बच्चों में एनीमिया: मस्तिष्क और शारीरिक विकास पर असर, NHM की सलाह और बचाव के उपाय

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बच्चों में एनीमिया: मस्तिष्क और शारीरिक विकास पर असर, NHM की सलाह और बचाव के उपाय

सारांश

आयरन की कमी यानी एनीमिया बच्चों के मस्तिष्क विकास और सीखने की क्षमता को बाधित कर सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन ने 6 से 59 माह के बच्चों के लिए IFA सिरप और हरी सब्जियाँ, दाल, अनार जैसे आयरन युक्त आहार को ज़रूरी बताया है।

मुख्य बातें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया मस्तिष्क विकास और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
आयरन की कमी से बच्चे कमज़ोर, सुस्त और मानसिक रूप से पिछड़ सकते हैं — याददाश्त और एकाग्रता पर भी असर पड़ता है।
हरी पत्तेदार सब्जियाँ , दाल , गुड़ , अनार और विटामिन-C युक्त फल आयरन अवशोषण बढ़ाने में सहायक हैं।
6 से 59 माह के बच्चों को चिकित्सकीय सलाह पर आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सिरप देना अनिवार्य बताया गया है।
बच्चों को छह महीने की उम्र के बाद पूरक आहार शुरू करना और माँ के दूध के साथ पौष्टिक भोजन देना ज़रूरी है।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आयरन की कमी यानी एनीमिया मस्तिष्क के विकास और सीखने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन में पर्याप्त पोषण न मिलने से बच्चे शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर पिछड़ सकते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण चेतावनी है जब भारत में बाल एनीमिया एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।

एनीमिया बच्चों को कैसे प्रभावित करता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आयरन की कमी होने पर बच्चे कमज़ोर, सुस्त और कम सक्रिय हो जाते हैं। लंबे समय तक एनीमिया बने रहने से बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और समग्र मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह समस्या केवल शारीरिक कमज़ोरी तक सीमित नहीं रहती — स्कूली प्रदर्शन और सामाजिक विकास भी प्रभावित होते हैं।

आयरन युक्त आहार: NHM की सिफारिशें

नेशनल हेल्थ मिशन ने बच्चों के दैनिक भोजन में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी है। इनमें हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दाल, चना, गुड़, अनार और खजूर प्रमुख हैं। इसके साथ ही, विटामिन-C से भरपूर फल जैसे संतरा, आँवला और नींबू शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

पूरक आहार और IFA सिरप की भूमिका

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को छह महीने की उम्र के बाद समय पर पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। माँ के दूध के साथ पौष्टिक आहार बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करता है।

NHM ने यह भी स्पष्ट किया है कि 6 से 59 माह तक के बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सिरप की पूरक खुराक अवश्य दी जानी चाहिए। यह खुराक शरीर में आयरन की कमी को दूर करने और एनीमिया की रोकथाम में प्रभावी मानी जाती है।

माता-पिता के लिए ज़रूरी सावधानियाँ

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के खानपान पर शुरुआत से ही ध्यान देना आवश्यक है। संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जाँच और समय पर पूरक खुराक — ये तीन कदम मिलकर बच्चों को एनीमिया जैसी गंभीर समस्या से सुरक्षित रख सकते हैं। आने वाले समय में यदि सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इन दिशानिर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो बाल एनीमिया के आँकड़ों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये दिशानिर्देश ज़मीन पर कितने पहुँचते हैं — खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ कुपोषण सबसे गहरा है। IFA सिरप की उपलब्धता और वितरण में अभी भी बड़े अंतराल हैं, जो सरकारी आँकड़ों में भी दर्ज हैं। सिर्फ जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं — जब तक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत नहीं होती, बाल एनीमिया के आँकड़े बदलने की उम्मीद कम है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चों में एनीमिया क्या होता है और यह कितना गंभीर है?
एनीमिया शरीर में आयरन की कमी से होने वाली स्थिति है जिसमें रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। NHM के अनुसार, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह मस्तिष्क विकास और सीखने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
बच्चों में एनीमिया से बचाव के लिए कौन से खाद्य पदार्थ खिलाएँ?
NHM ने हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दाल, चना, गुड़, अनार और खजूर को आयरन के अच्छे स्रोत बताया है। साथ ही संतरा, आँवला और नींबू जैसे विटामिन-C युक्त फल शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाते हैं।
IFA सिरप किन बच्चों को और कब दिया जाना चाहिए?
NHM के अनुसार 6 से 59 माह तक के बच्चों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सिरप की पूरक खुराक दी जानी चाहिए। यह एनीमिया की रोकथाम और आयरन की कमी दूर करने में सहायक है।
बच्चे को पूरक आहार कब से शुरू करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे को छह महीने की उम्र के बाद माँ के दूध के साथ पूरक आहार देना शुरू करना चाहिए। यह बच्चे को आवश्यक पोषण देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने में मदद करता है।
एनीमिया का बच्चों के मानसिक विकास पर क्या असर पड़ता है?
लंबे समय तक एनीमिया रहने से बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता कमज़ोर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्कूली प्रदर्शन और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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