गुजरात: कुपोषित बच्चों की निगरानी पर सख्त निर्देश, 3,300 से अधिक बाल-अनुकूल आंगनबाड़ी केंद्र बनेंगे
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील ने 10 अगस्त 2026 को गांधीनगर में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों के पूर्णतः स्वस्थ होने तक उनकी निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए। यह कार्यशाला '3,300 प्लस बाल-अनुकूल आंगनबाड़ी एवं पोषण संगम स्वास्थ्य शिविर' विषय पर आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य भर के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।
मुख्य घोषणाएँ और निर्देश
डॉ. वकील ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास की पहली सीढ़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चे के जीवन के पहले छह वर्ष उसके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए सर्वाधिक निर्णायक होते हैं।
नए बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्र 600 से 900 वर्ग फुट क्षेत्रफल के होंगे और इनमें बच्चों के लिए सुरक्षित, खेल-उन्मुख और सीखने के अनुकूल वातावरण होना अनिवार्य किया गया है। मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को फ्लोर गेम्स, चित्रकला और बाल गीत जैसी नवाचारी शिक्षण पद्धतियों में प्रशिक्षित करने का भी निर्देश दिया।
कुपोषण पर विशेष जोर
डॉ. वकील ने स्पष्ट किया कि महज स्वास्थ्य जांच या दवा वितरण से कुपोषण की समस्या हल नहीं होगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक कुपोषित बच्चे की नियमित निगरानी की जाए और उसके स्वस्थ होने तक फॉलोअप बंद न किया जाए। इसके साथ ही बच्चों के माता-पिता को उचित पोषण संबंधी मार्गदर्शन देना भी अनिवार्य किया गया है।
प्रस्तावित 'पोषण संगम स्वास्थ्य शिविर' के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। मंत्री ने 'ममता दिवस' के दौरान आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एक ही स्थान पर गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों का वजन, लंबाई माप और टीकाकरण समन्वित रूप से करने की व्यवस्था बनाने को कहा।
3,300 से अधिक केंद्रों का निर्माण
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. राकेश शंकर ने बताया कि समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) और सड़क एवं भवन विभाग के बीच समन्वय से 3,300 से अधिक नए आंगनबाड़ी केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त सड़क एवं भवन विभाग द्वारा टेंडर जारी किए गए 1,507 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण भी प्रगति पर है।
निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए IIT गांधीनगर के विशेषज्ञों की सेवाएँ ली जा रही हैं। तीसरे पक्ष द्वारा निरीक्षण और कड़े गुणवत्ता मानकों के पालन के साथ 'स्मार्ट आंगनबाड़ी' की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है।
यूनिसेफ और विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यशाला में यूनिसेफ ने बाल-अनुकूल, सुरक्षित और पर्यावरण-संवेदनशील स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्रों के डिज़ाइन और 3-डी मॉडल प्रस्तुत किए। IIT गांधीनगर के विशेषज्ञों ने थर्ड पार्टी निरीक्षण के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में सड़क एवं भवन विभाग के सचिव, ICDS आयुक्त, स्वास्थ्य आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने 'पोषण संगम स्वास्थ्य शिविर' की नीति और कार्यान्वयन योजना पर विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर आंगनबाड़ी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। यह पहल गुजरात में बाल पोषण और प्रारंभिक बचपन देखभाल के ढाँचे को नई दिशा देने की कोशिश है।