बच्चों में एनीमिया: मस्तिष्क और शारीरिक विकास पर असर, NHM की सलाह और बचाव के उपाय
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आयरन की कमी यानी एनीमिया मस्तिष्क के विकास और सीखने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन में पर्याप्त पोषण न मिलने से बच्चे शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर पिछड़ सकते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण चेतावनी है जब भारत में बाल एनीमिया एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।
एनीमिया बच्चों को कैसे प्रभावित करता है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आयरन की कमी होने पर बच्चे कमज़ोर, सुस्त और कम सक्रिय हो जाते हैं। लंबे समय तक एनीमिया बने रहने से बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और समग्र मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह समस्या केवल शारीरिक कमज़ोरी तक सीमित नहीं रहती — स्कूली प्रदर्शन और सामाजिक विकास भी प्रभावित होते हैं।
आयरन युक्त आहार: NHM की सिफारिशें
नेशनल हेल्थ मिशन ने बच्चों के दैनिक भोजन में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी है। इनमें हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दाल, चना, गुड़, अनार और खजूर प्रमुख हैं। इसके साथ ही, विटामिन-C से भरपूर फल जैसे संतरा, आँवला और नींबू शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
पूरक आहार और IFA सिरप की भूमिका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को छह महीने की उम्र के बाद समय पर पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। माँ के दूध के साथ पौष्टिक आहार बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करता है।
NHM ने यह भी स्पष्ट किया है कि 6 से 59 माह तक के बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सिरप की पूरक खुराक अवश्य दी जानी चाहिए। यह खुराक शरीर में आयरन की कमी को दूर करने और एनीमिया की रोकथाम में प्रभावी मानी जाती है।
माता-पिता के लिए ज़रूरी सावधानियाँ
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के खानपान पर शुरुआत से ही ध्यान देना आवश्यक है। संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जाँच और समय पर पूरक खुराक — ये तीन कदम मिलकर बच्चों को एनीमिया जैसी गंभीर समस्या से सुरक्षित रख सकते हैं। आने वाले समय में यदि सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इन दिशानिर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो बाल एनीमिया के आँकड़ों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।