कर्नाटक सरकार के तीन साल: तुमकुरु में 'प्रगतियत्ता कर्नाटक' समारोह, 1.52 लाख को मिलेंगे संपत्ति दस्तावेज़
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 20 मई 2025 को तुमकुरु में आयोजित 'प्रगतियत्ता कर्नाटक' समारोह के ज़रिए सत्ता में तीन वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाएगी। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज़ हैं। इस कार्यक्रम में 1.52 लाख लाभार्थियों को संपत्ति के बिक्री विलेख (सेल डीड) वितरित किए जाएंगे।
कार्यक्रम का स्वरूप और उद्देश्य
राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार, 19 मई को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि यह एक सरकारी कार्यक्रम है, न कि पार्टी का आयोजन। उन्होंने कहा, 'हमने पार्टी आलाकमान के किसी भी नेता को आमंत्रित नहीं किया है, क्योंकि यह एक आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम है।'
परमेश्वर ने बताया कि समारोह के दो मुख्य हिस्से होंगे — पहला, 1.52 लाख लाभार्थियों को बिक्री विलेख का वितरण; और दूसरा, सरकार की तीन वर्षीय उपलब्धियों का लेखा-जोखा। उन्होंने कहा, 'लोगों को यह जानने का अधिकार है कि हमने क्या काम किया है। यह किसी के लिए भी ताकत दिखाने का मंच नहीं है।'
नेतृत्व विवाद से दूरी
कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के संदर्भ में पूछे गए सवालों पर परमेश्वर ने कहा कि पार्टी के अंदरूनी मामलों को इस सरकारी आयोजन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'नेतृत्व की खींचतान एक अलग मुद्दा है।' गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे राजनीतिक माहौल में हो रहा है जब सरकार के भीतर समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरटीसी हड़ताल का साया
समारोह के अगले दिन से कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के कर्मचारियों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की गई है। परमेश्वर ने बताया कि मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री इस मुद्दे पर नज़र बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा, 'कर्मचारी काले झंडे दिखाने के प्रस्ताव को वापस लेने पर सहमत हो गए हैं। 20 मई के बाद, यदि ज़रूरत पड़ी, तो मुख्यमंत्री उनसे मुलाकात करेंगे।'
भाजपा की तीखी आलोचना
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने इस समारोह पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम 'उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि अहंकार और विफलता का प्रदर्शन है।' विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोज़गार देने में नाकाम रही है और किसानों के हितों की उपेक्षा की गई है।
विजयेंद्र ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) और वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आवंटित धन के कथित दुरुपयोग, 'गृह लक्ष्मी' योजना के अपर्याप्त क्रियान्वयन, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कथित बढ़ोतरी, और स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र की बदहाली का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की उपलब्धियाँ केवल 'कागजों और विज्ञापन बोर्डों' तक सीमित हैं।
सरकार का पक्ष और आगे की राह
परमेश्वर ने स्वीकार किया कि घोषणापत्र में उल्लिखित अल्पकालिक लक्ष्य काफी हद तक पूरे हो चुके हैं, जबकि सिंचाई जैसी दीर्घकालिक परियोजनाएं अगले दो वर्षों में पूरी की जाएंगी। उन्होंने कहा, 'जब घोषणापत्र तैयार किया गया था, तो उसमें छोटी और लंबी, दोनों तरह की परियोजनाओं की योजना बनाई गई थी।' सरकार के सामने अब चुनौती है कि वह शेष दो वर्षों में अपने बड़े वादों को ज़मीन पर उतारे और विपक्ष के आरोपों का ठोस जवाब दे।