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संतुलित आहार से एनीमिया पर काबू, जानें कौन-सी चीजें खून की कमी दूर करती हैं

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संतुलित आहार से एनीमिया पर काबू, जानें कौन-सी चीजें खून की कमी दूर करती हैं

सारांश

एनीमिया भारत में विशेषकर महिलाओं और बच्चों में एक आम समस्या है। संतुलित आहार के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। पालक, दालें, फल और नट्स जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ आयरन और विटामिन की कमी दूर करने में मदद करते हैं।

मुख्य बातें

एनीमिया के मुख्य लक्षण: थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और चेहरे की पीलापन आयरन की कमी से होते हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) संतुलित आहार को एनीमिया से बचाव का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका मानता है।
पालक, सरसों का साग, दालें, अनार और अलसी के बीज आयरन और विटामिन सी के प्रमुख प्राकृतिक स्रोत हैं।
महिलाएँ, गर्भवती माताएँ और बढ़ते बच्चे को विशेष रूप से पोषक आहार की आवश्यकता होती है।
बाजार के महँगे सप्लीमेंट्स की जगह मौसमी फल-सब्जियों को प्राथमिकता दें।

नई दिल्ली, 10 मई। एनीमिया भारत में विशेषकर महिलाओं और बच्चों के बीच एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बन गई है। थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कठिनाई और चेहरे की पीलापन — ये सभी लक्षण शरीर में आयरन और विटामिन की कमी का संकेत देते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही पोषण वाले आहार को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करके इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

संतुलित आहार एनीमिया का सस्ता समाधान

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार, नियमित रूप से संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करने से शरीर में आयरन, विटामिन और अन्य महत्वपूर्ण खनिज की कमी नहीं होती। यह न केवल एनीमिया से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य में सुधार लाता है। NHM का मत है कि बाजार में मिलने वाले महँगे सप्लीमेंट्स की जगह प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मौसमी फल-सब्जियों का नियमित उपयोग करें और आहार में विविधता बनाए रखें। महिलाओं, गर्भवती माताओं और बढ़ते बच्चों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

एनीमिया दूर करने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थ

विशेषज्ञ सुझाते हैं कि अपनी दैनिक थाली में निम्नलिखित पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें:

हरी पत्तेदार सब्जियाँ: पालक, सरसों का साग, मेथी और बथुआ आयरन के उत्कृष्ट प्राकृतिक स्रोत हैं। इन्हें नियमित रूप से खाने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है और खून की कमी दूर होती है। इन्हें हल्का पकाकर या कच्चे सलाद के रूप में लेना अधिक लाभकारी है।

प्रोटीन युक्त आहार: दालें, सोयाबीन, छोले और राजमा शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और हीमोग्लोबिन निर्माण में सहायता करते हैं। शाकाहारी व्यक्तियों के लिए दाल-चावल के साथ छोले या राजमा का संयोजन विशेषकर प्रभावी है।

पोषक फल: केला, खजूर, पपीता, संतरा और अनार विटामिन सी और आयरन दोनों से समृद्ध होते हैं। विटामिन सी शरीर द्वारा आयरन के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए फलों और सब्जियों को एक साथ खाना अधिक प्रभावी है।

नट्स और बीज: अलसी के बीज, कद्दू के बीज और अखरोट मैग्नीशियम और अन्य आवश्यक खनिजों का अच्छा स्रोत हैं। प्रतिदिन एक मुट्ठी नट्स का सेवन समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

दुग्ध उत्पाद: दूध, दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन के प्रमुख स्रोत हैं। ये हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और समग्र पोषण में योगदान देते हैं।

आहार में विविधता का महत्व

स्वास्थ्य विशेषज्ञ जोर देते हैं कि एनीमिया से बचाव के लिए केवल एक ही खाद्य पदार्थ पर निर्भर न रहें। विभिन्न रंगों की सब्जियाँ, मौसमी फल और प्रोटीन के विभिन्न स्रोत शामिल करें। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में कुपोषण और खून की कमी की समस्या व्यापक है। नियमित स्वास्थ्य जाँच और संतुलित आहार दोनों मिलकर एनीमिया को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समाधान अक्सर महँगे चिकित्सा हस्तक्षेपों में नहीं, बल्कि सस्ते और सुलभ खाद्य पदार्थों में निहित है। यह ऐसे समय में विशेषकर महत्वपूर्ण है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट सीमित है और ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण सेवाएँ अपर्याप्त हैं। हरी सब्जियाँ और दालें, जो भारतीय रसोई के मूल आधार हैं, वास्तव में शक्तिशाली एनीमिया-विरोधी उपकरण हैं। समस्या यह नहीं है कि समाधान अस्पष्ट है; समस्या यह है कि पोषण संबंधी साक्षरता और आहार विविधता तक पहुँच असमान रूप से वितरित है। जब तक हम सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को पोषण शिक्षा और स्कूल-आधारित पूरक कार्यक्रमों के साथ जोड़ते हैं, तब तक सुर्खियाँ केवल व्यक्तिगत आहार विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करेंगी, न कि अंतर्निहित असमानताओं पर।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनीमिया के मुख्य लक्षण क्या हैं?
एनीमिया के मुख्य लक्षणों में थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कठिनाई और चेहरे की पीलापन शामिल हैं। ये सभी लक्षण शरीर में आयरन और विटामिन की कमी के कारण होते हैं।
एनीमिया से बचाव का सबसे सस्ता तरीका क्या है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार, संतुलित और पौष्टिक आहार एनीमिया से बचाव का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। बाजार के महँगे सप्लीमेंट्स की जगह प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आयरन से भरपूर कौन-से खाद्य पदार्थ हैं?
पालक, सरसों का साग, मेथी, बथुआ, दालें, सोयाबीन, छोले, राजमा, खजूर, अनार, अलसी के बीज और कद्दू के बीज आयरन के उत्कृष्ट प्राकृतिक स्रोत हैं।
विटामिन सी एनीमिया के इलाज में कैसे मदद करता है?
विटामिन सी शरीर द्वारा आयरन के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतरा, अनार और पपीता जैसे विटामिन सी युक्त फलों को आयरन युक्त सब्जियों के साथ खाने से आयरन का अवशोषण बेहतर होता है।
गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से पोषक आहार की आवश्यकता होती है। उन्हें नियमित रूप से हरी सब्जियाँ, दालें, फल, दूध और पनीर का सेवन करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जाँच और संतुलित आहार दोनों एनीमिया को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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