केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का महत्त्वपूर्ण बयान: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सभी दलों का समर्थन अपेक्षित
सारांश
Key Takeaways
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के आरक्षण से संबंधित है।
- केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे ऐतिहासिक बताया है।
- सभी दलों को एकजुट होकर इसका समर्थन करना चाहिए।
- चर्चा की तिथियाँ 16, 17 और 18 अप्रैल हैं।
- यह विधेयक राष्ट्रीय महत्व का है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए इसे महिलाओं के लिए आरक्षण से संबंधित एक ऐतिहासिक और गैर-पक्षपातपूर्ण विधेयक घोषित किया है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस बिल का समर्थन करें और इसे संसद में शीघ्र पारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
किरन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह अधिनियम केवल सरकार का नहीं है, बल्कि यह सम्पूर्ण देश और सभी राजनीतिक दलों का विधेयक है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह कदम महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, इसलिए इसे किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी दलों का आभार व्यक्त किया है, क्योंकि जब यह विधेयक पहले पारित हुआ था, तब सभी ने सहयोग दिया था। वर्तमान में सरकार द्वारा लाए जा रहे संशोधन भी किसी विशेष दल का नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास हैं।
रिजिजू ने बताया कि उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ संवाद किया है और कई बैठकों का आयोजन किया है। हालांकि, कुछ दलों की ओर से राजनीतिक बयानबाजी हो रही है, लेकिन उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि अंततः सभी दल इस विधेयक का समर्थन करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों को पत्र लिखकर और महिलाओं के लिए संदेश भेजकर इस बात पर जोर दिया है कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का बिल है, जिसे सभी को मिलकर पारित करना चाहिए। 16, 17 और 18 अप्रैल को जब इस विधेयक पर चर्चा होगी, तब सभी दलों को एकजुट होकर यह संदेश देना चाहिए कि भारत महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले में विश्व में अग्रणी है। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष का कोई भेद नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल में और देर नहीं की जा सकती, क्योंकि हर दिन महत्वपूर्ण है। सरकार इसे जल्द से जल्द पारित करना चाहती है और उन्हें विश्वास है कि कोई भी राजनीतिक दल इसका विरोध नहीं करेगा, भले ही वे अपनी राय व्यक्त करें।