पॉक्सो मामले में साई भागीरथ ने किया सरेंडर, BJP बोली — कानून का होगा सम्मान

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पॉक्सो मामले में साई भागीरथ ने किया सरेंडर, BJP बोली — कानून का होगा सम्मान

सारांश

केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ ने पॉक्सो मामले में 17 मई को सरेंडर किया। BJP ने हस्तक्षेप से इनकार किया, जबकि BRS ने मंत्री को तत्काल हटाने की माँग की। विपक्ष ने गिरफ्तारी का स्वागत किया, लेकिन सरेंडर और गिरफ्तारी के दावों में विरोधाभास पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ ने 17 मई 2026 को पॉक्सो मामले में पुलिस के समक्ष सरेंडर किया।
भाजपा नेता कृष्णकांत पोथिरेड्डी और प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा — पार्टी की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं होगा, कानून अपना काम करेगा।
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी.
रामाराव ने निष्पक्ष जाँच के लिए बंदी संजय कुमार को तत्काल मंत्रिपद से हटाने की माँग की।
वर लक्ष्मी ने सरेंडर और गिरफ्तारी के दावों में विरोधाभास पर सवाल उठाया।
कोडंडाराम ने गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए कहा — कानून सबके लिए बराबर है।

केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ को 17 मई 2026 को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। इस गिरफ्तारी के बाद हैदराबाद की राजनीति में हलचल मच गई है और विभिन्न दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्पष्ट किया है कि पार्टी की ओर से किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा।

भाजपा का रुख: न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास

भाजपा नेता और हाई कोर्ट वकील कृष्णकांत पोथिरेड्डी ने कहा, 'जैसा कि शनिवार को बंदी संजय कुमार ने कहा था, साई भागीरथ ने कानूनी प्रक्रिया और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए खुद को पुलिस के हवाले कर दिया है। शुरू से ही हमारा रुख स्पष्ट रहा है कि हम संविधान, कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं।'

दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी इसी लाइन को दोहराया: 'कानून अपना काम करेगा। हमारी तरफ से कोई बचाव या दखल नहीं होगा। बंदी संजय कुमार ने खुद अपने बेटे से सरेंडर करने को कहा है, जो एक अच्छी बात है।'

विपक्ष की प्रतिक्रिया: स्वागत के साथ सवाल भी

तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) नेता एम. वर लक्ष्मी ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए कहा कि बंदी संजय का दावा है कि वे स्वयं अपने बेटे को पुलिस स्टेशन ले गए, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने उसे गिरफ्तार किया। इस विरोधाभास ने मामले में नया पेच खड़ा कर दिया है।

तेलंगाना जन समिति (TJS) के संस्थापक एम. कोडंडाराम ने गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए कहा, 'कानून किसी नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाने की मनाही करता है। यह गंभीर अपराध है। साई भागीरथ अपने पिता के पद का गलत इस्तेमाल कर रहा था और लोगों को धमकाने व दबाव डालने की कोशिश कर रहा था। कानून सबके लिए बराबर है।'

BRS की माँग: मंत्री को हटाओ

भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) ने माँग की है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही सत्तारूढ़ दल पर संस्थागत दबाव बनाने के आरोप लगा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज यह मामला एक नाबालिग से जुड़ा है और गंभीर प्रकृति का बताया जा रहा है। गौरतलब है कि किसी केंद्रीय मंत्री के परिवार से जुड़े ऐसे मामले में सरेंडर की घटना राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से असाधारण मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कानूनी कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी।

आगे क्या होगा

साई भागीरथ की गिरफ्तारी के बाद अब अदालती प्रक्रिया और जाँच का दायरा तय होना बाकी है। BRS की माँग को देखते हुए यह देखना होगा कि केंद्र सरकार मंत्री के पद को लेकर क्या निर्णय लेती है। राजनीतिक दबाव के बीच पुलिस और न्यायपालिका पर निष्पक्ष जाँच का दायित्व है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सत्ता और जवाबदेही के बीच की पुरानी कशमकश का नया अध्याय है। BJP का 'कानून अपना काम करेगा' वाला बयान सुनने में ठीक लगता है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि जाँच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव कितना पड़ता है — यह तब स्पष्ट होगा जब चार्जशीट दाखिल होगी। BRS की मंत्री को हटाने की माँग तार्किक है, क्योंकि हितों के टकराव की आशंका को दूर करना जाँच की विश्वसनीयता के लिए ज़रूरी है। सरेंडर और गिरफ्तारी के परस्पर विरोधी दावे यह भी बताते हैं कि कथानक पर नियंत्रण की लड़ाई कानूनी प्रक्रिया से पहले ही शुरू हो चुकी है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साई भागीरथ पॉक्सो मामला क्या है?
केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत एक नाबालिग से जुड़े गंभीर मामले में आरोप हैं। 17 मई 2026 को उन्होंने हैदराबाद पुलिस के समक्ष सरेंडर किया।
BJP ने इस गिरफ्तारी पर क्या कहा?
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी की ओर से किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा। भाजपा नेता कृष्णकांत पोथिरेड्डी और प्रवक्ता आरपी सिंह दोनों ने कहा कि पार्टी संविधान और न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास रखती है।
BRS ने क्या माँग की है?
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव ने माँग की है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए।
सरेंडर और गिरफ्तारी के दावों में क्या विरोधाभास है?
TRS नेता एम. वर लक्ष्मी ने बताया कि बंदी संजय कुमार का दावा है कि वे स्वयं बेटे को पुलिस स्टेशन ले गए, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने साई भागीरथ को गिरफ्तार किया। यह परस्पर विरोधी दावा मामले में एक नई बहस खड़ी कर रहा है।
पॉक्सो अधिनियम के तहत यह मामला कितना गंभीर है?
पॉक्सो (POCSO) अधिनियम नाबालिगों के यौन शोषण के मामलों में कड़ी सज़ा का प्रावधान करता है। TJS संस्थापक एम. कोडंडाराम के अनुसार, साई भागीरथ पर अपने पिता के पद का दुरुपयोग कर लोगों को धमकाने का भी आरोप है।
राष्ट्र प्रेस
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