गुजरात: कम वजन वाले टीबी मरीजों और 14 साल से छोटे बच्चों को 6 महीने मिलेंगे पौष्टिक स्नैक्स
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य में क्षय रोग उपचार को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। अब 42 किलोग्राम से कम वजन वाले वयस्क टीबी मरीजों और 14 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को छह महीने तक निःशुल्क रेडी-टू-ईट न्यूट्रिशन स्नैक्स प्रदान किए जाएंगे। यह घोषणा 18 मई को गांधीनगर के लोक भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में की गई।
बैठक में क्या हुआ
लोक भवन में आयोजित इस समीक्षा बैठक में राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने टीबी नियंत्रण उपायों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने आगामी लक्ष्यों और तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात में टीबी उन्मूलन अभियान को जन आंदोलन का रूप देना होगा। उन्होंने अधिकारियों को टीबी नियंत्रण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने, लोगों में बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और टीबी मरीजों के बीच नशा मुक्ति को लेकर भी जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के हर टीबी मरीज तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रभावी व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
नई तकनीकी सुविधाएँ और उपकरण
राज्य सरकार के अनुसार, 2026-27 के दौरान तालुकाओं और अधिक प्रभावित जिलों में 100 प्रतिशत एनएएटी परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए 100 नई ट्रूनैट मशीनें खरीदी जाएंगी। इसके साथ ही संदिग्ध टीबी मरीजों की घर-घर जाँच के लिए 333 पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनें भी तैनात की जाएंगी, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जाँच को सुलभ बनाएंगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में टीबी उन्मूलन की समय-सीमा को लेकर दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा था, और राज्यों पर अपनी रणनीतियाँ तेज़ करने का दायित्व है।
मौजूदा बुनियादी ढाँचा
सरकार ने बताया कि राज्य के सभी उप-स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी अस्पतालों में टीबी की जाँच और इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। वर्तमान में गुजरात में 2,351 माइक्रोस्कोपी सेंटर, 3 टीबी कल्चर लैब, 74 सीबीएनएएटी मशीनें और 386 ट्रूनैट मशीनें संचालित हो रही हैं।
आम जनता और मरीजों पर असर
पोषण संबंधी कमी टीबी उपचार की सफलता में एक बड़ी बाधा मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम वजन वाले मरीजों में दवाओं का असर धीमा पड़ सकता है और उपचार अधूरा रहने का जोखिम बढ़ जाता है। रेडी-टू-ईट स्नैक्स की यह पहल सीधे उस कड़ी को मजबूत करने का प्रयास है। बच्चों को इस योजना में शामिल करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाल टीबी के मामलों में पोषण की भूमिका और भी निर्णायक होती है।
आगे की राह
टीबी मुक्त भारत अभियान केंद्र सरकार का देशभर में क्षय रोग उन्मूलन के लिए चलाया जा रहा राष्ट्रीय कार्यक्रम है। गुजरात की यह पहल राज्य स्तर पर उस अभियान को नई गति देने का प्रयास है। नई मशीनों की खरीद और घर-घर जाँच अभियान से आने वाले महीनों में मरीजों की पहचान और उपचार दर में सुधार की उम्मीद है।