दिग्विजय सिंह ने एनडीए सरकार की नीयत पर उठाए सवाल, 2010 में विरोध और अब समर्थन का रहस्य
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष के सांसदों ने एनडीए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब दो साल पहले हमारा समर्थन था तो अब ये क्यों बदल रहे हैं? सरकार की आदत है देश के साथ धोखा देना।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कहा, "2010 में इस विधेयक का भाजपा ने राज्यसभा में विरोध किया था और इसके खिलाफ वोट दिया था। तब ये बातें कहां गई थीं? यह अस्थिर सोच का परिचायक है। जब आपने दो साल पहले हम सभी से समर्थन लिया, तो इसे बदलने का क्या मतलब है?"
कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने कहा, "उत्तर-दक्षिण विभाजन का तो कोई सवाल नहीं, लेकिन जिस तरह से परिसीमन का प्रस्ताव लाया जा रहा है, उससे गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। 1976 से जनगणना के आंकड़ों के इस्तेमाल पर रोक लगी हुई है और भाजपा सरकारों समेत सभी बाद की सरकारों ने इसे जारी रखा है।"
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा, "पूरा विपक्ष 2023 में महिला आरक्षण के समर्थन में था। हम चाहते थे कि 2024 में 543 सीटों पर महिलाओं को आरक्षण मिले। 30 महीने के बाद कह रहे हैं कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके आरक्षण देंगे। भाजपा की नीयत में आज भी खोट है, आज भी उन्होंने परिसीमन का पेंच लगाया है।"
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कहा, "सभी विपक्षी दलों ने मिलकर तय किया है कि हम महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं। 2023 में जो प्रस्ताव पारित हुआ था, हम उसके साथ हैं, लेकिन परिसीमन के जरिए वे इसमें साजिश करके सभी क्षेत्रों को तितर-बितर करना चाहते हैं।"
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने परिसीमन विधेयक पर कहा, "हम इसके खिलाफ हैं। सभी विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। हम इसके खिलाफ वोट देंगे। सरकार की मंशा साफ नहीं है। यह एक खराब योजना है, विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों पर इसका असर होगा।"
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "महिला आरक्षण बहुत जरूरी है क्योंकि इतने वर्षों तक समान अधिकार का वादा करने के बावजूद, महिलाओं को राजनीति से दूर रखा गया है। आरक्षण बिल पास होने के बावजूद लोकसभा में केवल 13 प्रतिशत महिलाएं प्रतिनिधि हैं।"