में रक्षा क्षेत्र में क्या हुआ?
दोनों देशों ने रक्षा उत्पादों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए एक औद्योगिक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए और संयुक्त आशय घोषणा जारी की। यह भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति के तहत यूरोपीय भागीदारों के साथ सह-उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।
IMEC क्या है और इसमें भारत-इटली की क्या भूमिका है?
IMEC यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor एक बहुपक्षीय कनेक्टिविटी परियोजना है जो भारत को मध्य-पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ती है। रोम वार्ता में दोनों नेताओं ने IMEC के क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और ठोस कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम करने की इच्छा जताई।
भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष 2027 क्या है?
दोनों देशों ने वर्ष 2027 को 'भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष' के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसके तहत दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन संवर्धन और छात्रों व शोधकर्ताओं की आवाजाही को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसरो और इटालियन स्पेस एजेंसी के बीच क्या सहयोग तय हुआ?
दोनों नेताओं ने इटालियन स्पेस एजेंसी और ISRO के बीच जारी सहयोग को मज़बूत करने और वाणिज्यिक अंतरिक्ष साझेदारी विकसित करने पर सहमति जताई। दोनों देशों के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बढ़ते सहयोग पर भी संतोष व्यक्त किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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