गुजरात में डॉ. अंबेडकर की जयंती पर मुख्यमंत्री और विधायकों की श्रद्धांजलि
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. अंबेडकर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
- महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा का आयोजन।
- मुख्यमंत्री ने समाज के सशक्तिकरण पर जोर दिया।
- कार्यक्रम में हजारों लोग उपस्थित रहे।
- संविधान के नियमों का पालन करने की अपील।
गांधीनगर, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी और शिक्षा मंत्री प्रदुमन बजा सहित विधायकों ने गुजरात विधानसभा में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने विधानसभा के सामने प्रेरणा भूमि पर स्थित डॉ. बाबासाहेब की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में भीम सैनिक सहित समाज के हजारों लोग उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "विधानसभा के सामने प्रेरणा भूमि पर स्थित डॉ. बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। सद्भावपूर्ण समाज के निर्माण के लिए उनके विचार और सशक्त लोकतंत्र के निर्माण पर उनके चिंतन हम सभी के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। यह एक ऐसा अवसर है जब हम सद्भावपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण के साथ-साथ एक विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संकल्प लें।"
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने कहा कि बाबा साहब को यही सच्ची श्रद्धांजलि है कि सभी लोग संविधान में दिए गए कानून व नियमों का पालन करें और राष्ट्रहित में काम करें। इसके साथ ही हर नागरिक अपना कर्तव्य निभाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आगे ले जाने और डॉ. अंबेडकर के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया है।
गांधीनगर उत्तर की विधायक रीटा पटेल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "आज देश में महिला आरक्षण जरूरी है। प्रधानमंत्री ने 16, 17 और 18 अप्रैल को महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए संसद का सत्र बुलाया है, जो एक ऐतिहासिक कदम है। 33 फीसदी आरक्षण मिलने से महिलाएं सशक्त होंगी। महिलाओं और बेटियों के लिए सरकार बहुत सी योजनाएं चला रही है लेकिन जब तक महिलाओं की राजनीति में भागीदारी नहीं बढ़ेगी, ये योजनाएं कागज में सिमटकर रह जाएंगी। महिलाओं को शिक्षित कर आरक्षण देना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन दूर कस्बे से आई महिलाओं को आरक्षण देकर उनको अपने पैरों पर खड़ा करना है। मैं मानती हूं कि इस निर्णय से विकसित भारत 2047 में महिलाओं का काफी योगदान रहेगा।