गुजरात में बाल अधिकार कार्यशाला: मंत्री बावलिया बोले — NGO और सरकार का तालमेल और मजबूत होगा

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गुजरात में बाल अधिकार कार्यशाला: मंत्री बावलिया बोले — NGO और सरकार का तालमेल और मजबूत होगा

सारांश

गांधीनगर में आयोजित राज्य-स्तरीय बाल अधिकार कार्यशाला में मंत्री बावलिया ने सरकार और NGO के बीच सहयोग को और गहरा करने का संकल्प जताया। बाल श्रम, बाल विवाह और कमजोर वर्ग के बच्चों तक योजनाओं की पहुँच — ये तीन मुद्दे केंद्र में रहे।

मुख्य बातें

गांधीनगर में 7 मई 2026 को 'बाल अधिकार: मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर राज्य-स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई।
मंत्री कुंवरजी बावलिया ने सरकारी निकायों और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
श्रम सेतु पोर्टल और श्रमिक सहायक कॉल सेंटर के जरिए मजदूर परिवारों को डिजिटल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग पिछले डेढ़ वर्षों में विभिन्न जिलों का दौरा कर जमीनी निगरानी कर रहा है।
बाल श्रम और बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियानों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया।
अहमदाबाद की माही भट्ट को उनकी उपलब्धियों के लिए कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

गुजरात के गांधीनगर में 7 मई 2026 को 'बाल अधिकार: मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर आयोजित राज्य-स्तरीय कार्यशाला में श्रम, कौशल विकास, रोजगार एवं ग्रामीण विकास मंत्री कुंवरजी बावलिया ने स्पष्ट किया कि बच्चों के कल्याण के लिए सरकारी निकायों और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाल सुरक्षा की जिम्मेदारी सामूहिक है और किसी एक संस्था के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती।

कार्यशाला का उद्देश्य और आयोजन

यह कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और गांधीनगर नगर निगम द्वारा संयुक्त रूप से वन प्रशिक्षण केंद्र, गांधीनगर में आयोजित किया गया। इसमें स्वयंसेवी संगठनों, नागरिक समाज समूहों और एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गांधीनगर की मेयर मीराबेन पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं।

मंत्री बावलिया के मुख्य संदेश

मंत्री बावलिया ने कहा कि जिस प्रकार एक कुम्हार मिट्टी को आकार देकर बर्तन बनाता है, उसी प्रकार समाज भी देखभाल, मूल्यों और सुरक्षा के माध्यम से बच्चों के जीवन को दिशा देता है। उन्होंने जोर दिया कि मजदूर परिवारों और कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों तक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

मंत्री ने बताया कि श्रमिकों और उनके परिवारों को त्वरित सहायता एवं शिकायत निवारण के लिए 'श्रम सेतु पोर्टल' और 'श्रमिक सहायक कॉल सेंटर' जैसी डिजिटल पहलें पहले से सक्रिय हैं। बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों से निपटने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाना अनिवार्य है।

बाल अधिकार आयोग की भूमिका

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठा गज्जर ने कहा कि बच्चे समाज की नींव हैं और राष्ट्र-निर्माण में उनकी भूमिका अपरिहार्य है। उन्होंने बताया कि आयोग पिछले डेढ़ वर्षों में विभिन्न जिलों का दौरा कर यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर बच्चों तक वास्तव में पहुँचें। आयोग स्कूलों और आंगनबाड़ियों की निगरानी में भी सक्रिय रूप से संलग्न है ताकि बाल अधिकारों का उल्लंघन न हो।

गज्जर ने बाल श्रम और बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियानों के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सभी संबंधित पक्षों के समन्वित प्रयास अनिवार्य हैं।

जमीनी अनुभव और सम्मान

कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने बाल अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए। प्रतिभागियों ने एनजीओ और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर चर्चा की और जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों के सर्वोत्तम अनुभव साझा किए। इस अवसर पर अहमदाबाद की माही भट्ट को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

आगे की राह

मंत्री बावलिया ने कार्यशाला के समापन पर स्पष्ट किया कि सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि बाल कल्याण के उपायों के क्रियान्वयन में कोई अंतराल न रहे। यह कार्यशाला भविष्य में जिला-स्तरीय जनसंपर्क गतिविधियों के विस्तार की नींव के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी परिणाम अक्सर घोषणाओं से पीछे रह जाते हैं। असली कसौटी यह है कि 'श्रम सेतु पोर्टल' जैसी डिजिटल पहलें वास्तव में उन प्रवासी मजदूर परिवारों तक पहुँच रही हैं या नहीं, जो डिजिटल साक्षरता से वंचित हैं। बाल विवाह और बाल श्रम पर जागरूकता की बात तब तक अधूरी है जब तक जिला-स्तरीय क्रियान्वयन की जवाबदेही तय न हो। आयोग की डेढ़ साल की जिला यात्राएं सराहनीय हैं, परंतु उनके मापने योग्य परिणाम सार्वजनिक होने चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधीनगर में बाल अधिकार कार्यशाला का आयोजन किसने किया?
यह कार्यशाला गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और गांधीनगर नगर निगम ने संयुक्त रूप से वन प्रशिक्षण केंद्र, गांधीनगर में आयोजित की। इसमें स्वयंसेवी संगठनों, NGO और नागरिक समाज समूहों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मंत्री कुंवरजी बावलिया ने बाल कल्याण पर क्या कहा?
मंत्री बावलिया ने कहा कि सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को और मजबूत किया जाएगा ताकि बाल कल्याण योजनाएं मजदूर परिवारों और कमजोर वर्ग के बच्चों तक भी पहुँचें। उन्होंने बाल विवाह जैसे मुद्दों पर निरंतर जागरूकता की जरूरत पर भी जोर दिया।
श्रम सेतु पोर्टल क्या है और यह बच्चों से कैसे जुड़ा है?
श्रम सेतु पोर्टल गुजरात सरकार की डिजिटल पहल है जो मजदूरों और उनके परिवारों को त्वरित सहायता और शिकायत निवारण उपलब्ध कराती है। इसके साथ श्रमिक सहायक कॉल सेंटर भी संचालित है, जो मजदूर परिवारों के बच्चों तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने में सहायक है।
गुजरात बाल अधिकार संरक्षण आयोग क्या कार्य कर रहा है?
आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठा गज्जर के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्षों में आयोग ने विभिन्न जिलों का दौरा किया है और स्कूलों व आंगनबाड़ियों की निगरानी की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर बच्चों तक पहुँचें और उनके अधिकारों का उल्लंघन न हो।
इस कार्यशाला में बाल श्रम और बाल विवाह पर क्या चर्चा हुई?
कार्यशाला में बाल श्रम और बाल विवाह को प्रमुख सामाजिक चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया गया। आयोग की अध्यक्ष ने इन मुद्दों के विरुद्ध जागरूकता अभियानों के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया और जिला-स्तरीय जनसंपर्क गतिविधियों को और सक्रिय करने की बात कही।
राष्ट्र प्रेस
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