ऑपरेशन मुस्कान-8: तेलंगाना महिला सुरक्षा विंग ने जुलाई 2026 में 6,307 बच्चों को बचाया
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना पुलिस की महिला सुरक्षा विंग ने 1 से 31 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान-8 के तहत 6,307 बच्चों को बाल श्रम, तस्करी और शोषण के विभिन्न रूपों से मुक्त कराया। गृह मंत्रालय की इस राष्ट्रव्यापी पहल के तेलंगाना चरण की जानकारी महिला सुरक्षा विंग की महानिदेशक शिखा गोयल ने 1 अगस्त 2026 को दी।
बचाए गए बच्चों का ब्योरा
बचाए गए 6,307 बच्चों में 5,892 लड़के और 415 लड़कियाँ शामिल हैं। इनमें से 3,447 बच्चे तेलंगाना राज्य के भीतर से मुक्त कराए गए, जबकि 2,860 बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड सहित 15 राज्यों से लाए गए थे। इसके अलावा नेपाल से 40 बच्चों को भी बचाया गया, जो इस अभियान के अंतरराष्ट्रीय आयाम को रेखांकित करता है।
श्रेणीवार देखें तो 5,041 बाल श्रमिक, 647 सड़क पर रहने वाले बच्चे, 563 अन्य (स्कूल छोड़ने वाले, बाल विवाह, अवैध गोद लेने के मामले), 43 भीख माँगने वाले बच्चे, 11 घर से भागे बच्चे, 1 बंधुआ श्रमिक और 1 अनाथ शामिल हैं।
अभियान की रणनीति और तैनाती
30 जून 2026 को राज्य स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और कानूनी प्रावधानों पर प्रशिक्षण दिया गया। अभियान में 124 उप-विभागीय पुलिस टीमें और 620 पुलिस कर्मी तैनात किए गए। महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बाल कल्याण संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित किया गया।
रेलवे और बस स्टेशन, धार्मिक स्थल, ईंट भट्टे, मैकेनिक की दुकानें, निर्माण स्थल और चाय की दुकानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का पूर्व में मानचित्रण किया गया था। बच्चे सड़क किनारे की दुकानों, होटल-ढाबों, भवन निर्माण स्थलों, किराना दुकानों, वेल्डिंग कार्यशालाओं, बेकरी, जूते की दुकानों और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रतिष्ठानों से मुक्त कराए गए।
कानूनी कार्रवाई और जुर्माना
अभियान के दौरान 1,705 एफआईआर दर्ज की गईं और 1,710 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में कुल 1,989 बच्चों को बचाया गया। श्रम विभाग ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के उल्लंघन पर ₹37,95,356 का जुर्माना लगाया। गौरतलब है कि यह जुर्माना उन प्रतिष्ठानों पर लगाया गया जहाँ बाल श्रमिकों को काम पर रखा गया था।
पुनर्वास और परिवारों से मिलन
बचाए गए 5,737 बच्चों को उनके परिवारों से मिला दिया गया, जबकि 570 बच्चों को बाल देखभाल संस्थानों में भर्ती कराया गया। महानिदेशक शिखा गोयल ने कहा कि 'ऑपरेशन मुस्कान-8 ने हितधारकों के समन्वय से बाल तस्करी और बंधुआ मजदूरी को खत्म करने के लिए तेलंगाना पुलिस की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।'
आगे की राह
यह अभियान केवल एक महीने में संचालित किया गया, फिर भी इसका दायरा 15 राज्यों और एक पड़ोसी देश तक फैला रहा — जो बाल श्रम और तस्करी की अंतर-राज्यीय प्रकृति को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बचाव के बाद पुनर्वास और दीर्घकालिक निगरानी ही इस तरह के अभियानों की असली कसौटी होती है।