भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की बिकवाली में कमी, स्थिरता के संकेत; डीआईआई का समर्थन बना हुआ

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भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की बिकवाली में कमी, स्थिरता के संकेत; डीआईआई का समर्थन बना हुआ

सारांश

भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की बिकवाली में कमी आई है, जिससे स्थिरता के संकेत मिलने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डीआईआई बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं, जबकि रुपये में भी मजबूती देखी गई है।

Key Takeaways

  • एफआईआई की बिकवाली में कमी से बाजार में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं।
  • डीआईआई अभी भी बाजार के लिए एक मजबूत सहारा बने हुए हैं।
  • रुपये में मजबूती देखने को मिली है।
  • भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती हैं।
  • अगले हफ्ते निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर रहेगी।

नई दिल्ली, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली के बाद अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं।

बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह के अंत में एफआईआई ने तीन कारोबारी सत्रों में शुद्ध खरीदार के रूप में वापसी की, जिससे बाजार में सुधार को बल मिला और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ा।

हालांकि, पूरे सप्ताह के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि एफआईआई का कुल निवेश अभी भी लगभग २५० करोड़ रुपए नकारात्मक रहा है। इसका मतलब है कि स्थायी सुधार के लिए मजबूत और निरंतर निवेश की आवश्यकता है।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) का आउटफ्लो इस अवधि में लगभग ६,३०० करोड़ रुपए रहा। फिर भी, विश्लेषकों का मानना है कि डीआईआई अब भी बाजार के लिए एक स्थिर सहारा बने हुए हैं और लंबे समय में बाजार को मजबूती प्रदान करते रहेंगे।

इस सप्ताह रुपये में भी मजबूती देखी गई। भारतीय मुद्रा ९३.२४ के स्तर पर रही, जो लगभग ०.१५ प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव में कमी के आसार ने डॉलर की मांग को घटाया, जिससे रुपये को समर्थन मिला।

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि बाजार का सकारात्मक माहौल एफआईआई के निवेश और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की आशाओं से मजबूत हुआ है, जिससे घरेलू बाजारों में पूंजी का प्रवाह बढ़ा है।

अतिरिक्त रूप से, पिछले ४८ घंटों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत के आयात बिल पर दबाव कम किया है, जिससे रुपये को और मजबूती मिली।

वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज गिरावट तब आई जब ईरान ने घोषणा की कि युद्धविराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।

रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम के बाद ईरान के विदेश मंत्री के बयान से तेल की कीमतों में लगभग १० प्रतिशत तक गिरावट आई।

विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान में रुपये को समर्थन मिल रहा है, लेकिन इसकी मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि भू-राजनीतिक हालात कैसे बदलते हैं और कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, आगामी हफ्ते में बाजार का रुख समाचारों पर अधिक निर्भर करेगा, लेकिन माहौल फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। निवेशकों की नजर विशेष रूप से अमेरिका-ईरान वार्ता के परिणामों पर रहेगी।

Point of View

जो एक सकारात्मक संकेत है। डीआईआई का समर्थन भी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रहा है। आगे बढ़ते हुए, निवेशकों को भू-राजनीतिक घटनाओं की निगरानी करनी होगी।
NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

एफआईआई की बिकवाली में कमी का क्या मतलब है?
एफआईआई की बिकवाली में कमी का मतलब है कि विदेशी निवेशक अब भारतीय शेयर बाजार में पुन: निवेश करने के लिए इच्छुक हैं, जो बाजार में स्थिरता दर्शाता है।
डीआईआई का बाजार पर क्या प्रभाव है?
डीआईआई का बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि वे स्थिर निवेश प्रदान करते हैं, जो बाजार को मजबूती देता है।
रुपये में मजबूती का क्या कारण है?
रुपये में मजबूती का कारण डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है, जो भारत के आयात बिल को कम करता है।
क्या बाजार का रुख बदल सकता है?
हाँ, बाजार का रुख समाचारों और भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगा।
अगले हफ्ते बाजार में क्या उम्मीदें हैं?
अगले हफ्ते बाजार में संभावित सुधार की उम्मीद है, लेकिन यह समाचारों पर निर्भर करेगा।
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