पॉक्सो मामले में साई भागीरथ ने किया सरेंडर, BJP बोली — कानून का होगा सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ को 17 मई 2026 को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। इस गिरफ्तारी के बाद हैदराबाद की राजनीति में हलचल मच गई है और विभिन्न दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्पष्ट किया है कि पार्टी की ओर से किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा।
भाजपा का रुख: न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास
भाजपा नेता और हाई कोर्ट वकील कृष्णकांत पोथिरेड्डी ने कहा, 'जैसा कि शनिवार को बंदी संजय कुमार ने कहा था, साई भागीरथ ने कानूनी प्रक्रिया और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए खुद को पुलिस के हवाले कर दिया है। शुरू से ही हमारा रुख स्पष्ट रहा है कि हम संविधान, कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं।'
दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी इसी लाइन को दोहराया: 'कानून अपना काम करेगा। हमारी तरफ से कोई बचाव या दखल नहीं होगा। बंदी संजय कुमार ने खुद अपने बेटे से सरेंडर करने को कहा है, जो एक अच्छी बात है।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया: स्वागत के साथ सवाल भी
तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) नेता एम. वर लक्ष्मी ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए कहा कि बंदी संजय का दावा है कि वे स्वयं अपने बेटे को पुलिस स्टेशन ले गए, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने उसे गिरफ्तार किया। इस विरोधाभास ने मामले में नया पेच खड़ा कर दिया है।
तेलंगाना जन समिति (TJS) के संस्थापक एम. कोडंडाराम ने गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए कहा, 'कानून किसी नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाने की मनाही करता है। यह गंभीर अपराध है। साई भागीरथ अपने पिता के पद का गलत इस्तेमाल कर रहा था और लोगों को धमकाने व दबाव डालने की कोशिश कर रहा था। कानून सबके लिए बराबर है।'
BRS की माँग: मंत्री को हटाओ
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) ने माँग की है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही सत्तारूढ़ दल पर संस्थागत दबाव बनाने के आरोप लगा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज यह मामला एक नाबालिग से जुड़ा है और गंभीर प्रकृति का बताया जा रहा है। गौरतलब है कि किसी केंद्रीय मंत्री के परिवार से जुड़े ऐसे मामले में सरेंडर की घटना राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से असाधारण मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कानूनी कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी।
आगे क्या होगा
साई भागीरथ की गिरफ्तारी के बाद अब अदालती प्रक्रिया और जाँच का दायरा तय होना बाकी है। BRS की माँग को देखते हुए यह देखना होगा कि केंद्र सरकार मंत्री के पद को लेकर क्या निर्णय लेती है। राजनीतिक दबाव के बीच पुलिस और न्यायपालिका पर निष्पक्ष जाँच का दायित्व है।