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अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़: 19 बच्चे बचाए, तीन महिलाएं गिरफ्तार

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अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़: 19 बच्चे बचाए, तीन महिलाएं गिरफ्तार

सारांश

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने एक कथित बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 19 बच्चों को बचाया — अधिकांश 8 वर्ष से कम उम्र के, सबसे छोटा महज 3 साल का। तीन महिला बिचौलिए गिरफ्तार, प्रति बच्चे ₹10,000 से ₹50,000 तक के लेनदेन के संकेत। एसआईटी जांच अभी जारी है।

मुख्य बातें

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को कथित बाल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 19 बच्चों को सुरक्षित बचाया।
गिरफ्तार तीन महिलाएं — गुमन्या कोचुंग, मार्टा एटे और नेहा गेरोरी — पर बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है।
बचाए गए अधिकांश बच्चों की उम्र 8 वर्ष से कम ; सबसे छोटा बच्चा कथित तौर पर 3 वर्ष का था जब उसे परिवार से अलग किया गया।
पुलिस के अनुसार प्रति बच्चे ₹10,000 से ₹50,000 तक के वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं।
मामला 17 अगस्त 2026 को नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति की शिकायत पर दर्ज हुआ; एसपी सांगे थिनले की निगरानी में एसआईटी जांच जारी है।
बच्चों को मेचुका, आलो, पासीघाट, नाहरलगुन, ईटानगर और लोंगडिंग सहित कई स्थानों से बरामद किया गया।

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को राज्य में सक्रिय एक कथित बाल तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाते हुए 19 बच्चों को सुरक्षित बचाया। इस कार्रवाई में तीन महिलाओंगुमन्या कोचुंग, मार्टा एटे और नेहा गेरोरी — को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर बच्चों को अलग-अलग व्यक्तियों तक पहुँचाने और सौदे कराने में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है।

मामले का पृष्ठभूमि और प्राथमिकी

यह मामला 17 अगस्त 2026 को नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति की शिकायत के आधार पर नामसाई पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता और इसके कई जिलों से जुड़े होने को देखते हुए नामसाई जिले के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले की निगरानी में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच में उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) मार्टिन रतन भी सहयोग कर रहे हैं।

बचाव अभियान और बच्चों की स्थिति

विशेष जांच दल ने राज्य के कई जिलों में एक साथ अभियान चलाकर बच्चों को बरामद किया। बचाए गए बच्चे मेचुका, आलो, पासीघाट, नाहरलगुन, ईटानगर और लोंगडिंग सहित विभिन्न स्थानों से सुरक्षित निकाले गए। पुलिस के बयान के अनुसार, बचाए गए अधिकांश बच्चों की उम्र आठ वर्ष से कम है। जांच में यह भी सामने आया कि सबसे छोटा बच्चा कथित तौर पर केवल तीन वर्ष का था, जब उसे परिवार से अलग किया गया। प्रारंभिक बातचीत में कुछ बच्चे अपने माता-पिता के नाम या परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी तक नहीं बता पाए।

रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और बाल संरक्षण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और उनकी गवाही बाल-अनुकूल एवं संवेदनशील प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराई जा रही है।

नेटवर्क का तरीका और वित्तीय लेनदेन

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संपर्क कर उन्हें बच्चों की बेहतर शिक्षा, देखभाल और भविष्य का झूठा भरोसा दिया। इसके बाद बच्चों को कथित तौर पर उनके परिवारों से लेकर दूर-दराज के इलाकों में अलग-अलग लोगों के पास भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में प्रत्येक बच्चे के बदले ₹10,000 से ₹50,000 तक के लेनदेन के संकेत मिले हैं। जांच में यह भी उजागर हुआ कि कुछ मामलों में माता-पिता या अभिभावकों को बच्चों को सौंपने के बदले पैसे दिए गए थे। बचाए गए कुछ बच्चों से घरेलू काम और होटलों में काम करवाए जाने के भी संकेत मिले हैं।

एसआईटी की आगामी जांच

एसआईटी अब कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने के लिए वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, बच्चों की आवाजाही और आरोपियों के आपसी संबंधों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पहचान, तस्वीरें और अन्य व्यक्तिगत जानकारी कानूनी प्रावधानों के तहत गोपनीय रखी जा रही है।

पुलिस की अपील और आगे की राह

पुलिस का कहना है कि 19 बच्चों का बचाव इस अभियान का अंत नहीं है — जांच टीमें अभी भी अन्य बच्चों का पता लगाने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। नामसाई जिला पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो जिन्हें इसी तरह ले जाया गया हो, तो वे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या बाल कल्याण समिति से संपर्क करें। पुलिस ने उन अभिभावकों से भी आगे आने की अपील की है जिन्होंने किसी बिचौलिए के माध्यम से अपने बच्चों को दूसरों के पास भेजा हो। यह मामला राज्य में बाल संरक्षण तंत्र की मजबूती की फिर से माँग उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से ₹50,000 जैसी मामूली रकम में बच्चों की 'खरीद-फरोख्त' यह बताती है कि गरीबी को हथियार बनाकर परिवारों को कैसे भ्रमित किया जाता है। गंभीर प्रश्न यह है कि 19 बच्चे कई जिलों में बिखरे होने के बावजूद बाल कल्याण समिति की शिकायत से पहले तंत्र क्यों सक्रिय नहीं हुआ। एसआईटी की जांच तब तक अधूरी रहेगी जब तक नेटवर्क के वित्तीय स्रोत और संभावित अंतरराज्यीय कड़ियाँ सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में नहीं आतीं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी नेटवर्क का मामला क्या है?
अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को एक कथित बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राज्य के कई जिलों से 19 बच्चों को बचाया। इस मामले में तीन महिला बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया है जिन पर बच्चों को अलग-अलग व्यक्तियों तक पहुँचाने का आरोप है।
बचाए गए बच्चों की उम्र और स्थिति क्या थी?
पुलिस के बयान के अनुसार बचाए गए अधिकांश बच्चों की उम्र 8 वर्ष से कम है और सबसे छोटा बच्चा कथित तौर पर केवल 3 वर्ष का था जब उसे परिवार से अलग किया गया। कुछ बच्चे प्रारंभिक बातचीत में अपने माता-पिता के नाम तक नहीं बता पाए। रेस्क्यू के बाद सभी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
तस्करी नेटवर्क किस तरह काम करता था?
जांच के अनुसार आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बच्चों की बेहतर शिक्षा और देखभाल का झूठा भरोसा देकर बच्चों को अपने कब्जे में लेते थे। पुलिस को प्रति बच्चे ₹10,000 से ₹50,000 तक के वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं। कुछ बच्चों से घरेलू काम और होटलों में काम करवाए जाने के भी संकेत हैं।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है और आगे क्या होगा?
नामसाई जिले के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 19 बच्चों का बचाव अभियान का अंत नहीं है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान जारी है।
यदि किसी को ऐसे बच्चों की जानकारी हो तो क्या करें?
नामसाई जिला पुलिस ने अपील की है कि ऐसे किसी भी बच्चे की जानकारी होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या बाल कल्याण समिति से संपर्क करें। जिन अभिभावकों ने बिचौलिए के माध्यम से अपने बच्चों को दूसरों के पास भेजा हो, उनसे भी आगे आने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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