पॉक्सो केस में बंदी भागीरथ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, वकील का सरेंडर का दावा — पुलिस ने कहा गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भागीरथ को 17 मई 2026 को मजिस्ट्रेट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उन पर एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस बीच, उनके वकील और साइबराबाद पुलिस के बीच इस बात को लेकर विवाद छिड़ गया है कि भागीरथ की हिरासत 'गिरफ्तारी' थी या 'स्वेच्छा से सरेंडर'।
वकील का दावा: सरेंडर था, गिरफ्तारी नहीं
भागीरथ के वकील करुणा सागर ने रविवार को दावा किया कि उनके मुवक्किल को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि वे खुद एसओटी साइबराबाद पुलिस के सामने स्वेच्छा से उपस्थित हुए और जांच में पूरा सहयोग किया। वकील ने कहा, 'स्वेच्छा से पेश होने और सहयोग करने को 'गिरफ्तारी' के रूप में पेश करना भ्रामक है और इससे गलत सार्वजनिक धारणा बन रही है।' उन्होंने मीडिया और जनता से अपील की कि स्वेच्छा से आत्मसमर्पण और हिरासत में गिरफ्तारी के बीच का कानूनी अंतर समझें।
पुलिस का पक्ष: विश्वसनीय सूचना पर हिरासत में लिया
साइबराबाद पुलिस ने शनिवार देर रात जारी बयान में स्पष्ट किया कि भागीरथ को 16 मई की रात करीब 8:15 बजे नरसिंगी थाना क्षेत्र के मंचिरेवुला स्थित टेक पार्क के पास विश्वसनीय सूचना के आधार पर एसओटी टीम ने हिरासत में लिया और पेट बशीराबाद थाने ले गई। साइबराबाद पुलिस आयुक्त एम. रमेश के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और मेडिकल जांच के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
पुलिस आयुक्त रमेश ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर 8 मई को पेट बशीराबाद थाने में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(2)(एम) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(1) सहपठित धारा 6 जोड़ी गई, जो गंभीर यौन अपराधों से संबंधित हैं।
तेलंगाना हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया
यह घटनाक्रम तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा भागीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार किए जाने के एक दिन बाद सामने आया। न्यायमूर्ति टी. माधवी देवी ने पीड़िता का बयान देखने के बाद किसी भी अंतरिम राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि अदालत का यह रुख मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
केंद्रीय मंत्री का बयान और प्रतिशिकायत
केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि उनके बेटे को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि वह दो वकीलों की मौजूदगी में खुद पेट बशीराबाद थाने पहुंचे थे। इसके अलावा, आरोपी पक्ष की ओर से करीमनगर में एक प्रतिशिकायत भी दर्ज कराई गई है, जिसमें पीड़िता के परिवार पर ₹5 करोड़ की उगाही की कोशिश का आरोप लगाया गया है। इस पूरे प्रकरण में कानूनी और राजनीतिक पहलू दोनों उलझे हुए हैं और आगे की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।