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मणिपुर का खारुंगपत पक्षी अभयारण्य: संरक्षण और इको-टूरिज्म की नई दिशा

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मणिपुर का खारुंगपत पक्षी अभयारण्य: संरक्षण और इको-टूरिज्म की नई दिशा

सारांश

मणिपुर सरकार ने खारुंगपत में एक नया पक्षी अभयारण्य विकसित करने का निर्णय लिया है। यह पहल जैव विविधता संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। जानिए इसके पीछे के कारण और संभावनाएं।

मुख्य बातें

खारुंगपत में अभयारण्य का विकास जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
यह परियोजना इको-टूरिज्म को बढ़ावा देगी।
संरक्षण के प्रयास स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर किए जाएंगे।
पक्षियों की संख्या में कमी पर चिंता जताई जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसे आधिकारिक मान्यता मिली है।

इम्फाल, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर की सरकार ने काकचिंग जिले के खारुंगपत में एक पक्षी अभयारण्य के विकास की योजना का ऐलान किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना और इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना है।

एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित अभयारण्य का क्षेत्रफल लगभग 227 हेक्टेयर होगा, जो कि कुल आर्द्रभूमि क्षेत्र का करीब 6.7 प्रतिशत है। यह स्थल पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, विशेषकर जलपक्षियों के संरक्षण के लिए, जिसमें स्थानीय और प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं।

अधिकारी के अनुसार, 2023 की पक्षी जनगणना में इस क्षेत्र में लगभग 69 प्रजातियां पाई गई थीं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत प्रवासी पक्षी थे। हालांकि, 2025 में हुई नवीनतम जनगणना में प्रवासी पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है, जिससे राज्य सरकार की चिंता बढ़ी है।

इस कमी के पीछे उपयुक्त आवास की कमी, पक्षियों के बैठने के स्थलों का सिकुड़ना और स्थानीय स्तर पर बढ़ती अशांति जैसे कारक माने जा रहे हैं, जो आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए, और जनता की मांग के अनुरूप, राज्य सरकार ने इस क्षेत्र को 'खारुंगपत पक्षी अभयारण्य' के रूप में अधिसूचित करने का निर्णय लिया है।

अधिकारी ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत खारुंगपत को पक्षी अभयारण्य के रूप में घोषित करने का निर्णय मणिपुर के संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह कदम स्थानीय विधायक उशाम देबेन सिंह के नेतृत्व में जनता की लगातार मांग के बाद उठाया गया है। इस मांग को विभिन्न संगठनों का समर्थन प्राप्त था, जैसे केइराक यूनाइटेड डेवलपमेंट एसोसिएशन, सिटीजन्स एसोसिएशन फॉर रूरल डेवलपमेंट, और साउथ टेंटहा यूथ डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन

संरक्षण के अलावा, यह प्रस्तावित अभयारण्य इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण इको-टूरिज्म स्थल के रूप में उभरने की संभावना रखता है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव वार्डन अनुराग बाजपेयी ने बताया कि वन विभाग, अभयारण्य से संबंधित विकास परियोजनाओं को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने की योजना बना रहा है।

उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म और आजीविका संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को शामिल करने हेतु एक 'इको-डेवलपमेंट कमेटी' का गठन किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संरक्षण के प्रयास समुदाय-आधारित रहें।

सरकार इस पहल को एक जन-केंद्रित परियोजना के रूप में देखती है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसरों के साथ एकीकृत करना है। बाजपेयी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जलपक्षियों का संरक्षण आर्द्रभूमियों की सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि रामसर कन्वेंशन के मानदंड 5 के तहत, किसी वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण तब माना जाता है, जब वह नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षियों को आश्रय देता हो।

उन्होंने इस क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में स्थानीय विधायक, जिला परिषद के सदस्यों, सामुदायिक संगठनों, ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों—जिनमें डिप्टी कमिश्नर, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर शामिल हैं—के योगदान की भी सराहना की।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां पक्षी अभयारण्य का विकास न केवल जैव विविधता संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए इको-टूरिज्म के माध्यम से आर्थिक अवसर भी प्रदान करेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खारुंगपत पक्षी अभयारण्य का क्षेत्रफल कितना होगा?
प्रस्तावित अभयारण्य का क्षेत्रफल लगभग 227 हेक्टेयर होगा।
इस अभयारण्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है।
इस क्षेत्र में कितनी पक्षी प्रजातियां पाई गई हैं?
2023 की पक्षी जनगणना में इस क्षेत्र में लगभग 69 पक्षी प्रजातियां पाई गई थीं।
पक्षियों की संख्या में कमी के कारण क्या हैं?
उपयुक्त आवास की कमी और स्थानीय अशांति जैसे कारणों से पक्षियों की संख्या में कमी आई है।
इस अभयारण्य को कब अधिसूचित किया गया?
इस क्षेत्र को 'खारुंगपत पक्षी अभयारण्य' के रूप में अधिसूचित करने का निर्णय हाल ही में लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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