अजय राय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, शंकराचार्य मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

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अजय राय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, शंकराचार्य मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

सारांश

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेदों का भी उल्लेख किया है।

Key Takeaways

  • निष्पक्ष जांच: अजय राय ने शंकराचार्य मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
  • धार्मिक स्वतंत्रता: संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लेख किया गया है।
  • राजनीतिक दबाव: अगर मामला राजनीतिक दबाव का परिणाम है, तो इसे समय रहते सुलझाना जरूरी है।
  • सामाजिक संतुलन: शासन और आध्यात्मिक परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
  • जनविश्वास: पारदर्शी जांच से जनविश्वास मजबूत होगा।

लखनऊ, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के खिलाफ दर्ज पॉक्सो (पोक्सो) मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने धार्मिक स्वायत्तता की संवैधानिक सीमाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

अजय राय ने पत्र में कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह एफआईआर न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना हर नागरिक और शासन का कर्तव्य है, लेकिन इस मामले के समय और परिस्थितियों ने समाज में कई प्रश्न और संदेह उत्पन्न कर दिए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने पहले महाकुंभ मेले में राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें माघ मेले में स्नान से रोका गया और उनके साथ आए बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं, जिनकी व्यापक आलोचना हुई थी। ऐसे में वर्तमान आपराधिक कार्रवाई का समय समाज में चर्चा का विषय बन गया है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने वालों की पृष्ठभूमि, परिस्थितियों और संभावित प्रेरक तत्वों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। यदि मामला पूरी तरह से विधिसम्मत है, तो पारदर्शी जांच से सत्य सामने आ जाएगा। लेकिन यदि इसके पीछे राजनीतिक दबाव या दुर्भावना है, तो इसे समय रहते सुलझाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में जांच कराई जाए, ताकि जनविश्वास मजबूत हो सके।

संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लेख करते हुए अजय राय ने कहा कि ये प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं को अपने मामलों के प्रबंधन का मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक है और इसकी गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि आपराधिक कानून का उपयोग दमन या प्रतिशोध के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। असहमति या आलोचना को दंडात्मक शक्ति के माध्यम से दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आग्रह किया कि आपराधिक प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए तथा धार्मिक पद की गरिमा को आपराधिक विवादों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी शीर्ष धर्माचार्य के खिलाफ उत्पन्न परिस्थितियों से शासन और आध्यात्मिक परंपरा के बीच टकराव की धारणा बनती है, तो इससे व्यापक धार्मिक समाज में असंतोष और पीड़ा की भावना उत्पन्न हो सकती है। ऐसी किसी भी स्थिति का समय रहते समाधान सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक संतुलन के लिए आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अजय राय ने कहा कि समाज में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में की जा रही कार्रवाई कहीं अनावश्यक कठोरता या प्रतिशोधात्मक भावना से प्रेरित तो नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी धारणा बनती है, तो इससे न केवल राज्य सरकार की छवि प्रभावित होती है, बल्कि केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आस्था, संवैधानिक अधिकारों और शासन की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। देश की जनता यह चाहती है कि भारत में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को संरक्षण नहीं मिलेगा। अजय राय ने प्रधानमंत्री से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने की अपील की है।

Point of View

जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है। यह न केवल एक व्यक्ति की गरिमा का सवाल है, बल्कि पूरे समुदाय के विश्वास का भी।
NationPress
23/02/2026

Frequently Asked Questions

अजय राय ने पीएम मोदी को पत्र क्यों लिखा?
अजय राय ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस पत्र में क्या महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं?
पत्र में धार्मिक स्वतंत्रता, न्यायालय के निर्देशों का सम्मान, और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
शंकराचार्य का पद क्यों महत्वपूर्ण है?
शंकराचार्य का पद भारतीय सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक माना जाता है।
क्या इस मामले से राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है?
हाँ, यदि मामला राजनीतिक दबाव या दुर्भावना का परिणाम है, तो इससे शासन की छवि प्रभावित हो सकती है।
अजय राय ने किस प्रकार की जांच की मांग की है?
उन्होंने स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में जांच कराने की सुझाव दिया है।
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