पॉक्सो केस: के. कविता ने PM मोदी को पत्र लिखकर बंडी संजय कुमार को मंत्री पद से हटाने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता के. कविता ने 16 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंडी संजय कुमार को तत्काल मंत्री पद से हटाने की मांग की है। उनके अनुसार, बंडी संजय कुमार के पुत्र भागीरथ के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज है, और ऐसे में मंत्री का पद पर बने रहना जांच की निष्पक्षता को खतरे में डालता है।
पत्र में क्या कहा गया
के. कविता ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह मामला एक नाबालिग से जुड़ा है, जिसके कारण न्यायिक और जांच प्रक्रिया का पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि गृह राज्यमंत्री का पद सीधे कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों से जुड़ा होता है, इसलिए जब तक जांच और ट्रायल पूरा नहीं होता, तब तक बंडी संजय कुमार का पद पर बने रहना हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न करता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसी स्थिति में पुलिस जांच, साक्ष्य संकलन और गवाहों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
संवैधानिक मूल्यों का हवाला
के. कविता ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि संविधान के मूल सिद्धांतों और संस्थागत ईमानदारी की रक्षा के लिए बंडी संजय कुमार को अस्थायी रूप से गृह मंत्रालय से हटाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह कदम न केवल न्यायसंगत होगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि सरकार नाबालिगों को न्याय दिलाने को राजनीतिक विचारों से ऊपर रखती है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि बंडी संजय कुमार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और तेलंगाना में पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तेलंगाना में BJP और बीआरएस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है। आलोचकों का कहना है कि के. कविता की यह माँग राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है, जबकि कविता का पक्ष है कि यह शुद्ध रूप से न्यायिक निष्पक्षता का प्रश्न है।
आम जनता और न्याय व्यवस्था पर असर
के. कविता ने अपने पत्र में कहा कि इस प्रकरण में न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा बनाए रखना सर्वोपरि है। उनके अनुसार, यदि सरकार समय रहते उचित कदम उठाती है, तो इससे संस्थाओं में आम नागरिकों का विश्वास और सुदृढ़ होगा। अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।