चीन की अपील: विकासशील देशों की चिंताओं को यूएन सुधार में प्रमुखता दी जाए
सारांश
Key Takeaways
- यूएन सुधार में विकासशील देशों की चिंताओं का महत्व।
- सभी सदस्य देशों की समानता का प्रतिनिधित्व।
- लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना।
- संविधानिक और पारदर्शी सुधार की प्रक्रिया।
- सतत विकास लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता।
बीजिंग, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र में चीनी उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेइ ने 6 अप्रैल को यूएन महासभा की 'यूएन 80वीं वर्षगांठ सुधार प्रस्ताव' (यूएन80) ब्रीफिंग में भाषण देते हुए कहा कि चीन उरुग्वे द्वारा प्रस्तुत '77 देशों का समूह और चीन' के बयान का समर्थन करता है।
उम्मीद है कि यूएन सुधार विकासशील देशों की चिंताओं को महत्वपूर्ण मानते हुए सदस्य देशों की समानता को एकत्रित करके सभी सदस्य देशों के साझा संकल्प का प्रतिनिधित्व करेगा, ताकि सुधार का परिणाम ऐतिहासिक कसौटी पर खरा उतरे।
सुन लेइ ने कहा कि वर्तमान में यूएन सुधार स्थिरता से प्रगति कर रहा है और कई चरणबद्ध उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। उम्मीद है कि सभी सदस्य देश और सचिवालय प्रारंभिक आकांक्षा को बनाए रखते हुए लागू की गई उपलब्धियों को समावेशी और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाएंगे।
यूएन जनसंख्या कोष और यूएन महिला के संभावित विलय पर चर्चा करते हुए सुन लेइ ने कहा कि संबंधित सुधार को यूएन प्रोग्राम देशों की आवश्यकताओं और चिंताओं का उत्तर देना चाहिए, साथ ही राष्ट्रीय स्वामित्व और नेतृत्व के प्रमुख सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, और दोनों संस्थाओं के मानदंडों तथा कार्रवाई के प्राधिकरण को सुरक्षित रखना चाहिए।
इसी के साथ, सुधार को लैंगिक समानता, महिला सशक्तीकरण, लिंग और प्रजनन स्वास्थ्य, तथा आबादी के गुणवत्तापूर्ण विकास जैसे क्षेत्रों में सदस्य देशों का समर्थन बढ़ाना चाहिए ताकि विकासशील देशों को सतत विकास लक्ष्य पूरा करने में सहायता मिल सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)