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सागर के 19 महीने के बच्चे की आंखों की रोशनी: जांच में कुपोषण और विटामिन ए की कमी जिम्मेदार, कॉर्निया ट्रांसप्लांट की तैयारी

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सागर के 19 महीने के बच्चे की आंखों की रोशनी: जांच में कुपोषण और विटामिन ए की कमी जिम्मेदार, कॉर्निया ट्रांसप्लांट की तैयारी

सारांश

सागर के बंडा सिविल अस्पताल में 19 महीने के बच्चे की आंखों की रोशनी जाने का मामला कुपोषण और विटामिन ए की गंभीर कमी की ओर इशारा करता है — लेकिन नेजल ड्रॉप्स देने की प्रक्रिया पर सवाल अभी भी बाकी हैं। बच्चा एम्स भोपाल में कॉर्निया ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा में है।

मुख्य बातें

सागर के बंडा सिविल अस्पताल में 29 मई को इलाज के बाद 19 महीने के विनय की आंखों की रोशनी कथित रूप से चली गई।
जांच समिति ने पाया कि बच्चा कुपोषण और विटामिन ए की गंभीर कमी से पीड़ित था, जिससे कॉर्नियल अल्सर हुए।
जांच के अनुसार, जिस बैच के नेजल ड्रॉप्स का आरोप था, वह अस्पताल के स्टॉक में उपलब्ध नहीं था ।
बच्चा अभी एम्स भोपाल में भर्ती है; चिकित्सकों ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट की योजना बनाई है।
नेजल ड्रॉप्स देने की प्रक्रिया की जांच जारी है; पुलिस भी स्वतंत्र रूप से मामले की जांच कर रही है।
राज्य सरकार ने बच्चे के इलाज में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के बाद 19 महीने के बच्चे विनय की कथित रूप से आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चा गंभीर कुपोषण और विटामिन ए की कमी से पीड़ित था, जिसके कारण उसे कॉर्नियल अल्सर हो गए थे। फिलहाल बच्चा एम्स भोपाल में भर्ती है जहाँ कॉर्निया ट्रांसप्लांट की योजना बनाई जा रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

बच्चे के पिता इंद्रज विश्वकर्मा ने आरोप लगाया था कि 29 मई को बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान उनके बेटे को आंखों की दवा की जगह गलती से नेजल ड्रॉप्स दे दिए गए। परिवार का दावा है कि ड्रॉप्स डालने के तुरंत बाद बच्चे को तेज जलन हुई और बाद में उसकी दृष्टि जाती रही। स्थिति बिगड़ने पर बच्चे को पहले जिला अस्पताल सागर और फिर बेहतर उपचार के लिए एम्स भोपाल रेफर किया गया।

जांच समिति के प्रमुख निष्कर्ष

कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी देवेश पाटेरिया ने बताया कि जांच में सामने आया है कि जिस बैच के नेजल ड्रॉप्स का उल्लेख किया जा रहा था, वह अस्पताल के स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं था। उन्होंने कहा, 'बच्चा कुपोषित था और विटामिन ए की गंभीर कमी के कारण उसे कॉर्नियल अल्सर हो गया था। डॉक्टरों ने भी स्पष्ट किया है कि सामान्य सलाइन नेजल ड्रॉप्स से दृष्टि नहीं जा सकती।' समिति ने दो दिन की जांच के बाद यह प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

अनुत्तरित सवाल और जारी जांच

हालाँकि, जांच समिति ने यह भी स्वीकार किया कि मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यह अभी भी जांच का विषय बना हुआ है कि बच्चे को नेजल ड्रॉप्स दिए कैसे गए — यानी प्रक्रिया में कोई चूक हुई या नहीं। पुलिस भी इस मामले की अलग से जांच कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का आश्वासन और आगे का उपचार

राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि बच्चे के इलाज में हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट की योजना तैयार की है, जो बच्चे की दृष्टि आंशिक रूप से बहाल करने का एकमात्र संभावित विकल्प बताया जा रहा है। यह मामला मध्य प्रदेश में शिशु कुपोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित है कि एक सरकारी अस्पताल में भर्ती बच्चे में इतनी गंभीर पोषण की कमी की पहचान पहले क्यों नहीं हुई। नेजल ड्रॉप्स की प्रक्रिया की जांच जारी रहना यह संकेत देता है कि प्रशासनिक चूक की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। मध्य प्रदेश में शिशु कुपोषण के आँकड़े पहले से ही चिंताजनक हैं — यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी की व्यापक विफलता का प्रतिबिंब है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सागर के 19 महीने के बच्चे की आंखों की रोशनी क्यों गई?
जांच समिति के अनुसार, बच्चे की दृष्टि जाने का प्रमुख कारण कुपोषण और गंभीर विटामिन ए की कमी से उत्पन्न कॉर्नियल अल्सर है। समिति ने स्पष्ट किया कि सामान्य सलाइन नेजल ड्रॉप्स से दृष्टि नहीं जा सकती।
बंडा सिविल अस्पताल पर क्या आरोप लगाए गए थे?
बच्चे के पिता इंद्रज विश्वकर्मा ने आरोप लगाया था कि 29 मई को अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे को आंखों की दवा की जगह गलती से नेजल ड्रॉप्स दिए गए, जिससे तेज जलन हुई और बाद में दृष्टि चली गई। हालाँकि जांच में उस बैच के ड्रॉप्स की अस्पताल में उपलब्धता नहीं पाई गई।
बच्चे का अभी कहाँ और कैसा इलाज हो रहा है?
बच्चा फिलहाल एम्स भोपाल में भर्ती है जहाँ चिकित्सकों ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट की योजना बनाई है। राज्य सरकार ने इलाज में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
क्या इस मामले में कोई कार्रवाई होगी?
स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट आ चुकी है, लेकिन नेजल ड्रॉप्स देने की प्रक्रिया की जांच अभी जारी है। पुलिस भी स्वतंत्र रूप से मामले की जांच कर रही है और अधिकारियों ने कहा है कि लापरवाही सिद्ध होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
विटामिन ए की कमी से बच्चों की आंखों को कितना खतरा होता है?
विटामिन ए की गंभीर कमी से बच्चों में कॉर्नियल अल्सर और अंधेपन का खतरा होता है, जो विशेष रूप से कुपोषित शिशुओं में तेजी से बढ़ सकता है। यह स्थिति समय पर पोषण हस्तक्षेप न होने पर स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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