कश्मीर घाटी में 5.3 तीव्रता का भूकंप: जानें इसकी वजह और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कश्मीर घाटी में शनिवार को रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसका केंद्र अफगानिस्तान के बदाखशान प्रांत में स्थित था। घरों में पंखे और अन्य सामान हिलते हुए देख लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, अभी तक भूकंप से किसी प्रकार के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह 8:24 बजे रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से 190 किलोमीटर गहराई पर था। इसके निर्देशांक 36.55 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.92 डिग्री पूर्वी देशांतर हैं। भूकंप विज्ञान के अनुसार, कश्मीर घाटी भूकंप की संभावित जोन में स्थित है।
कश्मीर में पूर्व में भूकंपों ने खासा नुकसान पहुंचाया है। 8 अक्टूबर, 2005 को जम्मू-कश्मीर में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 80,000 से अधिक लोगों की जान गई थी।
इस भूकंप का केंद्र पाकिस्तान के अधिग्रहित कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद शहर में था, जो पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया था। घाटी के बारामूला जिले में उरी शहर को भी 2005 के भूकंप में भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
कश्मीर का इतिहास विनाशकारी भूकंपों से भरा हुआ है, क्योंकि यह एक उच्च-भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। इसके इतिहास में 1555 और 1885 के भूकंप जैसी प्रमुख घटनाएं शामिल हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और हजारों लोगों की जान ले ली थी।
30 मई 1885 को बारामूला में आए भूकंप की तीव्रता 6.8 थी, जिसके कारण श्रीनगर और बारामूला क्षेत्र में 3,000 से अधिक लोगों की मौत हुई और इमारतों को गंभीर क्षति पहुंची।
भूकंप के विशेषज्ञों और संरचनात्मक इंजीनियरों ने कश्मीर में भूकंप-रोधी घरों और इमारतों के निर्माण की सिफारिश की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमेंट-कंक्रीट की बनी इमारतें भूकंप के झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, क्योंकि इनकी झटकों को सहन करने की क्षमता कम होती है, जिसके कारण ये ढह जाती हैं।