अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़: 19 बच्चे बचाए, तीन महिलाएं गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को राज्य में सक्रिय एक कथित बाल तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाते हुए 19 बच्चों को सुरक्षित बचाया। इस कार्रवाई में तीन महिलाओं — गुमन्या कोचुंग, मार्टा एटे और नेहा गेरोरी — को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर बच्चों को अलग-अलग व्यक्तियों तक पहुँचाने और सौदे कराने में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है।
मामले का पृष्ठभूमि और प्राथमिकी
यह मामला 17 अगस्त 2026 को नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति की शिकायत के आधार पर नामसाई पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता और इसके कई जिलों से जुड़े होने को देखते हुए नामसाई जिले के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले की निगरानी में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच में उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) मार्टिन रतन भी सहयोग कर रहे हैं।
बचाव अभियान और बच्चों की स्थिति
विशेष जांच दल ने राज्य के कई जिलों में एक साथ अभियान चलाकर बच्चों को बरामद किया। बचाए गए बच्चे मेचुका, आलो, पासीघाट, नाहरलगुन, ईटानगर और लोंगडिंग सहित विभिन्न स्थानों से सुरक्षित निकाले गए। पुलिस के बयान के अनुसार, बचाए गए अधिकांश बच्चों की उम्र आठ वर्ष से कम है। जांच में यह भी सामने आया कि सबसे छोटा बच्चा कथित तौर पर केवल तीन वर्ष का था, जब उसे परिवार से अलग किया गया। प्रारंभिक बातचीत में कुछ बच्चे अपने माता-पिता के नाम या परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी तक नहीं बता पाए।
रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और बाल संरक्षण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और उनकी गवाही बाल-अनुकूल एवं संवेदनशील प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराई जा रही है।
नेटवर्क का तरीका और वित्तीय लेनदेन
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संपर्क कर उन्हें बच्चों की बेहतर शिक्षा, देखभाल और भविष्य का झूठा भरोसा दिया। इसके बाद बच्चों को कथित तौर पर उनके परिवारों से लेकर दूर-दराज के इलाकों में अलग-अलग लोगों के पास भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में प्रत्येक बच्चे के बदले ₹10,000 से ₹50,000 तक के लेनदेन के संकेत मिले हैं। जांच में यह भी उजागर हुआ कि कुछ मामलों में माता-पिता या अभिभावकों को बच्चों को सौंपने के बदले पैसे दिए गए थे। बचाए गए कुछ बच्चों से घरेलू काम और होटलों में काम करवाए जाने के भी संकेत मिले हैं।
एसआईटी की आगामी जांच
एसआईटी अब कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने के लिए वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, बच्चों की आवाजाही और आरोपियों के आपसी संबंधों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पहचान, तस्वीरें और अन्य व्यक्तिगत जानकारी कानूनी प्रावधानों के तहत गोपनीय रखी जा रही है।
पुलिस की अपील और आगे की राह
पुलिस का कहना है कि 19 बच्चों का बचाव इस अभियान का अंत नहीं है — जांच टीमें अभी भी अन्य बच्चों का पता लगाने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। नामसाई जिला पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो जिन्हें इसी तरह ले जाया गया हो, तो वे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या बाल कल्याण समिति से संपर्क करें। पुलिस ने उन अभिभावकों से भी आगे आने की अपील की है जिन्होंने किसी बिचौलिए के माध्यम से अपने बच्चों को दूसरों के पास भेजा हो। यह मामला राज्य में बाल संरक्षण तंत्र की मजबूती की फिर से माँग उठाता है।