दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष की निंदा की

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दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष की निंदा की

सारांश

दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने विपक्षी दलों के महिला आरक्षण बिल के खिलाफ मतदान को उनके महिला-विरोधी रवैये का प्रमाण बताया। उन्होंने कांग्रेस और अन्य दलों के समर्थन न देने पर सवाल उठाए।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण बिल: 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव
  • विपक्ष का रवैया: महिला-विरोधी करार
  • कांग्रेस की आलोचना: समर्थन न देने पर सवाल
  • अमित शाह का बयान: विरोध को माफ नहीं किया जाएगा
  • सामाजिक प्रभाव: महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दल अपने महिला-विरोधी रवैये को लेकर बेनकाब हो गए हैं, जो संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खिलाफ मतदान करने के उनके निर्णय से स्पष्ट है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस, राजद और समाजवादी पार्टी जैसे कुछ दल, संसदीय सीटों में वृद्धि के साथ-साथ महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के खिलाफ थे।

सचदेवा ने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने की मांग की कि 1971 से 2009 के बीच, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के दौरान वह संसद सीटों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता क्यों नहीं समझी।

उन्होंने कहा, "हम हमेशा इस नेक कार्य के लिए विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता को स्पष्ट करते रहे हैं, जिसे उन्होंने प्रदान करने से मना कर दिया, और अब वे भारत की 70 करोड़ से अधिक महिलाओं के समक्ष बेनकाब हो गए हैं।"

इससे पहले, लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "देश की महिलाएं, महिलाओं को आरक्षण देने के कार्य में कांग्रेस और राहुल गांधी के विरोध को कभी माफ नहीं करेंगी।"

उन्होंने 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं की भी आलोचना की, जिन्होंने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाया; उन्होंने इसे तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित बताया।

उन्होंने स्पष्ट किया, "भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता। इसके दो मुख्य कारण हैं: पहला, आरक्षण की पात्रता ऐसी नहीं होनी चाहिए कि इसे धर्म परिवर्तन के जरिए प्राप्त किया जा सके; दूसरा, यह उन लोगों के लिए है जो सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं।"

गृह मंत्री ने प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ उत्तर-दक्षिण का विभाजन करने के प्रयासों पर भी विपक्षी दलों की आलोचना की।

उन्होंने कहा, "दक्षिणी राज्यों का इस सदन में उतना ही अधिकार है जितना उत्तरी राज्यों का है। यहां तक कि छोटे से लक्षद्वीप का भी उतना ही अधिकार है जितना उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार का है। इस देश को उत्तर बनाम दक्षिण के नैरेटिव के जरिए विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों के बीच गहरी खाई है। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानती है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ की रणनीति समझता है। यह आवश्यक है कि सभी दल सच्चे अर्थों में महिलाओं के अधिकारों की बात करें।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
वीरेंद्र सचदेवा का बयान किस पर आधारित है?
वीरेंद्र सचदेवा ने विपक्ष के महिला आरक्षण बिल के खिलाफ मतदान को महिला-विरोधी रवैया करार दिया है।
कांग्रेस ने महिला आरक्षण का समर्थन क्यों नहीं किया?
सचदेवा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने महिला आरक्षण को लेकर आवश्यक कदम उठाने में अनिच्छा दिखाई।
अमित शाह ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी का विरोध देश की महिलाओं द्वारा कभी माफ नहीं किया जाएगा।
महिला आरक्षण से समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
महिला आरक्षण से राजनीतिक निर्णयों में महिलाओं की आवाज़ को मजबूती मिलेगी और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा।
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