79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में चीन का आह्वान: संतुलित वैश्विक स्वास्थ्य विकास और WHO की केंद्रीय भूमिका को मज़बूत करें
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में 19 मई 2026 को चीनी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के निदेशक लेई हाइछ्याओ ने आम बहस में वैश्विक स्वास्थ्य शासन सुधार पर चीन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया में सदस्य देशों के नेतृत्व का सम्मान करना, विकासशील देशों की आवाज़ों को प्राथमिकता देना और संतुलित वैश्विक स्वास्थ्य विकास सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
स्वास्थ्य को सभी नीतियों में एकीकृत करने का आग्रह
लेई हाइछ्याओ ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक एजेंडे में स्वास्थ्य की प्राथमिकता बढ़ाएँ और इसे सभी नीतियों में एकीकृत करें। उन्होंने अवधारणाओं, योजना, निवेश, संसाधन गारंटी और प्रदर्शन परिणामों — सभी स्तरों पर विविध योजना के माध्यम से स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर बल दिया।
चीन की घरेलू नीति का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि चीन स्वास्थ्य विकास को प्राथमिकता देने की रणनीति को निरंतर लागू कर रहा है और 2030 तक 80 वर्ष की औसत जीवन प्रत्याशा के साथ एक स्वस्थ चीन के निर्माण में निर्णायक प्रगति का लक्ष्य रखा है।
वैश्विक स्वास्थ्य में चीन का योगदान
लेई ने वैश्विक स्वास्थ्य में चीन की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले 60 वर्षों में चीन ने विदेशों में 31,000 चिकित्सा कर्मी भेजे हैं, जिन्होंने 30 करोड़ रोगियों का उपचार किया है। उन्होंने मलेरिया के उपचार में प्रयुक्त आर्टेमिसिनिन के आविष्कार का भी उल्लेख किया, जिसे वैश्विक स्वास्थ्य समानता में 'चीनी योगदान' के रूप में प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने विकसित देशों से अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं और दायित्वों को पूरा करने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि वैश्विक स्वास्थ्य विकास में निवेश बढ़ाना जारी रहना चाहिए।
WHO की केंद्रीय भूमिका का समर्थन
चीन ने बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन में केंद्रीय और समन्वयकारी भूमिका का दृढ़ समर्थन किया। लेई ने कहा कि चीन विभिन्न पक्षों के साथ मिलकर अधिक न्यायसंगत, तर्कसंगत और कुशल वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
ताइवान पर चीन का पक्ष
सभा में लेई ने ताइवान के मुद्दे पर भी चीन का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विश्व में केवल एक ही चीन है और ताइवान उसका अभिन्न अंग है, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 2758 और विश्व स्वास्थ्य सभा के प्रस्ताव 25.1 द्वारा स्थापित है।
उन्होंने कहा कि ताइवान को विश्व स्वास्थ्य सभा में भाग न देने का निर्णय केंद्र सरकार का है और इसे अधिकांश सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त है। कुछ देशों द्वारा ताइवान के संदर्भ में दिए गए बयानों को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए उन देशों से चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करने का आग्रह किया।
आगे की दिशा
79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में उठाए गए ये मुद्दे वैश्विक स्वास्थ्य शासन के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। विकासशील देशों की भागीदारी और निवेश की जवाबदेही पर चीन का यह रुख आने वाले सत्रों में बहस का केंद्र बना रहेगा।