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विदिशा जिला अस्पताल में 229 SAM बच्चों का इलाज, इंटीग्रेटेड पोषण मॉडल से मिल रही नई जिंदगी

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विदिशा जिला अस्पताल में 229 SAM बच्चों का इलाज, इंटीग्रेटेड पोषण मॉडल से मिल रही नई जिंदगी

सारांश

विदिशा जिला अस्पताल का इंटीग्रेटेड SAM मॉडल सिर्फ दाल-चावल नहीं, बल्कि PICU से NRC तक और डिस्चार्ज के बाद दो महीने फॉलोअप तक की पूरी श्रृंखला है। चार महीनों में 229 बच्चों का उपचार — और अधिकतर स्वस्थ होकर घर — यह संख्या बताती है कि जब प्रशासन, डॉक्टर और परिवार एक साथ चलें तो कुपोषण की लड़ाई जीती जा सकती है।

मुख्य बातें

विदिशा जिला अस्पताल में इंटीग्रेटेड SAM मैनेजमेंट के तहत पिछले चार महीनों में 229 गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार किया गया।
जुलाई तक 203 बच्चे भर्ती हुए; चालू माह अगस्त में 26 नए बच्चे और जोड़े गए।
बच्चों को NRC में करीब 14 दिन रखा जाता है और दिन में 8 बार पौष्टिक आहार दिया जाता है; केंद्र में 20 बेड उपलब्ध।
परिजनों को सरकार की ओर से ₹120 प्रतिदिन वेज कॉम्पन्सेशन दिया जाता है।
डिस्चार्ज के बाद 2 महीने तक हर 15 दिन में फॉलोअप; इम्यूनाइजेशन की स्थिति भी जाँची जाती है।
कार्यक्रम की निगरानी कलेक्टर स्तर से नियमित रूप से की जा रही है।

विदिशा जिला अस्पताल में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए लागू इंटीग्रेटेड एसएएम मैनेजमेंट व्यवस्था उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। 25 अगस्त 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में 229 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा चुका है — जिनमें जुलाई तक 203 बच्चे और चालू माह में 26 नए बच्चे शामिल हैं। यह मॉडल महज पोषण तक सीमित नहीं है; इसमें चिकित्सीय जटिलताओं का उपचार, विशेष आहार, पुनर्वास और डिस्चार्ज के बाद दो महीने तक फॉलोअप शामिल है।

उपचार की बहुस्तरीय प्रक्रिया

जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले अति कुपोषित बच्चों का पहले विस्तृत आकलन किया जाता है। डॉ. बृजेंद्र छारी, शिशु रोग विशेषज्ञ, ने बताया कि बच्चे का वजन, लंबाई और एमयूएसी (मध्य-ऊपरी बांह की परिधि) मापकर तय किया जाता है कि वह SAM श्रेणी में आता है या नहीं। इसके बाद बच्चे को पीडियाट्रिक वार्ड या पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती किया जाता है, जहाँ बुखार, खाँसी, दस्त, डिहाइड्रेशन, साँस संबंधी समस्याएँ और शॉक जैसी जटिलताओं का उपचार होता है।

गौरतलब है कि वार्ड या PICU में रहने के दौरान भी बच्चे की पोषण आवश्यकताओं के अनुसार विशेष आहार पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) से ही उपलब्ध कराया जाता है — यह इस मॉडल की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है।

NRC में 14 दिन की विशेष देखभाल

प्रारंभिक जटिलताएँ नियंत्रित होने के बाद बच्चे को NRC में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ 20 बेड की व्यवस्था है। यहाँ बच्चे को करीब 14 दिनों तक विशेष निगरानी में रखा जाता है और दिन में आठ बार पौष्टिक आहार दिया जाता है। केंद्र में भोजन तैयार करने, टॉयलेट-बाथरूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। सरकार की ओर से बच्चे के परिजनों को ₹120 प्रतिदिन वेज कॉम्पन्सेशन भी दिया जाता है, ताकि परिवार उपचार के दौरान आर्थिक दबाव से मुक्त रह सकें।

माताओं और परिजनों को पोषण शिक्षा

डॉ. छारी के अनुसार, NRC में भर्ती बच्चों के साथ आने वाली माताओं और परिजनों को प्रतिदिन पोषण एवं स्वच्छता पर व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। इसमें बच्चे को सही तरीके से खाना खिलाने, भोजन को ढककर रखने, खाना खिलाने से पहले साबुन से हाथ धोने, बच्चे के नाखून काटने और साफ-सफाई बनाए रखने जैसे बिंदु शामिल हैं। यह दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि अस्पताल से छुट्टी के बाद भी परिवार बच्चे की देखभाल सही ढंग से कर सके।

डिस्चार्ज के बाद भी जारी रहती है निगरानी

NRC से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों को दो महीने तक हर 15 दिन में फॉलोअप के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य और पोषण की जाँच, आवश्यक दवाएँ, NRC में तैयार खाद्य पैकेट और इम्यूनाइजेशन की स्थिति की समीक्षा की जाती है। यदि किसी बच्चे का कोई टीकाकरण छूटा हो, तो उसे पूरा कराने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

प्रशासन की सक्रिय भूमिका और स्टाफ की चुनौती

जिला अस्पताल विदिशा के शिशु विभाग प्रभारी डॉ. प्रमोद मिश्रा ने बताया कि इस कार्यक्रम की निगरानी कलेक्टर स्तर से नियमित रूप से की जाती है। NRC में दो कुक, एक केयरटेकर और सफाई कर्मचारी तैनात हैं। डॉ. छारी ने स्वीकार किया कि नर्सिंग स्टाफ की कुछ कमी है, जिसे विभाग स्तर पर समायोजित किया जा रहा है, और टीम समन्वय के साथ काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और परिजनों के त्रिस्तरीय समन्वय से अधिकतर बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह मॉडल जिले के उन दूरदराज के गाँवों तक पहुँच रहा है जहाँ कुपोषण की जड़ें सबसे गहरी हैं। नर्सिंग स्टाफ की स्वीकृत कमी और 'विभाग स्तर पर समायोजन' जैसे जुमले बताते हैं कि ढाँचागत संसाधन अभी भी इस महत्वाकांक्षा के अनुरूप नहीं हैं। जब तक फॉलोअप डेटा — यानी डिस्चार्ज के बाद कितने बच्चे वास्तव में स्वस्थ रहे — सार्वजनिक नहीं होता, 'अधिकतर बच्चे स्वस्थ होकर घर लौटे' जैसे दावे अधूरे हैं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदिशा जिला अस्पताल में SAM बच्चों का इलाज कैसे होता है?
विदिशा जिला अस्पताल में इंटीग्रेटेड SAM मैनेजमेंट के तहत बच्चे को पहले पीडियाट्रिक वार्ड या PICU में भर्ती कर चिकित्सीय जटिलताओं का उपचार किया जाता है, फिर NRC में 14 दिन विशेष पोषण देखभाल दी जाती है। डिस्चार्ज के बाद दो महीने तक हर 15 दिन में फॉलोअप होता है।
पिछले चार महीनों में कितने SAM बच्चों का इलाज हुआ?
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई तक 203 बच्चे और अगस्त 2025 में 26 नए बच्चे मिलाकर कुल 229 गंभीर कुपोषित बच्चों को विदिशा जिला अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया जा चुका है।
NRC यानी पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
NRC में 20 बेड की व्यवस्था है और बच्चों को करीब 14 दिन रखा जाता है। इस दौरान दिन में आठ बार पौष्टिक आहार, बीमारी के अनुसार उपचार और पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। परिजनों को ₹120 प्रतिदिन वेज कॉम्पन्सेशन भी मिलता है।
SAM बच्चे की पहचान कैसे की जाती है?
निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत बच्चे का वजन, लंबाई और MUAC (मध्य-ऊपरी बांह की परिधि) मापा जाता है। इन मानकों के आधार पर तय किया जाता है कि बच्चा SAM श्रेणी में आता है या नहीं, जैसा कि डॉ. बृजेंद्र छारी ने बताया।
डिस्चार्ज के बाद SAM बच्चों की देखभाल कैसे होती है?
NRC से छुट्टी के बाद दो महीने तक हर 15 दिन में बच्चे को फॉलोअप के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य-पोषण जाँच, दवाएँ, खाद्य पैकेट और इम्यूनाइजेशन की समीक्षा की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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