महिला आरक्षण पर विपक्ष के व्यवहार को लेकर पीयूष गोयल का तीखा बयान
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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को विपक्ष की निंदा करते हुए यह आरोप लगाया कि उसने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से संबंधित एक संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोक दिया और लोकसभा में इसके रोके जाने का 'जश्न' मनाया।
सदन में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि यह नज़ारा "बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक" था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने न केवल बिल का विरोध किया, बल्कि उसे रुकवाने के लिए नारे भी लगाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में, गोयल ने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और 'इंडिया' गठबंधन के अन्य सहयोगी बहस करने के लिए नहीं, बल्कि इस बिल को रोकने के लिए एकजुट हुए थे।
उन्होंने लिखा, "आज, लोकसभा में एक बहुत ही परेशान करने वाला और शर्मनाक दृश्य देखने को मिला। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और 'इंडी' गठबंधन ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन बिल को पारित होने से रोका। इस बिल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की गारंटी दी गई थी, जिसे न केवल खारिज किया गया, बल्कि हैरानी की बात यह है कि इसके रोके जाने पर जश्न भी मनाया गया।"
गोयल ने कहा, "यह विरोध की राजनीति नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं के साथ एक सुनियोजित विश्वासघात है।"
विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं था कि आखिर किस बात का जश्न मनाया जा रहा था; उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कार्य पितृसत्ता का समर्थन करने और महिलाओं के अधिकारों को कुचलने के समान हैं।
गोयल ने आरोप लगाया कि बिल को रोककर, विपक्ष ने महिलाओं को विधायी निकायों में उनके उचित प्रतिनिधित्व से वंचित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि ये घटनाएँ एक बड़े पैटर्न को दर्शाती हैं, और उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध करने और राष्ट्रीय प्रगति से ऊपर राजनीतिक स्वार्थों को रखने का आरोप लगाया।
गोयल ने कहा, "यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। यह एक पैटर्न है।"
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का रवैया न तो महिलाओं के हितों के अनुरूप था और न ही देश की आकांक्षाओं के।
गोयल ने कहा कि इस मुद्दे के राजनीतिक नतीजे होंगे, और यह दावा किया कि महिला वोटर इन घटनाओं को याद रखेंगी। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "उनकी सोच सबके सामने आ गई है, जो न तो महिलाओं के हितों के साथ है और न ही एक उभरते भारत की आकांक्षाओं के। हमारी नारी शक्ति का यह अपमान न तो भुलाया जाएगा और न ही माफ़ किया जाएगा। यह बात दूर-दूर तक फैलेगी, हर निर्वाचन क्षेत्र, हर राज्य और हर चुनाव में इसकी गूंज सुनाई देगी। भारत की महिलाएं याद रखेंगी कि कौन उनके साथ खड़ा था और कौन उनके खिलाफ।"
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष के इन कार्यों की 'राजनीतिक कीमत' न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि अन्य चुनावों में भी देखने को मिलेगी।
उन्होंने कहा, "इस धोखे की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी, न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि पूरे भारत में हर चुनाव में।"